8 घंटे सोने के बाद भी नहीं जाती है थकान? कहीं आप भी तो नहीं हो रहे इस बीमारी का शिकार

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद और सेहत का बैलेंस पूरी तरह से बिगड़ चुका है। वैसे तो युवा प्रोफेशनल 8 घंटे की नींद पूरी करने की बात करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ सुबह उठते ही उन्हें शरीर में भारीपन, थकान और सुस्ती महसूस होने की भी शिकायत करते हैं। इसे लेकर मेडिकल साइंस और विशेषज्ञों का कहना है कि, आखें बंद करके बिस्तर पर लेटे रहना ही ‘नींद’ नहीं कहते हैं। अच्छी नींद का मतलब है थकान दूर होना।

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आरामदायक नींद जरूरी

हालिया स्वास्थ्य चेतावनियां यह दर्शाती हैं कि स्क्रीन टाइम, तनाव और अनियमित जीवनशैली हमारे शरीर को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे है। यही वजह कि आप भी बिस्तर छोड़ने के बाद तरोताजा महसूस नहीं करते और दिन भर थकान, भारीपन और सुस्ती महसूस करते हैं।

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आपको बता दें कि ये समस्या सिर्फ आपकी ही नहीं है बल्कि अधिकतर लोगों की है। जी हां अधिकतर लोग इस उलझन में रहते हैं कि घड़ी की सुइयों के हिसाब से 7 से 8 घंटे की नींद पूरी करने के बाद भी वे थकान का अनुभव क्यों कर रहे हैं। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण नींद की गुणवत्ता यानी स्लीप क्वालिटी का अभाव है। केवल सोना काफी नहीं है, बल्कि उस नींद का गहरा और आरामदायक होना जरूरी है।

नींद को प्रभावित करती है नीली रोशनी

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि, रात को मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का लगातार इस्तेमाल करने से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे मस्तिष्क में मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को दबा देती है। मेलाटोनिन ही वह हार्मोन है जो शरीर को संकेत देता है कि अब सोने का समय हो गया है। जब हम स्क्रीन देखते हुए सोफे या बिस्तर पर झपकी लेते हैं, तो हमारा दिमाग सक्रिय रहता है, जिससे गहरी नींद नहीं मिल पाती। यही कारण है कि सुबह उठने पर सिर भारी रहता है और पूरा दिन चिड़चिड़ापन बना रहता है।

तनाव अब केवल मानसिक समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह एक फिजिकल साइलेंट किलर बन चुकी है। जब हम लगातार तनाव में रहते हैं, तो शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसका असर केवल मन पर नहीं, बल्कि शरीर की हर कोशिका पर पड़ता है। तनाव का असर आपकी त्वचा पर मुंहासों और ड्राईनेस के रूप में दिखता है, तो बालों के झड़ने का कारण भी बनता है।

पचान तंत्र पर पड़ता है तनाव  का असर

दिलचस्प बात यह है कि तनाव का सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है जिसे गट-ब्रेन कनेक्शन कहा जाता है। दिमाग और पेट के बीच एक गहरा संबंध है, जब आप अधिक तनाव में होते हैं, तो पेट में दर्द, गैस, ऐंठन या अपच जैसी समस्याएं सामान्य हो जाती हैं। कई लोग इसे केवल खराब खान-पान मानते हैं, जबकि इसकी असली जड़ मानसिक दबाव होता है।

इसके अलावा, लंबे समय तक मोबाइल को गर्दन झुकाकर देखने से टेक्स्ट नेक की समस्या एक महामारी की तरह फैल रही है। जब हम घंटों झुककर फोन का उपयोग करते हैं, तो गर्दन की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यह दबाव न केवल ऊपरी पीठ, कंधों और गर्दन में जकड़न पैदा करता है, बल्कि धीरे-धीरे शरीर का पोश्चर भी बिगाड़ देता है।

सुधारे ये आदतें

लगातार रहने वाला सिरदर्द, जिसे हम अक्सर नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, असल में इसी पोश्चर की खराबी का परिणाम होता है। आज के युवाओं की एक बहुत बड़ी आबादी ऐसी है जिनके सभी मेडिकल टेस्ट जैसे हीमोग्लोबिन या विटामिन लेवल सामान्य आते हैं, लेकिन फिर भी वे हर वक्त थका हुआ महसूस करते हैं। इसके पीछे देर रात तक जागना, शारीरिक गतिविधि का अभाव और धूप का न मिलना जैसी आदतें जिम्मेदार हैं।

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अच्छी सेहत और पर्याप्त ऊर्जा बनाए रखने के लिए किसी चमत्कार की नहीं, बल्कि अनुशासन की जरूरत है। शरीर की ऊर्जा वापस पाने के लिए सबसे पहले अपनी बॉडी क्लॉक का सम्मान करें और रोजाना सोने-उठने का एक निश्चित समय तय करें। सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी स्क्रीन बंद कर दें और मोबाइल को खुद से दूर रखें। रोजाना कम से कम 30 मिनट की तेज वॉक, योग या एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करें। सुबह या शाम की कुछ देर की धूप विटामिन डी के स्तर को बनाए रखती है, जो ऊर्जा के लिए जरूरी है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें

तनाव को कम करने के लिए ध्यान और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें। यह समझना जरूरी है कि अच्छी नींद बॉडी का रिपेयर मैकेनिज्म है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है, फोकस और याददाश्त को सुधारती है और गंभीर बीमारियों के खतरों को कम करती है। यदि पर्याप्त अनुशासन के बाद भी आप लगातार थकान महसूस कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें क्योंकि यह किसी छिपी हुई शारीरिक समस्या का संकेत हो सकता है जिसके लिए डॉक्टर से सलाह लेना अनिवार्य है।

 

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