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शिक्षक दिवस पर योगी का बड़ा बयान- ‘जन्माष्टमी पर कहीं दंगा हुआ? यही है UP की नई पहचान’

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस के अवसर पर गोरखपुर में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश की बदलती तस्वीर और कानून-व्यवस्था में आए बड़े बदलाव को प्रमुखता से रेखांकित किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल की याद दिलाते हुए एक तीखा सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व के मौके पर प्रदेश में कहीं भी किसी तरह का दंगा या उपद्रव देखने या सुनने को मिला?

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मुख्यमंत्री ने कहा कि जन्माष्टमी का त्योहार प्रदेश के हर जिले, हर पुलिस लाइन, हर थाने और हर गली-मोहल्ले में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया, लेकिन कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं आई। उनके अनुसार यही शांतिपूर्ण माहौल आज के बदलते और सुरक्षित उत्तर प्रदेश की असली पहचान बन चुका है।

 2017 के पहले के हालात का किया जिक्र

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले के हालात का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में प्रदेश में अक्सर कर्फ्यू और दंगों जैसी स्थितियां बनी रहती थीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या उस समय कोई यह कल्पना भी कर सकता था कि इस तरह के उपद्रव और कर्फ्यू के माहौल के बीच स्कूल-कॉलेज सुचारू रूप से चल पाएंगे?

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बीते साढ़े नौ वर्षों के दौरान पूरे प्रदेश में कहीं भी दंगा-फसाद जैसी कोई घटना सामने नहीं आई है। उनके मुताबिक अब प्रदेश में शांति का माहौल स्थापित हो चुका है, जिसके चलते शिक्षण व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बदले हुए माहौल में अब कोई भी प्रदेश के शिक्षकों की निष्ठा और योग्यता पर सवाल नहीं उठा सकता।

पिछली सरकार पर साधा निशाना 

अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने जनता के संसाधनों का इस्तेमाल सैफई महोत्सव जैसे भव्य आयोजनों और विदेश से महंगी बग्घियां मंगाकर शाही अंदाज़ में जन्मदिन मनाने में किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर उस समय खर्च किया गया यह बेहिसाब पैसा प्रदेश के जर्जर स्कूलों की मरम्मत और शिक्षा व्यवस्था को सुधारने में लगाया गया होता, तो आज लाखों बच्चों का भविष्य संवर चुका होता और उत्तर प्रदेश को अपनी पहचान को लेकर किसी तरह के संकट का सामना ही नहीं करना पड़ता।

उन्होंने आगे बताया कि अकेले माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत जर्जर विद्यालय भवनों के पुनर्निर्माण के लिए उनकी सरकार ने अब तक पंद्रह सौ करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की है। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि यह वही काम है, जो 2017 से पहले भी आसानी से किया जा सकता था, लेकिन जो लोग अपने कार्यकाल में यह नहीं कर पाए, वे आज इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

नकल माफिया पर कसा शिकंजा 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की परीक्षा प्रणाली में हुए सुधारों का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के कई विद्यालय नकल के अड्डे बन चुके थे, जहां परीक्षाएं मानो ठेके पर आयोजित की जाती थीं। उन्होंने बताया कि इस दौरान दूसरे राज्यों से छात्र पैसे देकर आते थे और उनकी जगह कोई और व्यक्ति परीक्षा में बैठकर पेपर हल करता था, जिसे उन्होंने व्यंग्यात्मक रूप से ‘मुन्नाभाई’ की संज्ञा दी।

मुख्यमंत्री के अनुसार उनकी सरकार ने ऐसे दागी विद्यालयों और परीक्षा केंद्रों को स्थायी रूप से बंद करवाकर नकल माफिया की कमर तोड़ दी है, जिससे प्रदेश के ईमानदार शिक्षकों का खोया हुआ सम्मान और गरिमा फिर से बहाल हो सकी है। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत जैसे अभियानों के जरिए बेसिक से लेकर माध्यमिक शिक्षा तक एक गुणवत्तापूर्ण और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है।

 मानदेय में इजाफा

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में शिक्षकों के हित में लिए गए कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में जब उनकी सरकार सत्ता में आई थी, उस समय शिक्षामित्रों को महज तीन हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाता था। मुख्यमंत्री के अनुसार अब इस मानदेय को बढ़ाकर अठारह हजार रुपये कर दिया गया है।

इसी तरह अनुदेशकों का मानदेय भी बढ़ाकर सत्रह हजार रुपये किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभागों से जुड़े पंद्रह लाख से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों को उनके पूरे परिवार सहित पांच लाख रुपये तक के मुफ्त कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त इन शिक्षकों और कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा गारंटी योजना से भी जोड़ा गया है।

 राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा माध्यम है शिक्षा

अपने भाषण के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षक ही किसी भी राष्ट्र को संस्कारवान और सुसंस्कृत बनाने का सबसे बड़ा माध्यम होते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार शिक्षकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आगे भी उनके हित में इसी तरह के कदम उठाए जाते रहेंगे।

शिक्षक दिवस के इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ओर जहां प्रदेश की बदली हुई कानून-व्यवस्था और शांतिपूर्ण माहौल को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया, वहीं दूसरी ओर शिक्षा व्यवस्था में हुए सुधारों और शिक्षकों के हित में उठाए गए कदमों का भी विस्तार से ब्योरा पेश किया। उन्होंने इस मौके का इस्तेमाल पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों की आलोचना करने के लिए भी किया और यह संदेश देने की कोशिश की कि वर्तमान सरकार की प्राथमिकता शिक्षा, अनुशासन और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

 

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