
लखनऊ। उत्तर प्रदेश अब केवल खेतों और खलिहानों का प्रदेश नहीं, बल्कि एक्सप्रेसवे और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का हब बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की परिवहन प्रणाली एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां दूरी अब बाधा नहीं, बल्कि एक सुगम अवसर है। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (NIA) के उद्घाटन ने जेवर को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर दिया है, लेकिन किसी भी बड़े एयरपोर्ट की सफलता उसकी लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर टिकी होती है।
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तेजी से हो रहा प्रोजेक्ट पर काम
इसी कड़ी को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने एक अभूतपूर्व योजना तैयार की है। यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ने वाला 74.3 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के पश्चिमी द्वार को पूर्वी हृदयस्थल से जोड़ने वाली वह सुनहरी जंजीर है, जो आने वाले दशकों में राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगी।

उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में एक नया अध्याय तब जुड़ गया जब नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन की तैयारियों के बीच यूपीडा ने दो सबसे बड़े एक्सप्रेसवे को जोड़ने के प्रोजेक्ट की गति को दोगुना कर दिया। यह लिंक एक्सप्रेसवे एक ऐसी रणनीतिक परियोजना है जो उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को एक वैश्विक पहचान दिलाएगी।
बीते 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद यह महसूस कराया कि, यदि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य उत्तर प्रदेश के शहरों से यात्रियों को कम समय में एयरपोर्ट तक पहुंचाना है, तो एक समर्पित लिंक मार्ग का होना अनिवार्य है। इसी आवश्यकता को देखते हुए यूपीडा ने अब अपनी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम तेज कर दिया है, जिसे आगामी मई माह तक शासन को स्वीकृति के लिए भेज दिया जाएगा।
ट्रैफिक से मिलेगी मुक्ति
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसका मार्ग और इसकी रणनीतिक स्थिति है। यह लिंक रोड बुलंदशहर के स्याना से शुरू होकर यमुना सिटी की महत्वाकांक्षी फिल्म सिटी के पास यमुना एक्सप्रेसवे में समाहित होगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि जो यात्री गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं या सुदूर प्रयागराज से आ रहे होंगे, उन्हें नोएडा या दिल्ली के भारी ट्रैफिक में घुसने की कतई आवश्यकता नहीं होगी। वे स्याना के पास से इस लिंक रोड पर चढ़ेंगे और सीधे एयरपोर्ट के रनवे के पास पहुंच जाएंगे। यह न केवल यात्रियों का कीमती समय बचाएगा बल्कि वाहनों के ईंधन की खपत को भी कम करेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
परियोजना की तकनीकी बारीकियों पर नज़र डालें, तो यह लिंक एक्सप्रेसवे आधुनिक इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण होगा। इसकी कुल लंबाई 74.3 किलोमीटर तय की गई है, जिसमें से लगभग 54.3 किलोमीटर का एक बड़ा हिस्सा बुलंदशहर जिले की सीमाओं के भीतर से होकर गुजरेगा। शेष 20 किलोमीटर का हिस्सा गौतमबुद्धनगर जिले में होगा, जो इसे सीधे औद्योगिक हब और एयरपोर्ट की बाउंड्री से जोड़ेगा। इस मार्ग की चौड़ाई 120 मीटर निर्धारित की गई है, जो यह स्पष्ट करती है कि सरकार इसे केवल वर्तमान की जरूरतों के लिए नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों और बढ़ते हुए ट्रैफिक लोड को ध्यान में रखकर बना रही है। इतनी अधिक चौड़ाई होने से भविष्य में इस एक्सप्रेसवे को 8 या 10 लेन तक विस्तारित करने में कोई तकनीकी बाधा नहीं आएगी।
बढ़ेगी जमीन की कीमत
आर्थिक दृष्टिकोण से यह लिंक एक्सप्रेसवे एक मल्टीप्लायर इफेक्ट पैदा करने वाला है। जहां-जहां से यह एक्सप्रेसवे गुजरेगा, वहां भूमि के मूल्यों में भारी उछाल के साथ-साथ नए औद्योगिक गलियारों का विकास होगा। बुलंदशहर जैसे कृषि प्रधान जिले के लिए यह मार्ग एक वरदान साबित होगा, क्योंकि वहां के स्थानीय उत्पाद, डेयरी उत्पाद और लघु उद्योगों का माल सीधे जेवर एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल तक कुछ ही घंटों में पहुंच सकेगा। इससे निर्यात को पंख लगेंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
साथ ही, यमुना सिटी में विकसित हो रही फिल्म सिटी के लिए भी यह मार्ग जीवनरेखा बनेगा। फिल्मों की शूटिंग के लिए मुंबई या अन्य शहरों से आने वाला भारी साजो-सामान और क्रू मेंबर्स अब सुगमता से आवाजाही कर सकेंगे।

गंगा एक्सप्रेसवे, जो मेरठ से प्रयागराज को जोड़ता है, राज्य सरकार का सबसे बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट है। जब यह लिंक रोड के माध्यम से यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा, तो उत्तर प्रदेश का एक ऐसा एकीकृत सड़क नेटवर्क तैयार होगा जो देश के किसी भी अन्य राज्य के पास नहीं है।
यह परियोजना न केवल परिवहन को आसान बनाएगी बल्कि पर्यटन क्षेत्र को भी एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। अब प्रयागराज के संगम से स्नान कर कोई भी श्रद्धालु कुछ ही घंटों में मथुरा के बांके बिहारी मंदिर या आगरा के ताजमहल तक पहुंच सकेगा। यह पर्यटन सर्किट राज्य के राजस्व में भारी वृद्धि करने वाला साबित होगा।
तीन से चार साल में पूरा होगा काम
यूपीडा के सूत्रों के अनुसार, मई में डीपीआर जमा होने के बाद शासन स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी। चूंकि इस प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक मंजूरी पहले ही मिल चुकी है, इसलिए फंड जारी होने और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने में देरी की संभावना कम है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले तीन से चार वर्षों के भीतर इस लिंक मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया जाए, ताकि जब जेवर एयरपोर्ट अपने दूसरे और तीसरे चरण के विस्तार में हो, तब तक यह एक्सप्रेसवे अपनी पूरी क्षमता के साथ तैयार मिले। कनेक्टिविटी का यह जाल न केवल शहरों को जोड़ रहा है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के संकल्प को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
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