ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भारत में हाई अलर्ट, 90 लाख भारतीयों को सुरक्षित निकालने की तैयारी

 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को एक ऐसे मुहाने पर ला खड़ा किया है जहां से शांति की उम्मीदें लगभग खत्म होती नजर आ रही हैं। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई ने ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों और नेतृत्व केंद्रों को निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई।

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खामेनई को उतारा मौत के घाट

यह घटना 28 फरवरी 2026 की रात को हुई और 1 मार्च को ईरानी राज्य मीडिया ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की। खामेनेई, जो 1989 से ईरान की सत्ता के शीर्ष पर थे, 86 वर्ष के थे। उनकी मौत ने न केवल ईरान में सत्ता का शून्य पैदा किया बल्कि क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा कर दिया। ईरान ने जवाबी हमले किए, जिसमें इजरायल, अमेरिकी सैन्य अड्डों और खाड़ी के कुछ शहरों पर मिसाइलें दागी गईं।

ईरान-अमेरिका युद्ध

लेबनान में हिजबुल्लाह ने भी सक्रियता दिखाई और इजरायल पर रॉकेट हमले किए। इस सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक सभी उद्देश्य हासिल नहीं हो जाते। उन्होंने ईरान में सत्ता परिवर्तन की बात भी कही, जिससे संघर्ष और लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है। इस वैश्विक तनाव के बीच भारत सरकार ने तुरंत अलर्ट मोड अपना लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी के दौरे से दिल्ली लौटते ही कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी की आपात बैठक बुलाई। यह बैठक रविवार रात को हुई, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान और विदेश सचिव विक्रम मिसरी जैसे शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।

‘ऑपरेशन गंगा’ जैसे बचाव अभियान चलाने पर विचार

बैठक का मुख्य फोकस पश्चिम एशिया में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा था। खाड़ी देशों में करीब नब्बे लाख से अधिक भारतीय काम करते हैं, जिनमें यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, कतर जैसे देशों में सबसे ज्यादा संख्या है। ईरान और इजरायल में भी हजारों भारतीय मौजूद हैं। युद्ध के कारण हवाई क्षेत्र लगभग बंद हो गया है, कई एयरपोर्ट पर उड़ानें रद्द हैं और सोशल मीडिया पर फंसे भारतीय लगातार मदद की अपील कर रहे हैं। सरकार ने ‘ऑपरेशन गंगा’ जैसा बड़ा बचाव अभियान शुरू करने की तैयारी पर विचार किया।

पहले यूक्रेन, सूडान और अन्य संकटों में ऐसे मिशन सफल रहे थे, लेकिन अब स्थिति अलग है क्योंकि हवाई मार्ग बंद हैं और समुद्री रास्तों पर भी खतरा है। विदेश मंत्रालय ने सभी दूतावासों को चौबीस घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ने यूएई के राष्ट्रपति से बात की और भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर आश्वासन लिया। विदेश मंत्री ने खाड़ी सहयोग परिषद के देशों के साथ संपर्क बढ़ाया।

भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत की अपील की है, लेकिन अपने नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाने को तैयार दिख रहा है। रणनीतिक रूप से सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह संकरी जलधारा दुनिया के तेल व्यापार की जीवनरेखा है और भारत का बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से आता है। अगर ईरान ने इसे बंद कर दिया या हमले बढ़े तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इससे भारत में ईंधन महंगा होगा, महंगाई बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।

शेयर बाजार में गिरावट 

शेयर बाजार पहले से ही गिरावट में है और निवेशक सतर्क हैं। वित्त मंत्रालय और आर्थिक विशेषज्ञों ने बैठक में इन प्रभावों का विस्तृत आंकलन पेश किया। सरकार ने राज्यों को भी अलर्ट जारी किया है कि, कहीं भावनात्मक उत्तेजना से घरेलू हिंसा या तनाव न फैले। ईरान में खामेनेई की मौत से सत्ता संक्रमण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उनके बेटे या अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं, लेकिन युद्ध की स्थिति में स्थिरता बनाए रखना मुश्किल है।

ईरान-अमेरिका युद्ध

ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। कुछ इलाकों में मौत पर जश्न मनाया जा रहा है, जबकि कई जगहों पर भय और अनिश्चितता है। अमेरिका-इजरायल के हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद भी मारे गए। ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स जैसे हिजबुल्लाह, हूती और हमास सक्रिय हैं, जिससे संघर्ष लेबनान, यमन और अन्य जगहों पर फैल सकता है।भारत के लिए यह स्थिति बहुआयामी चुनौती है। एक ओर लाखों प्रवासियों की जान-माल की सुरक्षा, दूसरी ओर ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता।

भारत ने हमेशा तटस्थ रुख अपनाया है और अब भी शांति की अपील कर रहा है, लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं तो बड़े पैमाने पर निकासी अभियान की जरूरत पड़ेगी। दूतावासों ने पहले ही सलाह जारी की है कि अनावश्यक यात्रा न करें और स्थानीय निर्देशों का पालन करें। कई भारतीय परिवार अब घर लौटने की कोशिश में हैं, लेकिन उड़ानें रद्द होने से परेशानी है। यह संकट 1979 की ईरानी क्रांति के बाद सबसे बड़ा माना जा रहा है।

उठ रहे ये सवाल

खामेनेई ने ईरान को क्षेत्रीय शक्ति बनाया, लेकिन उनकी नीतियों से अमेरिका और इजरायल के साथ दुश्मनी गहरी हुई। उनकी मौत से दुनिया में कई सवाल उठ रहे हैं, ईरान का भविष्य क्या होगा, न्यूक्लियर प्रोग्राम पर क्या असर पड़ेगा और क्या यह संघर्ष वैश्विक युद्ध में बदल सकता है। रूस और चीन ने हमलों की निंदा की है, जबकि यूरोपीय संघ चिंतित है।

भारत जैसे देशों के लिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है। वर्तमान में स्थिति अत्यंत नाजुक है। हमले जारी हैं, जवाबी कार्रवाई हो रही है और कोई तत्काल समझौता नजर नहीं आ रहा। भारत सरकार हर पल की निगरानी कर रही है। नागरिकों से अपील है कि आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लें और अफवाहों से बचें। यह समय सतर्कता और एकजुटता का है, क्योंकि वैश्विक संकट किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता।

 

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