उत्तर प्रदेश में लाखों कर्मचारियों के साथ वेतन विसंगति जैसी धोखेबाजी चल रही है : सुप्रिया श्रीनेत

लखनऊ। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय प्रवक्ता  सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए पेंशन बहाली में सरकार के ढीले रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में संयुक्त कर्मचारी संगठन के 150 अलग-अलग धड़े करीब 20 लाख पूर्व और वर्तमान सरकारी कर्मचारी पेंशन के लिए आंदोलन कर रहे हैं। इनका ये आंदोलन 17 साल से चल रहा है। भाजपा सरकार ने राज्य कर्मियों की मांगों को नजरअंदाज किया गया और लाखों कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के 13 लाख कर्मचारी पेंशन बहाली की राह देख रहे हैं, लेकिन पांच वर्ष बीतने के बाद भी भाजपा सरकार ने उनकी सुनवाई नहीं की।

उन्होंने कहा कि राज्य के विकास में विभिन्न पदों पर बैठे अधिकारियों, कर्मचारियों की अहम भूमिका होती है। जनता के लिए हितकारी कामों को वह जनता तक पहुंचाते हैं। नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन ही सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों की जिंदगी का आर्थिक सहारा होती है। आज कर्मचारियों के तमाम संगठनों के लोग धरने, आंदोलन पर बैठे हैं। पूरे जीवन सरकार, आमजन की सेवा करने के बाद सेवानिवृत्ति पर कार्मिक को पेंशन विहीन करना गलत है।

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सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि हाल ही में, एक महत्वपूर्ण फैसले में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना है कि एक दैनिक वेतन भोगी जो नई पेंशन योजना के बाद (2005 के बाद) नियमित हुआ है, उसे अपनी पिछली सेवा जोड़ते हुए पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशन पाने का हक़ है। बीते कुछ वर्षों से कर्मचारी संगठन लगातार राज्य और केंद्र सरकार से पुरानी पेंशन बहाली की मांग करते रहे हैं। लेकिन सरकार ने कर्मचारियों की मांगों को न सिर्फ नजरअंदाज किया है बल्कि उनकी मांगों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। लाखों कर्मचारियों के साथ वेतन विसंगति जैसी धोखेबाजी चल रही है। लाखों कर्मचारियों को महंगाई भत्ता तक नहीं मिला है।