
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सड़कों पर रफ्तार के शौकीनों और मेरठ से प्रयागराज के बीच सफर करने वाले आम नागरिकों के लिए योगी सरकार ने खुशियों की सौगात दी है। राज्य के बुनियादी ढांचे में मील का पत्थर साबित होने वाले गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए इसे शुरुआती 15 दिनों के लिए पूरी तरह टोल फ्री घोषित कर दिया है। यह फैसला न केवल प्रदेश की जनता को आर्थिक राहत देगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के इस सबसे लंबे एक्सप्रेसवे की भव्यता और सुविधाओं से रूबरू होने का एक सुनहरा अवसर भी प्रदान करेगा।
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एक्टिव हुआ यूपीडा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरदोई में किए गए भव्य उद्घाटन के बाद अब इस एक्सप्रेसवे वाहनों एन फर्राटा भरना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने इसे 15 दिन के लिए टोल फ्री भी कर दिया है।

लखनऊ से जारी एक आदेश में कहा गया है कि, गंगा एक्सप्रेसवे के कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने की तारीख यानी सीओडी से लेकर अगले 15 दिनों तक किसी भी वाहन चालक से टोल टैक्स की वसूली नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस महत्वपूर्ण परियोजना का लाभ जनता को बिना किसी शुरुआती आर्थिक बोझ के मिलना चाहिए। जैसे ही मुख्यमंत्री कार्यालय से यह आदेश जारी हुआ, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) पूरी तरह सक्रिय हो गया।
यूपीडा ने इस एक्सप्रेसवे के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रही कंपनियों, अदाणी इन्फ्रास्ट्रक्चर और आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर को तत्काल प्रभाव से निर्देश जारी कर दिए हैं कि, वे सुनिश्चित करें कि तय समय सीमा के भीतर टोल बूथों पर कोई भी पर्ची न कटे और यात्री निर्बाध रूप से अपनी यात्रा पूरी कर सकें।
यूपी की आर्थिक भविष्य की जीवनरेखा है एक्सप्रेस वे
594 किलोमीटर लंबा यह गंगा एक्सप्रेसवे केवल डामर और कंक्रीट की सड़क नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के आर्थिक भविष्य की नई जीवनरेखा है। मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुड़ापुर दांडू गांव तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे संगम नगरी से जोड़ता है। इस सफर के बीच यह एक्सप्रेसवे यूपी के 12 महत्वपूर्ण जिलों और 519 गांवों की सीमाओं को छूता है।
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसकी रफ्तार और समय की बचत है। पूर्व में मेरठ से प्रयागराज की दूरी तय करने में यात्रियों को 11 से 12 घंटे का लंबा समय खपाना पड़ता था और भारी ट्रैफिक व खराब रास्तों की मार झेलनी पड़ती थी, लेकिन अब यह दूरी सिमटकर महज 6 घंटे रह गई है। 36,200 करोड़ रुपये की विशाल लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क में से एक है और इसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित करने की योजना भी तैयार है।
24 घंटे मिलेगी इमरजेंसी सुविधा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह फैसला बेहद दूरगामी सोच का परिणाम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि शुरुआती चरण में जब लोग इस एक्सप्रेसवे का उपयोग करना शुरू करें, तो वे इसके विश्वस्तरीय मानकों और सुरक्षा व्यवस्था का अनुभव ले सकें। टोल फ्री अवधि के दौरान न केवल सफर मुफ्त होगा, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए पेट्रोलिंग वाहन, एम्बुलेंस और क्रेन जैसी सभी आपातकालीन सेवाएं भी चौबीसों घंटे तैनात रहेंगी।
सरकार का मानना है कि, मुफ्त सफर के इस आकर्षण से मेरठ और प्रयागराज के बीच पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। यह एक्सप्रेसवे उन किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए भी वरदान साबित होगा जिन्हें अपने उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाने में अब आधा समय भी नहीं लगेगा।
1765 रुपये है एक तरफ का टोल टैक्स
अक्सर देखा जाता है कि, नए एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही ऊंचे टोल टैक्स को लेकर जनता में थोड़ी हिचकिचाहट होती है, लेकिन 15 दिनों की यह छूट उस हिचकिचाहट को पूरी तरह खत्म कर देगी। लोगों तक सरकार की विकास नीतियों का सीधा संदेश पहुंचेगा कि प्रदेश में बुनियादी ढांचा सुधारने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह टोल फ्री सेवा केवल शुरुआती 15 दिनों के लिए ही है।

इस अवधि के समाप्त होने के बाद यूपीडा द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार टोल वसूला जाएगा। तय दरों के मुताबिक, मेरठ से प्रयागराज के बीच चलने वाले हल्के वाहनों जैसे कार और जीप) के लिए एक तरफ का टोल 1765 रुपये निर्धारित किया गया है। ऐसे में जो लोग इस दौरान यात्रा करेंगे, वे एक चक्कर में करीब 1765 रुपये की सीधी बचत कर पाएंगे, जो आम आदमी की जेब के लिए एक बड़ी राहत है।
बढ़ सकता है वाहनों का दबाव
गंगा एक्सप्रेसवे पर सफर के दौरान यात्रियों को हवाई पट्टी जैसी सुगम सड़कों का अनुभव मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके उद्घाटन के समय इसे ‘यूपी की प्रगति का एक्सप्रेसवे’ करार दिया था। एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लगाया गया है। साथ ही, जगह-जगह वे-साइड एमिनिटीज यानी जनसुविधा केंद्र बनाए गए हैं जहाँ ढाबे, रेस्टोरेंट और पेट्रोल पंप की सुविधा उपलब्ध होगी।
15 दिनों की इस टोल फ्री अवधि के दौरान भी ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़ी सभी कंपनियां अपनी सेवाएं पूरी मुस्तैदी से जारी रखेंगी। मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि, टोल फ्री होने के कारण एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ सकता है, इसलिए सुरक्षा मानकों में कोई कोताही न बरती जाए।
कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के बदलते स्वरूप की एक चमचमाती तस्वीर है। मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज के निवासियों के लिए यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं बल्कि उनके सपनों को रफ्तार देने वाला जरिया है।
15 दिनों तक टोल न वसूलने का फैसला सीएम योगी की जन-हितकारी राजनीति का एक और उदाहरण है, जिसने विपक्ष को शांत और जनता को उत्साहित कर दिया है। अब यूपी के लोग बिना किसी टोल के मेरठ से संगम तक का सफर हवाई जहाज जैसी गति और लग्जरी के साथ कर सकेंगे। यदि आप भी इन दिनों मेरठ या प्रयागराज की ओर जाने की सोच रहे हैं, तो यह सही समय है अपनी गाड़ी निकालने का और इस नए सफर का गवाह बनने का।
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