लखनऊ में 187 श्रमिक बेटियों के हाथ हुए पीले, योगी सरकार ने दिया 85,000 का उपहार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का अवध शिल्प ग्राम गुरुवार को एक बेहद भावुक और गरिमामयी समारोह का गवाह बना। अवसर था कन्या विवाह सहायता योजना के अंतर्गत आयोजित विशाल सामूहिक विवाह कार्यक्रम का, जहां लखनऊ मण्डल के विभिन्न जिलों से आए निर्माण श्रमिकों की 187 बेटियों का विवाह हिंदू और मुस्लिम रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ।

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शहीद पथ स्थित अवध शिल्प ग्राम के विशाल प्रांगण में जब एक साथ सैकड़ों जोड़ों ने दाम्पत्य जीवन में कदम रखा, तो वहां का माहौल खुशियों और मंगल गीतों से सराबोर हो गया। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित किया कि सरकार गरीब और श्रमिक परिवारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

सर्वधर्म समभाव की दिखी अनूठी मिसाल

इस सामूहिक विवाह की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब देखने को मिली जब एक ही पंडाल के नीचे हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के जोड़े अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह के सूत्र में बंधे। आयोजन में लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, रायबरेली और हरदोई जिलों के कुल 187 जोड़ों ने हिस्सा लिया।

187 labourer daughters turn yellow in Lucknow

इनमें 176 हिंदू जोड़ों का विवाह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। वहीं 11 मुस्लिम जोड़ों का निकाह पढ़ा गया। यह आयोजन न केवल श्रमिक परिवारों के लिए आर्थिक मदद लेकर आया, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी दे गया।

श्रम मंत्री ने की पुष्प वर्षा

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इस दौरान मंत्री भावुक भी नजर आए, उन्होंने स्वयं नवविवाहित जोड़ों के पास जाकर उन पर पुष्प वर्षा की और उन्हें सुखी जीवन का आशीर्वाद दिया। अपने संबोधन में अनिल राजभर ने कहा कि निर्माण श्रमिक राष्ट्र के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं और उनकी बेटियों के हाथ पीले करना सरकार की जिम्मेदारी है।

मंत्री ने जोर देते हुए कहा, कन्या विवाह सहायता योजना केवल एक वित्तीय सहायता मात्र नहीं है, बल्कि यह उन श्रमिक परिवारों को आर्थिक और सामाजिक संबल प्रदान करने का एक सशक्त माध्यम है जो अपनी बेटियों की शादी के लिए परेशान रहते थे। हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है कि कोई भी श्रमिक अपनी आर्थिक स्थिति के कारण बेटी के विवाह को बोझ न समझे।

उपहारों और नकद सहायता की हुई बौछार

योजना के तहत सभी पात्र नवविवाहित जोड़ों को 85,000 रुपये की आर्थिक सहायता का प्रमाण पत्र सौंपा गया। यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जा रही है ताकि वे अपने नए जीवन की शुरुआत सम्मान के साथ कर सकें। इसके अलावा, सरोजनी नगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की प्रतिनिधि ने भी कार्यक्रम में शिरकत की और लखनऊ जनपद के नवविवाहित जोड़ों को व्यक्तिगत तौर पर उपहार स्वरूप वस्त्र और 501 रुपये की नकद राशि भेंट की। विधायक की इस पहल की वहां मौजूद सभी परिवारों ने सराहना की।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

विवाह के इस पवित्र उत्सव को और अधिक यादगार बनाने के लिए अंबेडकर नगर से आए कलाकारों ने विशेष प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों द्वारा गाए गए पारंपरिक विवाह गीतों और लोक नृत्यों ने पूरे अवध शिल्प ग्राम में एक सांस्कृतिक छटा बिखेर दी। ढोल-नगाड़ों की थाप और शहनाई की गूंज ने माहौल को पूरी तरह उत्सव में बदल दिया, जिससे वहां मौजूद श्रमिक परिवार अपनी गरीबी और संघर्षों को भूलकर अपनी बेटियों की खुशी में झूमते नजर आए।

अधिकारियों ने संभाली कमान

अपर श्रमायुक्त (लखनऊ क्षेत्र) कल्पना श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों और कन्याओं के परिजनों का स्वागत किया। बोर्ड की सचिव पूजा यादव ने इस मौके पर योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि बोर्ड का मुख्य उद्देश्य निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। उन्होंने कहा कि पंजीकरण के बाद श्रमिक इन कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठा सकते हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में मुख्य विकास अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, उपायुक्त उद्योग, डीसी मनरेगा और पुलिस प्रशासन का भी विशेष सहयोग रहा।

187 labourer daughters turn yellow in Lucknow

इस भव्य समारोह में अनुपमा गौतम सहित सभी छह जनपदों के सहायक श्रमायुक्त और श्रम प्रवर्तन अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित किया कि किसी भी वर-वधु या उनके परिवार को आयोजन के दौरान कोई असुविधा न हो।

लखनऊ के इस सामूहिक विवाह समारोह ने यह संदेश दिया है कि सरकारी योजनाएं यदि सही नीयत और बेहतर प्रबंधन के साथ लागू की जाएं, तो वे समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति के चेहरे पर भी मुस्कान ला सकती हैं। आज ये 187 बेटियां न केवल अपने नए घरों के लिए विदा हुईं, बल्कि अपने साथ सरकार का भरोसा और समाज का आशीर्वाद भी ले गईं।

 

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