सीएम धामी ने किया किसान मेले का उद्घाटन, कहा- खेती को बचना ही नहीं है, मुनाफा भी कमाना है

रुद्रपुर/पंतनगर। उत्तराखंड की कृषि आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में 119वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का भव्य आगाज हो गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर इस तीन दिवसीय कृषि कुंभ का विधिवत शुभारंभ किया। तराई के प्रवेश द्वार पंतनगर में आयोजित इस मेले ने एक बार फिर देश भर के किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि व्यवसायियों को एक साझा मंच प्रदान किया है।

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पेश किया उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर न केवल कृषि क्षेत्र में राज्य सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में किसानों की अहमियत को भी रेखांकित किया। मेले में उमड़ी हजारों किसानों की भीड़ को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने कहा कि, उत्तराखंड की डबल इंजन सरकार का लक्ष्य केवल खेती को बचाना नहीं, बल्कि उसे मुनाफे का सौदा बनाना है।

CM Dhami

कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेले के परिसर में सजे 350 से अधिक स्टॉलों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ विश्वविद्यालय के कुलपति, कृषि वैज्ञानिक और जिले के आला अधिकारी मौजूद रहे। सीएम ने उन्नत बीजों, अत्याधुनिक कृषि यंत्रों, जैविक खादों और फूलों की नई किस्मों के स्टॉलों पर रुककर जानकारी ली।

सुरक्षा घेरा तोड़ किसानों से की बात

मुख्यमंत्री का अंदाज उस समय बेहद खास दिखा जब उन्होंने सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे किसानों के बीच जाकर उनसे बातचीत की। उन्होंने किसानों से पूछा कि नई तकनीकों को अपनाने में उन्हें क्या चुनौतियां आ रही हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक किस तरह पहुंच रहा है। सीएम ने वैज्ञानिकों को निर्देश दिए कि प्रयोगशाला की खोजों को जल्द से जल्द किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाए, ताकि लागत कम हो और पैदावार बढ़ सके।

विश्वविद्यालय के खचाखच भरे सभागार में जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार से ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी होने से उत्तराखंड के 9 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में सीधी मदद पहुंची है, जो उनकी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में सहायक सिद्ध हो रही है।

किसानों के लिए प्रमुख घोषणाएं और उपलब्धियां
  •  किसानों की आर्थिक मजबूती के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 5 लाख रुपये कर दिया गया है।
  • राज्य सरकार 3 लाख रुपये तक का कृषि ऋण बिना किसी ब्याज के उपलब्ध करा रही है, ताकि किसान साहूकारों के चंगुल से मुक्त रह सकें।
  • आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है।
  • सीएम ने बताया कि, जंगली जानवरों द्वारा फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए 25 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है, जो किसानों के लिए बड़ी राहत है।
विविधीकरण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कृषि के विविधीकरण  पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि, पारंपरिक खेती के साथ-साथ राज्य अब बागवानी और ‘एरोमैटिक’ (सुगंधित) पौधों की खेती में देश का नेतृत्व कर रहा है।

मशरूम और शहद में दबदबा: उत्तराखंड आज मशरूम उत्पादन में देश में पांचवें और शहद उत्पादन में आठवें स्थान पर है। मुख्यमंत्री ने मधुमक्खी पालन में अपार संभावनाओं को देखते हुए युवाओं से इस क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।

सेब नीति और ड्रैगन फ्रूट: राज्य में 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति लागू की गई है। साथ ही, ड्रैगन फ्रूट जैसी नकदी फसलों के लिए भी 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है।

सुगंधित खेती: प्रदेश के 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित पौधों की खेती की जा रही है, जिससे परफ्यूम और दवा उद्योगों को कच्चा माल मिल रहा है।

किसानों के हित में लिए गए कड़े फैसलों का जिक्र करते हुए सीएम धामी ने कहा कि राज्य की नहरों से सिंचाई को पूरी तरह मुफ्त कर दिया गया है। उन्होंने गन्ना किसानों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि उत्तराखंड में गन्ने का समर्थन मूल्य पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी 5 रुपये अधिक है। इसके अलावा, गेहूं की खरीद पर 20 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस देकर सरकार किसानों की जेब में सीधा लाभ पंहुचा रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आदर्श गांव की अवधारणा पर भी बात की। उन्होंने बताया कि भिकियासैंण के पास स्थित सड़कोट गांव, जिसे उन्होंने गोद लिया था, आज एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो पहाड़ के दूरस्थ गांवों की तस्वीर बदली जा सकती है।

सम्मानित हुए किसान

कार्यक्रम के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री ने खेती के क्षेत्र में नवाचार करने वाले एक दर्जन से अधिक प्रगतिशील किसानों को प्रगतिशील किसान सम्मान से नवाजा। सम्मानित होने वाले किसानों को 11-11 हजार और 5-5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के साथ प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। सीएम ने कहा कि ये किसान समाज के लिए प्रेरणापुंज हैं, जो यह साबित कर रहे हैं कि मेहनत और तकनीक के मेल से मिट्टी से सोना उगाया जा सकता है।

 

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