शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने फूंका ‘गौरक्षार्थ धर्म युद्ध’ का बिगुल

वाराणसी। सनातन धर्म की रक्षा और गौवंश के सम्मान को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से, ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। शंकराचार्य ने गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की है।   उन्होंने  इस आन्दोलन को ‘गौरक्षार्थ धर्म युद्ध’ के नाम से शुरू किया है।

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शाम पांच बजे हुई आन्दोलन की औपचारिक शुरुआत 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के इस अभियान का मुख्य मकसद गौमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के अलावा गोमांस निर्यात एवं गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना है। शुक्रवार से शुरू हुआ यह आंदोलन केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सनातनी मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए एक बड़ा वैचारिक संघर्ष माना जा रहा है। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश सरकार को गाय को राज्य माता घोषित करना होगा, ताकि भविष्य में इसे राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र माता के रूप में प्रतिष्ठित किया जा सके।

शंकराचार्य

आंदोलन की औपचारिक शुरुआत आज शाम पांच बजे वाराणसी के श्री शंकराचार्य घाट पर हुई। इस अवसर पर गो ब्राह्मण प्रतिपालक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई गई और घाट पर मौजूद गौ-भक्तों की उपस्थिति में शंकराचार्य ने गौमाता की विशेष पूजा-अर्चना कर धर्म युद्ध का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह शिवाजी महाराज ने धर्म और गौ रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उसी आदर्श पर चलकर अब समाज को जागृत करने का समय आ गया है।

इन जिलों से गुजरेगी यात्रा 

शंकराचार्य का यह काफिला उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर गुजरेगा, जिसका समापन राजधानी लखनऊ में एक विशाल जनसभा के साथ होगा। कल शनिवार को स्वामीजी सुल्तानपुर पहुंचेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद वह जौनपुर होते हुए रायबरेली प्रस्थान करेंगे। रविवार को यात्रा मोहनलालगंज, लालगंज और अचलगंज जैसे क्षेत्रों से गुजरेगी, जहां स्थानीय लोगों से संवाद होगा।

शाम को यात्रा उन्नाव पहुंचेगी और सोमवार को बांगरमऊ और बघोली में सभाओं के पश्चात यह यात्रा पावन तीर्थ नैमिषारण्य पहुंचेगी। मंगलवार को सिंधौली और इजौटा में जनसंपर्क के बाद शंकराचार्य का काफिला लखनऊ की सीमा में प्रवेश करेगा। बुधवार को दोपहर दो बजे लखनऊ के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर गौरक्षार्थ धर्म युद्ध का औपचारिक शंखनाद होगा, जहां प्रदेश भर से आए गौ-भक्तों की उपस्थिति में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है, बल्कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पिछले जनवरी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चालीस दिनों का अल्टीमेटम दिया था। इसमें गाय को राज्य माता घोषित करने, गोमांस निर्यात पर रोक लगाने और गोहत्या पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी। स्वामी जी ने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि अल्टीमेटम की समय सीमा बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिसके कारण अब धर्म युद्ध का मार्ग चुनना अनिवार्य हो गया है।

व्यवस्था पर कसा तंज

आंदोलन के दौरान शंकराचार्य के तेवर काफी सख्त नजर आए। उन्होंने व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि, गौमाता का मांस बेचकर प्राप्त होने वाले डॉलर से राम राज लाने की कोशिश हो रही है, लेकिन कोई भी सच्चा सनातनी इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने समाज को संदेश देते हुए स्पष्ट किया कि जो गाय को माता मानता है वही हमारा भाई है, जबकि गोहत्या का समर्थन करने वाला मात्र एक कसाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गौ रक्षा सनातन धर्म का मूल है और इसके बिना धर्म की रक्षा असंभव है।

शंकराचार्य ने अपने समर्थकों और गौ-भक्तों से अपील की है कि वे पूरी मर्यादा और शांति के साथ इस यात्रा में शामिल हों। हालांकि, उन्होंने सरकार को चेतावनी भी दी है कि यदि शांतिपूर्ण तरीके से उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले समय में आंदोलन का रुख और भी अधिक सख्त होगा।

मठ-मंदिरों और गौ-भक्तों में उत्साह

इस ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश के विभिन्न धार्मिक संगठनों, मठ-मंदिरों और गौ-भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह यात्रा सफल रहती है और लखनऊ में बड़ी भीड़ जुटती है, तो गौ रक्षा का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ जाएगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अंत में कहा कि यह केवल धर्म युद्ध नहीं है बल्कि सत्य की जीत का संघर्ष है। गौ माता निश्चित रूप से राष्ट्र माता बनेगी और सनातन की रक्षा होगी।

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