
जब हम मधुमेह यानी डायबिटीज की बात करते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में केवल ब्लड शुगर लेवल, बार-बार प्यास लगना या अत्यधिक यूरिन आने जैसे लक्षण आते हैं। हम इस बात पर ध्यान ही नहीं देते कि, यह बीमारी चुपचाप हमारे शरीर के अंगों को अंदर से खोखला करना शुरू कर देती है। हालिया शोध और मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, डायबिटीज के सबसे गंभीर और शुरुआती संकेत हमारे पैरों में दिखाई देते हैं। चूंकि हमारे पैर शरीर का पूरा वजन संभालते हैं और इनकी कार्यक्षमता रक्त संचार और तंत्रिका तंत्रपर निर्भर करती है, इसलिए इनमें होने वाला कोई भी असामान्य बदलाव डायबिटीज का अलार्म हो सकता है।
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बढ़ जाता है ब्लड शुगर

डायबिटीज के कारण शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है, जो धीरे-धीरे रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। पैरों तक रक्त का संचार शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में चुनौतीपूर्ण होता है, जब नसों को ऑक्सीजन और पोषण मिलना कम हो जाता है, तो शरीर ‘पेरिफेरल न्यूरोपैथी’ जैसी स्थितियों के जरिए हमें चेतावनी देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि, यदि इन शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो भविष्य में होने वाले गंभीर घावों, संक्रमण और अंगों के नुकसान से बचा जा सकता है।
झनझनाहट और सुई जैसी चुभन
अक्सर लोग पैरों में होने वाली झनझनाहट या सुई चुभने जैसे एहसास को थकान या लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यदि यह झनझनाहट बार-बार हो या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह पेरिफेरल न्यूरोपैथी का स्पष्ट संकेत है। यह स्थिति तब पैदा होती है, जब हाई ब्लड शुगर के कारण पैर की नसें क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। कई मरीज बताते हैं कि यह झनझनाहट रात के समय ज्यादा महसूस होती है, जो गहरी नींद में खलल पैदा करती है।
पिंडलियों में जलन
कुछ मरीजों को अपनी पिंडलियों में असहनीय जलन महसूस होती है। लोग इसे अक्सर ज्यादा चलने-फिरने या काम की थकान समझ लेते हैं, लेकिन चिकित्सा जगत में इसे नसों के बिगड़ने का एक प्रमुख लक्षण माना गया है। रात के वक्त पैरों के तलवों या पिंडलियों में आग जैसी जलन महसूस होना इस बात का प्रमाण है कि शरीर की तंत्रिकाएं अपना काम ठीक से नहीं कर पा रही हैं। इसे नजरअंदाज करना नसों की दीर्घकालिक क्षति को दावत देना है।
त्वचा के रंग में बदलाव
डायबिटीज के कारण होने वाली डायबिटिक डर्मोपैथी में अक्सर टखनों या पिंडलियों के आसपास त्वचा का रंग गहरा होने लगता है। कई बार लोग इसे धूप में जलने या गंदगी समझकर साफ करने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह छोटे ब्लड वेसल्स के डैमेज होने का परिणाम होता है। इसी तरह, यदि पैरों की त्वचा असामान्य रूप से चमकदार, कसी हुई या सूजी हुई दिखाई देने लगे, तो यह शरीर में तरल पदार्थ जमा होने का संकेत है, जो सीधे तौर पर रक्त प्रवाह में आई बाधा को दर्शाता है।
बालों का कम होना
क्या आपने कभी गौर किया है कि, आपके पैरों के बाल अचानक गायब हो रहे हैं? यह कोई सामान्य समस्या नहीं है। डायबिटीज के कारण जब ब्लड फ्लो बाधित होता है, तो बालों की जड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते। नतीजतन, पैरों पर बालों का विकास रुक जाता है या वे झड़ जाते हैं। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि, आपके अंगों तक रक्त का पर्याप्त संचार नहीं हो रहा है।
पैरों में ऐंठन
अक्सर लोग रात को पैरों में होने वाली तेज ऐंठन को पानी या नमक की कमी (इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन) मान लेते हैं। हालांकि यह एक कारण हो सकता है, लेकिन डायबिटीज में यह समस्या मांसपेशियों तक रक्त के न पहुंचने के कारण होती है। जब मांसपेशियों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो वे दर्द भरी ऐंठन के साथ प्रतिक्रिया करती हैं।
तापमान में बदलाव और घाव न भरना
पैरों का तापमान भी एक बड़ा संकेतक है। डायबिटीज के मरीजों को अक्सर पैर असामान्य रूप से ठंडे महसूस होते हैं, जबकि कभी-कभी उनमें तेज गर्माहट भी हो सकती है। यह नसों और ब्लड वेसल्स के असंतुलन को दिखाता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि डायबिटीज में छोटी-मोटी खरोंच या घाव का देर से भरना। हाई ब्लड शुगर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है, जिससे मामूली चोट भी एक बड़े घाव और संक्रमण का रूप ले सकती है।
समय रहते डॉक्टर से करें संपर्क
प्रोफेसरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि ,अगर आपको पैरों में ऐसे बदलाव लगातार दिखाई दे रहे हैं, तो बिना किसी देरी के अपने शुगर लेवल की जांच करानी चाहिए। डायबिटीज के मरीज यदि रोज अपने पैरों की जांच करें, उन्हें साफ और सूखा रखें और किसी भी घाव या रंग परिवर्तन को गंभीरता से लें, तो वे इस बीमारी की जटिलताओं से काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं। याद रखें, डायबिटीज में आपके पैर आपके स्वास्थ्य का आईना होते हैं।
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