
जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है और चिलचिलाती धूप ने तेवर दिखाने शुरू किए हैं वैसे-वैसे आम लोगों के साथ-साथ माइग्रेन से जूझ रहे लोगों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और न्यूरोलॉजिस्ट्स का मानना है कि, माइग्रेन एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो वैसे तो साल भर बनी रहती है, लेकिन गर्मियों के महीनों में इसके अटैक की संख्या और दर्द की तीव्रता में अचानक बढ़ोतरी देखी जाती है।
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डिहाइड्रेशन से बचें
हैरान करने वाली बात यह है कि, इसका सीधा कारण केवल बढ़ता तापमान नहीं है, बल्कि इस मौसम में सक्रिय होने वाले वे ट्रिगर्स हैं जो माइग्रेन के मरीजों के लिए दुश्मन साबित होते हैं। चिकित्सकों के अनुसार जिन लोगों को माइग्रेन की पुरानी शिकायत है, उनके लिए गर्मियों का वातावरण और बदलती लाइफस्टाइल जोखिम को दोगुना कर देती है, क्योंकि इस मौसम में पर्यावरण से जुड़े कुछ ऐसे कारक हावी हो जाते हैं जिन्हें नियंत्रित करना अक्सर मुश्किल होता है।

गर्मी के मौसम में माइग्रेन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण डिहाइड्रेशन को माना जाता है। दरअसल इस दौरान शरीर से पसीने के रूप में भारी मात्रा में तरल पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और यदि इसकी भरपाई समय पर न की जाए तो शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है। न्यूरोलॉजिस्ट्स की मानें तो शरीर में पानी की हल्की सी कमी भी ब्लड फ्लो और ब्रेन फंक्शन को प्रभावित करती है जो माइग्रेन को ट्रिगर करने का सबसे मुख्य कारण है।
इसके अलावा गर्मियों में सूरज की तीखी रोशनी और आंखों को चुंधिया देने वाली चमक भी माइग्रेन के मरीजों के लिए किसी सजा से कम नहीं होती। दोपहर के समय जब धूप अपने चरम पर होती है तब लंबे समय तक बाहर रहने से आंखों और दिमाग की नसों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है जिससे अचानक तेज का दर्द शुरू हो सकता है।
जीवनशैली में अनियमितता
मौसम बदलने के साथ ही हमारी दिनचर्या भी पूरी तरह बदल जाती है जो माइग्रेन को न्यौता देने का काम करती है। गर्मियों में अक्सर लोग देर रात तक जागते हैं और खान-पान के समय में भी अनियंत्रित बदलाव आ जाते हैं। नींद की कमी, समय पर भोजन न करना, अधिक यात्रा और शारीरिक थकान माइग्रेन को और भी गंभीर बना देते हैं।
खाली पेट रहने और थकावट से शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है जिससे माइग्रेन अटैक की संभावना बढ़ जाती है। अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरों में रहने वाले लोगों को माइग्रेन का खतरा अधिक रहता है क्योंकि कंक्रीट के जंगल और बढ़ता प्रदूषण शहरों के तापमान को सामान्य से अधिक बढ़ा देते हैं। यह बढ़ा हुआ तापमान शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालता है जिससे माइग्रेन के लक्षण और तेज हो जाते हैं।

माइग्रेन केवल एक साधारण सिर दर्द नहीं है बल्कि इसमें सिर के एक तरफ तेज टीस मारने वाला दर्द होता है जिसके साथ मरीज को मतली, उल्टी, तेज रोशनी और आवाज से चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। कई बार यह दर्द कुछ घंटों से शुरू होकर लगातार दो से तीन दिनों तक बना रह सकता है जिससे मरीज का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। इससे बचाव के लिए विशेषज्ञों का कहना है कि हाइड्रेशन का सबसे अधिक ख्याल रखना चाहिए और दिन भर में कम से कम तीन से चार लीटर पानी पीना चाहिए।
करें ये उपाय
इसके साथ ही दोपहर के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए और यदि जाना जरूरी हो तो सनग्लासेस पहनकर या सिर को ढककर ही निकलें। रोजाना सात से आठ घंटे की भरपूर नींद लेना और समय पर संतुलित भोजन करना भी बेहद जरूरी है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि माइग्रेन के अटैक बार-बार आ रहे हों तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।
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