
नई दिल्ली। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और उसके बाद शुरू हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों ने मध्य पूर्व को एक ऐसे ज्वालामुखी पर खड़ा कर दिया है, जो कभी भी वैश्विक महायुद्ध का रूप ले सकता है। युद्ध के चौथे दिन भी संघर्ष थमने के संकेत नहीं मिले हैं, बल्कि तनाव अब आर या पार की स्थिति में पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस जंग के लंबा खिंचने की चेतावनी देते हुए कहा है कि यह संघर्ष अगले 4 से 5 हफ्तों तक जारी रह सकता है। इस बीच, भारत के भीतर भी इस वैश्विक संकट को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने मोदी सरकार की विदेश नीति और चुप्पी पर तीखे हमले किए हैं।
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सोनिया ने की केंद्र की आलोचना
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ईरान की स्थिति और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया न आने की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा साझा किए गए बयान में सोनिया गांधी ने भारत के ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों का हवाला दिया। उन्होंने याद दिलाया कि अप्रैल 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तेहरान की यात्रा कर भारत-ईरान के गहरे रिश्तों को नई ऊंचाई दी थी, लेकिन वर्तमान सरकार के लिए ये पुराने और रणनीतिक संबंध अब बेमानी नजर आ रहे हैं।

सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि, भारत ने हाल के वर्षों में इजरायल के साथ रक्षा, कृषि और तकनीक के क्षेत्र में अपने संबंधों को काफी विस्तार दिया है, जो अच्छी बात है। हालांकि, ईरान और इजरायल दोनों के साथ अच्छे संबंध होने के कारण भारत के पास एक ऐसा ‘डिप्लोमेटिक स्पेस’ है, जहां वह दोनों पक्षों को संयम बरतने के लिए मजबूर कर सकता है। उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि यह स्पेस केवल विश्वसनीयता पर टिका होता है और विश्वसनीयता सिद्धांतों पर अडिग रहने से आती है, न कि अपनी सुविधा के अनुसार स्टैंड बदलने से।
ईरान से नहीं था कोई खतरा- अरागची
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के उन बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें रूबियो ने ईरान पर किए गए हमलों को जरूरी बताया था। अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, रूबियो ने अनजाने में उस कड़वे सच को स्वीकार कर लिया है जिसे पूरी दुनिया जानती थी, यह अमेरिका द्वारा इजरायल के लिए चुनी गई एक चॉइस की जंग है। अरागची ने सीधे तौर पर कहा कि ईरान की ओर से कभी कोई वास्तविक खतरा नहीं था।
अरागची ने आरोप लगाया कि, अमेरिकी और ईरानी सैनिकों का खून केवल उन लोगों के कारण बह रहा है जो इजरायल फर्स्ट की नीति पर चलते हैं। उन्होंने अमेरिकी जनता से अपील करते हुए कहा कि वे इससे बेहतर के हकदार हैं और उन्हें अपने देश की बागडोर उन लोगों से वापस लेनी चाहिए जो दूसरे देशों के हितों के लिए अमेरिकी संसाधनों की बलि दे रहे हैं।
दूसरी ओर, मार्को रूबियो ने अपनी स्ट्राइक्स का बचाव करते हुए कहा कि, अमेरिका के पास ‘प्री-एम्प्टिव’ हमलों के अलावा कोई विकल्प नहीं था। रूबियो के अनुसार, इजरायल ईरान पर हमला करने ही वाला था और यदि अमेरिका पहले कार्रवाई नहीं करता, तो ईरान जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता, जिससे बड़ी संख्या में अमेरिकी हताहत होते।
हम जीत हासिल करेंगे-ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर एक लंबा पोस्ट लिखकर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। ट्रंप ने दावा किया कि, अमेरिका के पास हथियारों और गोला-बारूद का ऐसा विशाल भंडार है, जो इतिहास में कभी इतना उन्नत नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उनके पास वर्चुअली अनलिमिटेड हथियारों की आपूर्ति है और अमेरिका इस जंग को ‘फॉरएवर’ लड़ सकता है और जीत हासिल कर सकता है।

ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती जो बाइडन पर निशाना साधते हुए कहा कि बाइडन ने यूक्रेन को पी.टी. बार्नम की तरह सैकड़ों बिलियन डॉलर के हाई-एंड हथियार मुफ्त में बांट दिए, लेकिन उनके स्टॉक को रिप्लेस करने की जहमत नहीं उठाई। ट्रंप ने गर्व से कहा कि, उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में सेना का पुनर्निर्माण किया था और अब भी कर रहे हैं। उनके अनुसार, अमेरिका हर मोर्चे पर बड़ी जीत के लिए तैयार है।
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ईरान में चल रहे युद्ध का असर भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भी देखने को मिल रहा है। श्रीनगर में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के विरोध में लगातार दूसरे दिन भी पूर्ण बंद रहा। लोग सड़कों पर उतरकर गम और गुस्से का इजहार कर रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और पूरे शहर में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। श्रीनगर के लाल चौक समेत कई संवेदनशील इलाकों में कटीले तारों से बैरिकेडिंग की गई है।
श्रीनगर में प्रदर्शन
बता दें कि, एक दिन पहले प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई थीं, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे और लाठीचार्ज करना पड़ा था। श्रीनगर के बेमिना इलाके से कुछ संदिग्धों को हिरासत में भी लिया गया है। श्रीनगर के अलावा शोपियां, बारामूला और बांदीपोरा जैसे जिलों में भी बाजार बंद रहे और लोगों ने खामेनेई को श्रद्धांजलि देते हुए अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।
इस युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर बुल्गारिया की प्रसिद्ध भविष्यवक्ता बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां भी ट्रेंड कर रही हैं। लोग इसे तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं। वहीं, भारत में विपक्षी सांसदों, विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के मुस्लिम सांसदों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह अपने पुराने मित्र ईरान के साथ मजबूती से खड़ा हो। सांसदों का कहना है कि इस्लाम कभी झुकता नहीं है और भारत को न्याय का साथ देना चाहिए।
दूसरी तरफ, ईरान की मूल निवासी और अभिनेत्री मंदाना करीमी ने एक अलग पक्ष रखते हुए ईरानी शासन को कैंसर करार दिया है। उन्होंने भारत में हो रहे प्रदर्शनों पर दुख जताते हुए कहा कि ईरान के लोग दशकों से इस दमनकारी शासन के खिलाफ लड़ रहे थे और इस युद्ध के पीछे की हकीकत भारत में प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझनी चाहिए।
वर्तमान में स्थिति यह है कि एक ओर अमेरिका और इजरायल अपनी सैन्य श्रेष्ठता के दम पर ईरान के ढांचे को ध्वस्त करने में लगे हैं, वहीं ईरान अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। भारत जैसे देशों के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है, जहां उसे अपने पुराने रणनीतिक साझेदार ईरान और नए रक्षा सहयोगी इजरायल के बीच संतुलन बनाना है। आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि दुनिया एक शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ेगी या विनाशकारी महायुद्ध की आग में झुलस जाएगी।
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