ट्रंप की अपील: नेतन्याहू को माफी दो, ईरान युद्ध पर करने दो फोकस

यरुशलम/वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भ्रष्टाचार मामले में माफी की मांग को फिर से जोरदार तरीके से उठाया है। ट्रंप का कहना है कि इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को तुरंत नेतन्याहू को माफी दे देनी चाहिए, ताकि वे पूरी तरह ईरान के खिलाफ चल रही जंग पर फोकस कर सकें। यह बयान ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया एक्सियोस को दिए एक फोन इंटरव्यू में दिया है।

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ट्रंप ने दावा किया कि वे लगभग हर दिन नेतन्याहू से बात करते हैं और युद्ध की रणनीति पर चर्चा करते हैं। उनका मानना है कि नेतन्याहू के दिमाग में अदालत के केस का कोई दबाव नहीं होना चाहिए, अन्यथा यह इजराइल की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप के इस बयान ने इजराइल की राजनीति में हलचल मचा दी है।

नेतन्याहू

एक तरफ ईरान के साथ युद्ध छिड़ा हुआ है, जहां इजराइल और अमेरिका मिलकर हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नेतन्याहू के खिलाफ 2020 से चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे ने उनके राजनीतिक करियर को खतरे में डाल रखा है। ट्रंप ने इन आरोपों को ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया है। उनका कहना है कि, किसी प्रधानमंत्री पर सिगार, शैंपेन और ज्वेलरी जैसे छोटे-मोटे तोहफों के बदले राजनीतिक फायदे पहुंचाने के आरोप लगाना अनुचित है। यह सब बकवास है। नेतन्याहू को सिर्फ ईरान पर ध्यान देना चाहिए, न कि फालतू के कोर्ट केस पर।

  ये हैं आरोप

आपको बता दें कि, नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और विश्वासघात के तीन प्रमुख मामलों में मुकदमा चल रहा है। ये केस 2019 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद 2020 से अदालत में हैं।

केस 1: नेतन्याहू पर आरोप है कि उन्होंने हॉलीवुड प्रोड्यूसर अर्नॉन मिल्चन और ऑस्ट्रेलियाई अरबपति जेम्स पैकर से लगभग 2 लाख डॉलर के तोहफे लिए, जिनमें सिगार, शैंपेन और ज्वेलरी शामिल थे। बदले में, उन्होंने मिल्चन को वीजा और टैक्स ब्रेक में मदद की।

केस 2: इजराइल के प्रमुख अखबार ‘येदियॉत अहरोनॉत’ के पब्लिशर अर्नॉन मोजेस के साथ सौदा करने का आरोप। नेतन्याहू ने कथित तौर पर सकारात्मक कवरेज के बदले प्रतिस्पर्धी अखबार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

केस 3: वेबसाइट ‘वाल्ला!’ के मालिक शौल एलोविच को फायदे पहुंचाने का आरोप। बदले में, वेबसाइट पर नेतन्याहू के परिवार की सकारात्मक रिपोर्टिंग हुई।

ये आरोप नेतन्याहू की छवि को धूमिल कर रहे हैं और अगर वे दोषी साबित हुए तो उन्हें जेल की सजा हो सकती है, लेकिन युद्ध की वजह से ट्रायल अस्थायी रूप से स्थगित है।

इजराइल के कानून के मुताबिक, किसी आरोपी को माफी तभी मिल सकती है जब वह अपनी गलती स्वीकार करे और पछतावा जताए, लेकिन नेतन्याहू ने हमेशा आरोपों से इनकार किया है और खुद को राजनीतिक साजिश का शिकार बताया है। उनके वकीलों ने कई बार सुनवाई टालने की अपील की है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

 हर्जोग ने दिया जवाब

ट्रंप ने दावा किया कि पिछले एक साल में हर्जोग ने उनसे पांच बार वादा किया था कि वे नेतन्याहू को माफी दे देंगे। ट्रंप का कहना है कि, हर्जोग एक शर्मनाक व्यक्ति हैं। वे इस मुद्दे को नेतन्याहू पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर माफी नहीं दी गई, तो वे इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाते रहेंगे और हर्जोग से कोई मुलाकात नहीं करेंगे। ट्रंप का कहना है कि ईरान युद्ध के बीच नेतन्याहू का ध्यान भटकाना इजराइल की हार का कारण बन सकता है, लेकिन हर्जोग के कार्यालय ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

नेतन्याहू

 

एक सीनियर अधिकारी ने कहा, राष्ट्रपति हर्जोग ने कभी माफी देने का कोई वादा नहीं किया। वे सिर्फ कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक विचार करने की बात कहते रहे हैं। हर्जोग के ऑफिस ने बयान जारी कर कहा कि, इजराइल एक संप्रभु राष्ट्र है और यहां सभी फैसले कानून के अनुसार होते हैं। विदेशी दबाव से प्रभावित होकर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा, बयान में कहा गया। लीगल एक्सपर्ट्स का मानना है कि, अगर अब माफी दी गई तो इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है, क्योंकि यह राजनीतिक हस्तक्षेप लगेगा।

विपक्षी नेता बोले- देना चाहिए इस्तीफा

यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजराइल और ईरान के बीच युद्ध तेज हो गया है। फरवरी 2026 में शुरू हुए इस संघर्ष में इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि ईरान ने ड्रोन और मिसाइलों से जवाब दिया है। अमेरिका इजराइल का प्रमुख सहयोगी है और ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रंप ने खुद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई को ‘लाइटवेट’ बताया है और कहा है कि वे ईरान के अगले लीडर को चुनने में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर नेतन्याहू की कानूनी मुश्किलें इजराइल की एकता को प्रभावित कर रही हैं।

विपक्षी नेता यैर लैपिड ने कहा है कि, नेतन्याहू को माफी की बजाय इस्तीफा देना चाहिए, ताकि देश एक मजबूत नेतृत्व के साथ युद्ध लड़ सके।

पुराना है ट्रंप और नेतन्याहू का रिश्ता

ट्रंप और नेतन्याहू का रिश्ता पुराना है। ट्रंप के पहले कार्यकाल (2017-2021) में दोनों ने मिलकर ईरान परमाणु डील से अमेरिका को बाहर किया और जेरुशलम को इजराइल की राजधानी मान्यता दी। 2024 चुनाव में ट्रंप की जीत के बाद दोनों का गठजोड़ फिर मजबूत हुआ है। ट्रंप ने जून 2025 से ही नेतन्याहू की माफी की अपील शुरू कर दी थी, जब इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ा था   राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का यह बयान 2026 के मध्यावधि चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया है, जहां वे इजराइल समर्थक वोटरों को लुभाना चाहते हैं।

इजराइल में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी की सरकार है, लेकिन युद्ध के बीच विपक्षी पार्टियां उन्हें घेर रही हैं। सर्वेक्षणों के मुताबिक, 60 प्रतिशत इजराइली मानते हैं कि, नेतन्याहू को माफी नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि इससे न्याय व्यवस्था कमजोर होगी। वहीं, उनके समर्थक कहते हैं कि युद्धकाल में प्रधानमंत्री को कानूनी झंझट से मुक्त रखना जरूरी है। हर्जोग, जो 2021 से राष्ट्रपति हैं, ने हमेशा खुद को गैर-राजनीतिक बताया है, लेकिन ट्रंप का हमला उन्हें मुश्किल में डाल सकता है।

गठबंधन को कमजोर कर सकती हैं कानूनी मुश्किलें

अगर माफी मिली तो नेतन्याहू का राजनीतिक करियर बच सकता है, लेकिन यह इजराइल की न्यायपालिका पर सवाल उठाएगा। दूसरी तरफ, अगर ट्रायल चला तो युद्ध के बीच नेतन्याहू को जेल जाना पड़ सकता है, जो इजराइल की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, यह बयान ट्रंप की विदेश नीति को दर्शाता है, जहां वे सहयोगी नेताओं को बचाने के लिए दबाव बनाते हैं। ईरान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ट्रंप और नेतन्याहू दोनों अपराधी हैं, जो युद्ध अपराध कर रहे हैं।

ट्रंप का यह बयान न सिर्फ इजराइल की आंतरिक राजनीति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि ईरान युद्ध की रणनीति पर भी सवाल उठा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में जब इजराइल और अमेरिका मिलकर ईरान को घेर रहे हैं, नेतन्याहू की कानूनी मुश्किलें दोनों देशों के गठबंधन को कमजोर कर सकती हैं। आखिरकार, यह देखना होगा कि हर्जोग ट्रंप के दबाव में आते हैं या कानून का पालन करते हैं। फिलहाल, युद्ध और राजनीति का यह मिश्रण मध्य पूर्व की स्थिति को और जटिल बना रहा है।

 

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