
अल्मोड़ा। उत्तराखंड की शांत वादियों में स्थित अल्मोड़ा जिले का डोल क्षेत्र इन दिनों अध्यात्म और भक्ति के एक अनूठे संगम का साक्षी बन रहा है। अवसर है ‘श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम न्यास’ में आयोजित श्री पीठम स्थापना महोत्सव का, जहां आस्था का ऐसा ज्वार उमड़ा है कि पूरा हिमालयी क्षेत्र जयकारों से गुंजायमान हो उठा है।
इसे भी पढ़ें- धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला, उत्तराखंड में वन दरोगा बनने के लिए अब ग्रेजुएशन जरूरी, 18 प्रस्तावों को मिली मंजूरी
आश्रम में टेका माथा
इस पावन उत्सव की गरिमा को और बढ़ाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं डोल आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने न केवल मत्था टेका बल्कि देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए मातृशक्ति की वंदना की। भक्ति और शक्ति के इस महापर्व में शामिल होकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी सरकार के लिए विकास के साथ-साथ राज्य की आध्यात्मिक विरासत को संजोना सर्वोपरि प्राथमिकता है।

अल्मोड़ा के डोल स्थित इस दिव्य आश्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आगमन किसी आध्यात्मिक ऊर्जा से कम नहीं था। महोत्सव के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने सबसे पहले परंपरा का निर्वहन करते हुए 1100 कन्याओं का विधि-विधान से पूजन किया। मुख्यमंत्री ने स्वयं एक-एक कन्या के चरण पखारे और उन्हें तिलक लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस भावुक और श्रद्धामय दृश्य ने वहां उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कन्या पूजन हमारी सनातनी परंपरा का वह अटूट हिस्सा है, जो हमें सिखाता है कि शक्ति का असली वास मातृशक्ति में ही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूजन केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के उस सम्मान और समर्पण का प्रतीक है जो हम अपनी बेटियों और महिलाओं के प्रति रखते हैं। मुख्यमंत्री ने कन्याओं को उपहार भेंट किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें देवभूमि की असली थाती बताया।
श्रीयंत्र की परिक्रमा की
कन्या पूजन के उपरांत मुख्यमंत्री ने मां राजेश्वरी के विग्रह का अभिषेक किया। मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच हुए इस अभिषेक ने पूरे वातावरण को दिव्य ऊर्जा से भर दिया। मंदिर परिसर का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री धामी उस क्षण अभिभूत हो गए जब उन्होंने वहां स्थापित दुनिया के सबसे बड़े श्रीयंत्र के दर्शन किए। करीब कई टन वजन वाले इस भव्य श्रीयंत्र की स्थापना डोल आश्रम की एक ऐसी उपलब्धि है जिसने इसे वैश्विक पर्यटन और आध्यात्मिक मानचित्र पर स्थापित कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने श्रीयंत्र की परिक्रमा की और कहा कि इस स्थान पर कदम रखते ही एक ऐसी अलौकिक शांति और ऊर्जा का अनुभव होता है जिसे शब्दों में बयां करना कठिन है। उन्होंने कहा कि यह श्रीयंत्र केवल धातु की एक संरचना नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांड की शक्तियों का केंद्र है जो आने वाले समय में विश्व शांति और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान आश्रम के संस्थापक बाबा कल्याणदास जी की तपस्या को विशेष रूप से नमन किया। उन्होंने कहा कि आज हम जिस भव्य स्वरूप को देख रहे हैं, वह बाबा कल्याणदास की दशकों की कठिन साधना, अटूट संकल्प और हिमालय के प्रति उनके अगाध प्रेम का ही परिणाम है।
सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
धामी ने बाबा कल्याणदास की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल इस दुर्गम क्षेत्र को एक आध्यात्मिक केंद्र में बदला है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति, योग और वेदांत का प्रचार-प्रसार कर उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। बाबा कल्याणदास द्वारा संचालित जन कल्याणकारी कार्यों और शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके योगदान को मुख्यमंत्री ने अभिनंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि संतों के ऐसे ही प्रयासों से देवभूमि की गरिमा पूरे विश्व में बढ़ रही है।

इस भव्य महोत्सव में राजनीतिक और प्रशासनिक जगत की कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की। मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा भी मौजूद रहे, जिन्होंने डोल आश्रम के विकास को क्षेत्र के लिए गौरव की बात बताया। क्षेत्रीय विधायक मोहन सिंह मेहरा, मनोज तिवारी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
नेताओं ने एकजुट होकर देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इसके अलावा भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी इस उत्सव का हिस्सा बने। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों का उत्साह चरम पर था और हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया।
इसे भी पढ़ें- उत्तराखंड विधानसभा में ‘नारी शक्ति’ पर महासंग्राम, धामी ने विपक्ष पर किया प्रहार, यशपाल आर्य बोले- धोखा है



