मुनिकी रेती में ‘अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026’ का आगाज, धामी ने दुनिया को दिया शांति और आरोग्य का मंत्र

ऋषिकेश। ऋषिकेश के मुनिकी रेती में आज से योग के अंतरराष्ट्रीय उत्सव का नया अध्याय शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर सात दिनों तक चलने वाले इस वैचारिक और शारीरिक समागम का शंखनाद किया। 22 मार्च तक चलने वाले इस महोत्सव में न केवल योग की प्राचीन विधाओं का प्रदर्शन होगा, बल्कि विदेशी मेहमानों को उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों और ब्रांड उत्तराखंड से रूबरू कराया जाएगा। गंगा कॉरिडोर और इकोनॉमिक सिटी जैसे बड़े विजन के बीच आयोजित यह महोत्सव देवभूमि के बढ़ते वैश्विक कद की एक नई गाथा लिख रहा है।

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सीएम धामी ने किया उद्घाटन

ऋषिकेश में इंटरनेशनल योग फेस्टिवल 2026 का उद्घाटन करते हुए उन्होंने वहां मौजूद लोगों, योग टीचरों और योग करने वालों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, उत्तराखंड की यह पवित्र भूमि, देवताओं की भूमि, पुराने समय से ही योग और आध्यात्मिकता की भूमि रही है। इसकी पवित्र नदियां, शांत माहौल और शुद्ध मौसम दुनिया में योग प्रैक्टिस के लिए एक आदर्श माहौल देते हैं।

CM Pushkar Singh Dham

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी प्रयासों और संकल्प के कारण ही योग आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान हासिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि, मुनिकी रेती की यह पावन धरा अब विश्व के मानचित्र पर एक उभरती हुई नगरी के रूप में देखी जा रही है, जहां अध्यात्म और आधुनिकता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

सांस्कृतिक विरासत से रूबरू करना है मकसद

इस महोत्सव का उद्देश्य केवल योग का अभ्यास कराना ही नहीं है, बल्कि विदेशों से आए मेहमानों को उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराना भी है। इसी कड़ी में महोत्सव के दौरान योग साधकों को राज्य के पारंपरिक लोक नृत्य और संगीत की झलक दिखाई जाएगी, साथ ही उन्हें उत्तराखंड के शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक स्थानीय उत्पादों का स्वाद चखने का भी अवसर मिलेगा ताकि प्रदेश के हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार मिल सके।

क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि, सरकार ऋषिकेश और उसके आसपास के इलाकों को न केवल आध्यात्मिक बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी सुदृढ़ बना रही है। इसके लिए गंगा कॉरिडोर और इकोनॉमिक सिटी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है, ताकि तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें।

योगाचार्यों को दी बधाई

इसके साथ ही गंगा की अविरल धारा और स्वच्छता को बनाए रखने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिसके तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है, ताकि पवित्र गंगा में गिरने वाली गंदगी को पूरी तरह रोका जा सके। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और दूर-दराज से आए योगाचार्यों को इस महोत्सव की बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन एक ऐतिहासिक और यादगार अनुभव साबित होगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और सतपाल महाराज ने भी योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर साल इस बड़े स्तर पर महोत्सव आयोजित करने का मूल उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने साझा किया कि योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने से न केवल शरीर निरोगी रहता है बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।

इसके अतिरिक्त, योग का यह वैश्विक प्रसार भारतीय योगाचार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के नए और बेहतर अवसर खोल रहा है, जिससे भारतीय ज्ञान और संस्कृति का गौरव विदेशों में भी बढ़ रहा है। यह महोत्सव आने वाले दिनों में विभिन्न सत्रों के माध्यम से साधकों को योग की जटिल बारीकियों से अवगत कराएगा और अंततः एक स्वस्थ समाज की नींव रखने में सहायक होगा।

 

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