मूर्तियों के खंडित होने पर लगेगी लगाम, योगी सरकार बनाएगी मजबूत सुरक्षा कवच: प्रभारी मंत्री

लखनऊ। योगी सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने और सामाजिक सौहार्द को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐसा कदम उठाया है, जो भविष्य की राजनीति में मील का पत्थर माना जा सकता है। मुरादाबाद जिले के प्रभारी मंत्री अनिल कुमार ने हाल ही में कैबिनेट द्वारा लिए गए अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय का खुलासा किया किया, जो सीधे तौर पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित देश के उन तमाम महापुरुषों के सम्मान से जुड़ा है जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

इसे भी पढ़ें- योगी के यूपी में  ‘श्वेत क्रांति’, महिलाएं संभाल रहीं 5000 करोड़ की डेयरी कमान

मंजूर  हुआ भारी बजट

सरकार ने महापुरुषों की सार्वजनिक प्रतिमाओं के सौंदर्यीकरण और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसके लिए भारी बजट को मंजूरी दे दी गई है। यह निर्णय केवल ईंट-पत्थर का ढांचा खड़ा करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह उन मूल्यों की रक्षा करने के बारे में है जिनका प्रतिनिधित्व ये महापुरुष करते हैं।

अक्सर देखा गया है कि, कुछ असामाजिक तत्व अपनी संकीर्ण मानसिकता और राजनीतिक द्वेष के कारण इन प्रतिमाओं को खंडित करने जैसी ओछी हरकतें करते हैं, जिससे न केवल एक विशेष वर्ग की भावनाएं आहत होती हैं, बल्कि पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था चरमरा जाती है। ऐसी घटनाओं के बाद उपजे जनाक्रोश और संभावित दंगों की स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने अब एक स्थायी समाधान निकालने का प्रयास किया है।

प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक करोड़ रुपए का बजट

मंत्री अनिल कुमार ने बताया कि, इस नई योजना के पहले चरण में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है, जो इस कार्य की गंभीरता को दर्शाता है। अब इन प्रतिमा स्थलों को केवल खुले मैदानों में असुरक्षित नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि वहां मजबूती के साथ बाउंड्री वॉल का निर्माण किया जाएगा और प्रतिमाओं को मौसमी आपदाओं व शरारती तत्वों से बचाने के लिए छज्जों का निर्माण भी कराया जाएगा।

यह कदम उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने की योगी सरकार की उस जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत किसी भी प्रकार के धार्मिक या सामाजिक उन्माद को पनपने से पहले ही कुचलने का लक्ष्य रखा गया है। प्रभारी मंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि, महापुरुषों का सम्मान ही असल में बहुजन समाज और राष्ट्र का सम्मान है। इस पहल के माध्यम से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि, वह दलित और वंचित समाज के आदर्शों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनकी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

प्रभारी मंत्री में बयान से गरमाई राजनीति

अनिल कुमार ने इस निर्णय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस विकास यात्रा का एक अनिवार्य पड़ाव बताया जो पिछले 9 वर्षों से निरंतर जारी है, जहां विकास का अर्थ केवल सड़कों और पुलों का निर्माण नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना भी है।

वहीं, दूसरी ओर, प्रभारी मंत्री ने अपनी इस घोषणा के साथ-साथ प्रदेश की राजनीतिक फिजाओं में भी गर्मी पैदा कर दी है। उन्होंने विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी की कार्यशैली पर तीखे प्रहार किए। मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष आज पूरी तरह से नेतृत्वहीन और नीतिहीन हो चुका है।

मंत्री के अनुसार, सपा के पास जनता को दिखाने के लिए न तो कोई पुराना ट्रैक रिकॉर्ड है और न ही भविष्य की कोई ठोस योजना, इसीलिए वे केवल अनर्गल बयानबाजी कर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश यादव द्वारा दिए गए पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले को उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक छलावा करार दिया।

सपा शासन में उड़ी कानून की धज्जियां

उन्होंने कहा कि, उत्तर प्रदेश की जागरूक जनता साल 2012 से 2017 के बीच के उस दौर को अभी भूली नहीं है जब राज्य में गुंडागर्दी का बोलबाला था और सत्ता के संरक्षण में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जाती थीं। उन्होंने तर्क दिया कि, जनता अब जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति को नकार चुकी है और वह विकास के उस मॉडल पर विश्वास कर रही है, जहां सबका साथ और सबका विकास का नारा केवल कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर दिखाई देता है।

मंत्री अनिल कुमार का आत्मविश्वास केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए गठबंधन की मजबूती का दावा करते हुए कहा कि, आगामी चुनावों में विपक्ष का सूपड़ा साफ होना तय है। उन्होंने असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि, पूरे देश में मोदी लहर आज भी उतनी ही प्रभावी है जितनी पहले थी। उनके अनुसार, देश की जनता अब राष्ट्रवाद की उस मुख्यधारा से जुड़ चुकी है, जहां केवल प्रगति और सुरक्षा की बात होती है।

300 से अधिक सीटें जीतेगा एनडीए गठबंधन

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक दावा पेश किया कि, आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन एक बार फिर 300 से अधिक सीटें जीतकर सत्ता में वापसी करेगा। उनका यह विश्वास योगी सरकार द्वारा पिछले सात वर्षों में किए गए उन क्रांतिकारी बदलावों पर आधारित है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश की छवि को एक बीमारू राज्य से बदलकर देश के सबसे उभरते हुए आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। बुनियादी ढांचे का विकास हो या फिर निवेश के लिए बना अनुकूल वातावरण, उत्तर प्रदेश ने हर क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए हैं।

प्रभारी मंत्री ने यह साफ कर दिया कि, सरकार की प्राथमिकता समाज के हर वर्ग तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के पहुँचाना है। महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा और सौंदर्यीकरण का यह निर्णय वास्तव में एक बड़े सामाजिक परिवर्तन की आहट है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में महापुरुषों के नाम पर राजनीति करने वालों और समाज को बांटने वालों के पास कोई मुद्दा न बचे।

यह योजना न केवल प्रतिमाओं को भौतिक सुरक्षा प्रदान करेगी, बल्कि यह समाज के भीतर उस आपसी भाईचारे और समरसता को भी खाद-पानी देगी जिसे कुछ तत्व हमेशा सुलगता हुआ देखना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश में विकास का यह नया अध्याय अब उन महापुरुषों की छाया में लिखा जाएगा जिन्होंने समतामूलक समाज का सपना देखा था, और योगी सरकार अब उन सपनों को बाउंड्री वॉल और सुनियोजित विकास के माध्यम से हकीकत में बदलने का प्रयास कर रही है। यह रणनीति न केवल चुनावी लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए भी एक आवश्यक और अनिवार्य कदम सिद्ध होगी।

 

इसे भी पढ़ें- 70 साल से विस्थापित हिंदुओं का वनवास खत्म, मात्र 1 रुपये की लीज पर जमीन देगी योगी सरकार

Related Articles

Back to top button