देश भर में बजा यूपी का डंका, एक्सप्रेस-वे और लिंक रोड से अब हर सफर होगा आसान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब सड़कों का ऐसा जाल बिछ गया है, कि अगर इसे एक्सप्रेस वे हब कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।     29 अप्रैल को हुए गंगा एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण के बाद तो ये तस्वीर और भी स्पष्ट हो गई है। इस एक्सप्रेस वे से अब पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच की भौगोलिक दूरी बेहद कम हो गई है। पहले जहां पश्चिम से पूर्वी यूपी तक पहुंचने में 10 से 12 घंटे लगता था, वहीं अब मात्र 6 से 7 घंटे लगेगा।

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9 एक्सप्रेसवे संचालित, 13 पर काम जारी

मौजूदा समय में प्रदेश में 9 एक्सप्रेस-वे पूरी तरह संचालित हैं, जबकि 13 अन्य परियोजनाओं पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य हर जिले को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से जोड़ना है, ताकि विकास की गति को नई रफ्तार मिल सके और यूपी की अर्थव्यवस्था 1 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को छू सके।

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उत्तर प्रदेश की सड़कों पर अब विकास दौड़ रहा है और इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य ने सड़क नेटवर्क के मामले में बड़े-बड़े विकसित राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। वर्तमान में संचालित 9 एक्सप्रेस-वे में गंगा एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसे विशाल कॉरिडोर शामिल हैं।

इन सड़कों ने न केवल यात्रा को सुखद बनाया है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर से लेकर बिहार की सीमा तक एक निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान की है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे ने जहां पश्चिमी यूपी की रफ्तार बढ़ाई है, वहीं पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पिछड़े इलाकों के लिए भाग्य रेखा साबित हो रहे हैं। आने वाले समय में जब निर्माणाधीन 13 नए एक्सप्रेस-वे का काम पूरा हो जाएगा, तब उत्तर प्रदेश की सड़क प्रणाली वैश्विक स्तर की हो जाएगी।

मई में शुरू होगा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे

राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर के बीच रोजाना सफर करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी आने वाली है। एनएचएआई द्वारा तैयार किया जा रहा लगभग 63 किलोमीटर लंबा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे मई 2026 में शुरू होने की पूरी संभावना है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही दोनों शहरों के बीच का सफर, जो फिलहाल भारी जाम और भीड़ के कारण घंटों में तय होता था, वह घटकर मात्र 35 से 40 मिनट रह जाएगा।

यह एक्सप्रेस-वे न केवल समय बचाएगा, बल्कि दोनों बड़े शहरों के बीच व्यापारिक सुगमता को भी एक नए स्तर पर ले जाएगा। इस कॉरिडोर पर चढ़ने के बाद वाहन बिना किसी रुकावट के अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे, जिससे ईंधन की बचत के साथ-साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।

उत्तर प्रदेश की नजर अब केवल राज्य के भीतर की सड़कों पर नहीं है, बल्कि यह पड़ोसी राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक अपनी पहुंच बना रहा है। भविष्य की बड़ी परियोजनाओं में गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस-वे, गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे और वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे प्रमुख हैं।

विशेष रूप से वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे पूर्वी भारत के व्यापारिक समीकरण बदल देगा, क्योंकि इसके पूरा होने के बाद वाराणसी से कोलकाता तक की यात्रा का समय लगभग आधा रह जाएगा। वहीं, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार से जोड़ देगा, जिससे लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में एक बड़ी क्रांति आने की उम्मीद है। ये एक्सप्रेस-वे न केवल सड़क मात्र हैं, बल्कि ये औद्योगिक गलियारों के रूप में विकसित किए जा रहे हैं।

डिफेंस कॉरिडोर और सौर ऊर्जा संयंत्र बढ़ा रहे ताकत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गंगा एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण ने कनेक्टिविटी की एक नई इबारत लिखी है। यह एक्सप्रेस-वे पश्चिमी यूपी के मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है, जो आधे दर्जन से अधिक जिलों को सीधे जोड़ता है। इस एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक हब विकसित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

गंगा एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से अब मेरठ से प्रयागराज की दूरी तय करना बेहद आसान हो गया है। इसी तरह, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे ने उस क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है जिसे कभी पानी और सड़कों की किल्लत के लिए जाना जाता था। अब वहां डिफेंस कॉरिडोर और सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की जा रही है, जो राज्य के विजन को स्पष्ट करते हैं।

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मुख्य एक्सप्रेस-वे को आपस में जोड़ने के लिए सरकार ‘लिंक एक्सप्रेस-वे’ की रणनीति पर काम कर रही है ताकि कोई भी क्षेत्र विकास की इस दौड़ में पीछे न रह जाए। बलिया लिंक एक्सप्रेस-वे, विंध्य एक्सप्रेस-वे, जेवर लिंक एक्सप्रेस-वे और फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाएं प्रमुख कॉरिडोर के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेंगी।

यूपी की तरफ रुख कर रहे निवेशक

जेवर लिंक एक्सप्रेस-वे विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सीधे अन्य एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा, जिससे हवाई यात्रियों और कार्गो मूवमेंट को गति मिलेगी। फर्रुखाबाद और विंध्य क्षेत्र जैसे इलाकों में भी इन सड़कों के आने से कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाना और औद्योगिक माल की आवाजाही करना काफी सस्ता और सुलभ हो जाएगा।

औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी का कहना है कि, उत्तर प्रदेश अब सही मायनों में निवेश के लिए सबसे पसंदीदा राज्य बन गया है। उनके अनुसार, गंगा एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण के बाद अब भारत के कुल एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में है।

यह आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि यूपी कितनी तेजी से एक्सप्रेस-वे पावरहाउस के रूप में उभर रहा है। एक्सप्रेस-वे का यह जाल न केवल यात्रियों को सुविधा दे रहा है, बल्कि यह यूपी को लॉजिस्टिक्स का बड़ा केंद्र बना रहा है। बड़े निवेशक अब यूपी की ओर रुख कर रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि यहां तैयार माल को देश के किसी भी कोने में पहुंचाना अब घंटों का काम रह गया है।

 

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