योगी सरकार का बड़ा फैसला, 3000 बढ़ेगी प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी, ये होगा नोएडा-लखनऊ का नया रेट कार्ड

लखनऊ। नोएडा में प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बाद योगी सरकार ने सोमवार देर रात एक अहम आदेश जारी कर दिया है। सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जो 1 अप्रैल से लागू होगा। सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों की सैलरी में 3000 रुपये तक का इजाफा किया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया है।

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योगी सरकार ने बढ़ाया वेतन

हालांकि, आगे वेज बोर्ड के माध्यम से व्यापक समीक्षा के बाद श्रमिकों की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा। आदेश के अनुसार गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जिले में अकुशल कर्मचारियों की सैलरी में करीब 2000 रुपये, कुशल कर्मचारियों में करीब 3000 रुपये और अर्धकुशल कर्मचारियों की सैलरी में लगभग 2600 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

Noida and Lucknow

प्रशासनिक स्तर पर लिए गए इस फैसले के मुख्य केंद्र नोएडा और गाजियाबाद जैसे हाई-टेक जिले रहे हैं, जहां जीवन यापन की लागत अन्य जिलों के मुकाबले कहीं अधिक है। सरकार ने इन विशिष्ट क्षेत्रों के लिए वेतन वृद्धि का एक अलग स्लैब निर्धारित किया है, जबकि लखनऊ, वाराणसी और कानपुर जैसे नगर निगम वाले जनपदों के लिए अलग मानक तय किए गए हैं।

नोएडा, लखनऊ और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए नए वेतन आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि अन्य नगर निगम वाले जनपदों की बात करें, तो वहां अकुशल कर्मचारियों का वेतन, जो पहले 11,313 रुपये था, अब बढ़कर 13,006 रुपये हो जाएगा। इसी प्रकार अर्धकुशल कर्मचारियों का वेतन 12,445 रुपये से बढ़ाकर 14,306 रुपये कर दिया गया है। कुशल श्रेणी के कर्मचारियों, जो तकनीकी कार्यों में दक्ष हैं, उनका वेतन 13,990 रुपये से सीधे 16,025 रुपये के स्तर पर पहुंच जाएगा।

स्थिति तनावपूर्ण

उत्तर प्रदेश के अन्य सामान्य जनपदों के लिए भी मजदूरी दरों में संशोधन किया गया है, जहां अकुशल श्रमिकों को अब 12,356 रुपये, अर्धकुशल को 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये न्यूनतम वेतन के रूप में दिए जाएंगे। सरकार के इस कदम का उद्देश्य आर्थिक असमानता को कम करना और औद्योगिक शांति बहाल करना है।

हालांकि, सरकार के इस बड़े ऐलान के बावजूद जमीन पर स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के हजारों कर्मचारी इस बढ़ोतरी को नाकाफी बता रहे हैं और वे 20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की मांग पर अड़े हुए हैं। मंगलवार को भी ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्रियों का काम प्रभावित रहा और बड़ी संख्या में मजदूर काम पर नहीं आए।

कर्मचारियों का तर्क है कि, जिस तेजी से मकानों का किराया और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़े हैं, उसे देखते हुए 2000-3000 रुपये की वृद्धि ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है। इस असंतोष ने मंगलवार को तब उग्र रूप ले लिया जब कासना और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। हालात की गंभीरता को देखते हुए पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है।

महिला कामगार भी शामिल हुईं आंदोलन में

मंगलवार को डीसीपी ग्रेटर नोएडा प्रवीण रंजन सिंह के नेतृत्व में पुलिस बल ने तनावग्रस्त इलाके में पैदल मार्च किया और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बाहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन ने लाउडस्पीकर से शांति बनाए रखने की अपील की। साथ ही चेतावनी दी कि, किसी भी तरह की तोड़फोड़ या अफवाह फैलाने वालों को कतई नहीं बक्शा जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर पत्थरबाजी और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की खबरें भी आईं, जिसके बाद पुलिस को बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा। औद्योगिक संगठनों ने भी सरकार के इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है, जहां कुछ इसे आर्थिक बोझ मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे उत्पादन जारी रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं।

खबर आ रही है कि, आज के इस आंदोलन में  हाउसिंग सोसायटियों में काम करने वाली महिला कामगार भी शामिल हो गई हैं। नोएडा के सेक्टर 121 स्थित सोसाइटियों के बाहर बड़ी संख्या में मेड, कुक और सफाई कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। इन महिलाओं का कहना है कि वे सालों से एक ही वेतन पर काम कर रही हैं, जबकि सोसायटियों का मेंटेनेंस और अन्य खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं। उनका विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि वेतन वृद्धि की यह मांग अब केवल संगठित क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि असंगठित क्षेत्र के घरेलू कामगारों तक फैल गई है।

मजबूत होगा श्रम कानून

अब उम्मीद जताई जा रही है कि, उत्तर प्रदेश सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का दूरगामी प्रभाव देखने को मिलेंगे। एक तरफ जहां यह प्रदेश के श्रम कानूनों को और मजबूत करेगा, वहीं दूसरी ओर यह निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं के लिए एक चुनौती भी पेश करेगा कि, वे बढ़े हुए वेतन खर्चों के साथ अपने परिचालन को कैसे संतुलित करते हैं।

लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों में, जहां सेवा क्षेत्र का विस्तार हो रहा है, वहां इस वेतन वृद्धि से कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिसका सकारात्मक असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक बेल्ट में शांति व्यवस्था कायम करना और नाराज कर्मचारियों को बातचीत की मेज पर लाना है, ताकि 1 अप्रैल से लागू होने वाले इन नए नियमों का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके।

 

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