POCSO केस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस, शंकराचार्य बोले-‘हम सहयोग करेंगे’

वाराणसी। कथित यौन उत्पीड़न मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने आज सोमवार को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गिरफ्तार करने के लिए उनके वाराणसी स्थित आवास पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। पुलिस टीम ने गिरफ्तारी का प्रयास किया, लेकिन स्वामी ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि वे पुलिस का कोई विरोध नहीं करेंगे और पूरा सहयोग देंगे।

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अविमुक्तेश्वरानंद ने खारिज किया आरोप

उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्हें तीन अदालतों, जनता, अपना दिल और भगवान से पहले ही क्लीन चिट मिल चुकी है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पत्रकारों से कहा, हम किसी भी तरह से पुलिस का विरोध नहीं करेंगे, हम सहयोग करेंगे। पुलिस जो भी कर रही है, जनता सब देख रही है। हमारे लिए तीन अदालतें हैं, एक निचली अदालत जनता है, जो सब देख रही है और फैसला देगी,  दूसरी बीच की अदालत हमारा अपना दिल है, जहां हम जानते हैं कि हम निर्दोष हैं और तीसरी भगवान की अदालत है, जो सही-गलत सब देख रही है।

अविमुक्तेश्वरानंद

उन्होंने कहा इन तीन जगहों से हमें क्लीन चिट मिल चुकी है और रही बाद सच या झूठ की तो सच सामने या ही जाता है। झूठ ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाता।

नाबालिग के उत्पीड़न का आरोप 

आपको बता दें कि, यह मामला पिछले हफ्ते प्रयागराज में विशेष POCSO कोर्ट के आदेश पर शुरू हुआ था। 21 फरवरी 2026 को स्पेशल जज (POCSO) विनोद कुमार चौरसिया ने शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की याचिका पर सुनवाई के बाद झूंसी थाने में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। कोर्ट में दर्ज याचिका की सुनवाई एक दौरान दो कथित नाबालिग पीड़ितों (उम्र 14 और 17 वर्ष) के बयान, स्वतंत्र गवाहों की गवाही और प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को आधार बनाया।

कोर्ट के आदर्श के बाद शनिवार रात करीब साढ़े 11 बजे झूंसी थाने में दर्ज की गई अविमुक्तेश्वरा नन्द के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई। ये एफआईआर यौन उत्पीड़न, बलात्कार, POCSO के गंभीर अपराधों और संगठित अपराध से जुड़ी धाराओं में दर्ज की गई। आरोप 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच की घटनाओं से संबंधित हैं, जिसमें माघ मेले के दौरान प्रयागराज आश्रम और विद्या मठ (वाराणसी) में नाबालिग शिष्यों (बटुकों) के साथ यौन शोषण का दावा किया गया है। शिकायत में कहा गया कि गुरु-शिष्य संबंध के बहाने धार्मिक मार्गदर्शन के नाम पर अपराध किए गए।

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR 

आशुतोष ब्रह्मचारी ने कोर्ट में दावा किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने आश्रम में कम से कम दो नाबालिगों (और संभवतः अधिक) का यौन शोषण किया। उन्होंने पीड़ितों के बयान कैमरे पर दर्ज कराए और कुछ सबूत (जैसे सीडी) कोर्ट में पेश किए। कोर्ट ने पुलिस की प्रारंभिक जांच में पीड़ितों के बयानों को गंभीर पाया और FIR का आदेश दिया। FIR में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और 2-3 अज्ञात व्यक्तियों को नामजद किया गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, FIR दर्ज होने के बाद जांच तेज हो गई है। झूंसी थाना पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और सबूत जुटाने शुरू किए। सोमवार को वाराणसी पहुंची टीम ने स्वामी से पूछताछ करने और गिरफ्तारी का प्रयास किया। हालांकि, स्वामी ने गिरफ्तारी के बजाय सहयोग का भरोसा दिया। स्वामी ने आरोपों को साजिश बताया और कहा कि शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी इतिहास-शीटर हैं तथा यह सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश है।

धार्मिक जगत में हलचल

उन्होंने माघ मेले के दौरान CCTV फुटेज का हवाला दिया, जिसमें कोई गलत काम नहीं दिखता। यह मामला धार्मिक जगत में हलचल मचा रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं और हाल ही में माघ मेले में पुलिस से विवाद के कारण भी सुर्खियों में रहे थे। आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि अब न्याय मिलेगा और वे सनातन यात्रा निकालकर सच्चाई लोगों तक पहुंचाएंगे।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में FIR को चुनौती देने की तैयारी की है।

उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और झूठ का पर्दाफाश होगा। पुलिस ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रहेगी और पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।यह घटना POCSO एक्ट के तहत धार्मिक गुरुओं पर लगे गंभीर आरोपों का एक और मामला है, जो समाज में बहस छेड़ रही है। आगे जांच से क्या खुलासा होता है, यह देखना बाकी है। फिलहाल, वाराणसी में तनाव का माहौल है और पुलिस सतर्क है।

 

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