
गाजियाबाद। दिल्ली- NCR की परिवहन व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के इतिहास में एक ऐसा अध्याय जुड़ने जा रहा है, जो आने वाले दशकों के लिए विकास की दिशा और दशा तय करेगा। ईस्टर्न ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (EORC) परियोजना के रूप में एक ऐसी महत्वाकांक्षी योजना अब फाइलों से निकलकर धरातल पर उतरने को तैयार है, जो न केवल गाजियाबाद बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच की भौगोलिक दूरियों को न्यूनतम कर देगी।
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औद्योगिक मानचित्र में हो जायेगा बदलाव
हाल ही में हरियाणा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (HRIDC) ने इस विशाल प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी रिपोर्ट गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) को सौंप दी है। इस कदम के साथ ही अब तकनीकी स्तर पर इस महापरियोजना को क्रियान्वित करने की कवायद तेज हो गई है। यह कॉरिडोर केवल लोहे की पटरियों का एक जाल मात्र नहीं है, बल्कि यह एनसीआर के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक मानचित्र को पूरी तरह बदलने वाला एक गेम-चेंजर मास्टर प्लान साबित होने वाला है।
दुहाई बनेगा आधुनिक परिवहन का संगम केंद्र
इस पूरी परियोजना का सबसे क्रांतिकारी और महत्वपूर्ण पहलू इसका नमो भारत यानी दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (RRTS) कॉरिडोर के साथ होने वाला एकीकरण है। योजना के मुताबिक, इस कॉरिडोर को गाजियाबाद के दुहाई में आरआरटीएस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। दुहाई के पास प्रस्तावित इस लिंक से यात्रियों को मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट का एक ऐसा विश्वस्तरीय अनुभव प्राप्त होगा, जिसकी कल्पना अब तक केवल विकसित देशों के बड़े शहरों में की जाती थी।

कल्पना कीजिए कि एक यात्री मेरठ या दिल्ली से हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन में सवार होता है और दुहाई पहुंचकर बिना किसी परेशानी के सीधे ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर की ट्रेन पकड़ लेता है, जो उसे जेवर एयरपोर्ट या हरियाणा के सोनीपत की ओर ले जाती है। यह निर्बाध यात्रा न केवल समय बचाएगी बल्कि निजी वाहनों पर निर्भरता को भी कम करेगी।
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव विवेक मिश्रा ने इस परियोजना की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि फिजिबिलिटी रिपोर्ट का बहुत ही गहनता और बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। प्राधिकरण की तकनीकी टीम इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि उत्तर प्रदेश के दायरे में आने वाले रेल रूट, स्टेशनों के स्थान और भूमि उपलब्धता में कोई तकनीकी या कानूनी अड़चन न आए। इस अध्ययन के पूरा होने के तुरंत बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह डीपीआर ही वह अंतिम दस्तावेज होगा, जो इस विशाल ढांचे के निर्माण की गति, इसके वित्तीय स्वरूप और इंजीनियरिंग के बारीकियों को तय करेगा।
एनसीआर का अपना रिंग रेल नेटवर्क
ईस्टर्न ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर का विस्तार एक विशाल अर्धवृत्त के रूप में है, जो एनसीआर के कई महत्वपूर्ण शहरों को आपस में पिरोता है। यह कॉरिडोर हरियाणा के सोनीपत और कुंडली से अपनी यात्रा शुरू करेगा और उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में प्रवेश करते हुए गाजियाबाद और हापुड़ जैसे औद्योगिक व आवासीय जिलों को छुएगा। इसके बाद इसका विस्तार सीधे गौतमबुद्ध नगर के जेवर तक जाएगा और अंततः हरियाणा के पलवल में जाकर समाप्त होगा। यह एक तरह का रिंग रेल नेटवर्क होगा जो दिल्ली के बाहरी हिस्सों को एक सूत्र में जोड़ देगा।

वर्तमान में, दिल्ली के भीतर बढ़ते ट्रैफिक और जानलेवा प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए इस प्रोजेक्ट को एक रामबाण समाधान की तरह देखा जा रहा है। अभी तक स्थिति यह है कि उत्तर से दक्षिण या पूर्व से पश्चिम जाने वाली अधिकांश मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को दिल्ली के व्यस्त जंक्शनों से होकर गुजरना पड़ता है। इस कॉरिडोर के चालू होने के बाद, भारी माल ढुलाई वाली गाड़ियां और क्षेत्रीय ट्रेनें दिल्ली के मुख्य स्टेशनों के भीतर प्रवेश करने के बजाय इस बाहरी रिंग रेल से निकल जाएंगी। इससे दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर दबाव कम होगा और लॉजिस्टिक्स की आवाजाही में लगने वाले समय और लागत में भारी कमी आएगी।
बदलेगी गाजियाबाद की भौगोलिक स्थिति
गाजियाबाद जिले के लिए यह परियोजना विशेष रूप से फलदायी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होने वाली है। जिले के भीतर लगभग 26 किलोमीटर के दायरे में इस कॉरिडोर का विस्तार होगा। सबसे दिलचस्प बात यह है कि, यह रेल रूट ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) के लगभग समानांतर विकसित किया जाएगा। यह सड़क और रेल परिवहन के बीच एक ऐसा मजबूत तालमेल पैदा करेगा जो भारत में कम ही देखने को मिलता है। जब एक ही कॉरिडोर में एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड रेल की सुविधा होगी, तो वह क्षेत्र स्वतः ही निवेश का केंद्र बन जाएगा।

जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक सीधा रेल लिंक मिलना गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। अभी गाजियाबाद से जेवर तक जाने के लिए सड़क मार्ग ही एकमात्र विकल्प है, जिसमें ट्रैफिक के कारण अनिश्चितता बनी रहती है, लेकिन इस कॉरिडोर के बनने के बाद गाजियाबाद के निवासी महज कुछ मिनटों में सीधे एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे। इसके साथ ही, यह कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और एनएच-9 जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को आपस में जोड़कर एक ऐसा परिवहन जाल बुनेगा, जहां से उत्तर भारत के किसी भी बड़े शहर की दूरी बहुत कम लगने लगेगी।
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