
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामला अब सड़क से निकलकर देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते कई दिनों से चल रहे प्रदर्शन और संसद में लगातार जारी हंगामे के बीच शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि, इस मामले को यूं ही नहीं जाने दिया जा सकता, जिसके बाद केंद्र सरकार पर छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर ठोस कार्रवाई का दबाव और बढ़ गया है।
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हल्के में नहीं ले सकते गड़बड़ी को
शुक्रवार, 24 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि, इतने बड़े स्तर पर हुई गड़बड़ी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अदालत के इस रुख ने साफ संकेत दे दिया कि, वह केवल सरकार के आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर उठाए गए ठोस कदमों पर भी नजर रखेगी।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार छात्रों के हितों को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के लिए बनाई गई राधाकृष्णन कमिटी की रिपोर्ट को लागू किया जाएगा, लेकिन सरकार इससे भी आगे बढ़कर कई अतिरिक्त कदम उठाने जा रही है। मेहता ने अदालत से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय भी मांगा।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति जताते हुए कहा कि, वह भी यही चाहता है कि, पूरी परीक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाया जाए। अदालत ने सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई की तारीख सोमवार, 3 अगस्त तय कर दी।
साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा पर हिदायत
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम पहलू पर ध्यान दिलाया। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए अगले साल से नीट-यूजी परीक्षा को कंप्यूटर आधारित प्रणाली से कराने की योजना बना रही है, ऐसे में सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि, वह साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा को लेकर ठोस और भरोसेमंद कदम उठाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि, वह पेपर लीक मामले में सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर लगातार निगरानी रखेगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जंतर-मंतर पर जारी है धरना
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते कई दिनों से चल रहा प्रदर्शन अहम भूमिका निभा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले छात्र संगठन लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया है कि, जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में पीछे नहीं हैं और संसद परिसर के भीतर लगातार नारेबाजी व विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।
गौरतलब है कि इस आंदोलन से जुड़ा एक और अहम घटनाक्रम हाल ही में सामने आया, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म की। यह भूख हड़ताल 26 दिनों से भी ज्यादा समय तक चली थी, जिसे लेकर देशभर में चिंता जताई जा रही थी। भूख हड़ताल खत्म होने पर आंदोलनकारियों ने राहत जताई और इसे देश के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन के प्रति जिम्मेदारी भरा फैसला बताया।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
नीट पेपर लीक मामले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से इस मामले में कुछ कदमों की घोषणा किए जाने के बावजूद विपक्ष अपनी मांग पर कायम है। विपक्ष का कहना है कि, जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जवाबदेही तय नहीं मानी जा सकती।
इस बीच केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की तरफ से एक बार फिर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों से बातचीत की पहल की जा रही है। दोनों केंद्रीय मंत्री दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आंदोलनकारियों के साथ बैठक करेंगे, ताकि गतिरोध को खत्म करने का कोई रास्ता निकाला जा सके।
गुस्से में छात्र
नीट पेपर लीक जैसी घटनाएं देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ी होती हैं, इसलिए इस मुद्दे पर आम जनता और छात्र संगठनों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। छात्रों का कहना है कि, सालों की मेहनत के बाद परीक्षा में होने वाली इस तरह की गड़बड़ियां उनके भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। इसी वजह से यह मुद्दा केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवालिया निशान बनकर उभरा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 3 अगस्त तय की है, जिस दिन केंद्र सरकार को पेपर लीक मामले में उठाए गए कदमों और भविष्य की योजना पर विस्तृत जवाब पेश करना होगा। इस बीच जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन और संसद में विपक्ष के लगातार हंगामे के चलते यह साफ है कि आने वाले दिनों में भी यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गरमाया रहेगा। सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार अगली सुनवाई से पहले कौन-कौन से ठोस कदम उठाती है, और क्या इससे छात्रों तथा विपक्ष का गुस्सा शांत हो पाएगा।
बड़ा सवाल बनी शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी
नीट पेपर लीक मामला अब सिर्फ एक परीक्षा में हुई गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश की समूची परीक्षा प्रणाली में भरोसे और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर है कि वह न केवल मौजूदा गड़बड़ियों को ठीक करे, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भरोसेमंद और पारदर्शी व्यवस्था भी सुनिश्चित करे। तब तक जंतर-मंतर पर जारी धरना और संसद के भीतर-बाहर जारी सियासी घमासान इस बात का संकेत है कि यह मुद्दा फिलहाल थमने वाला नहीं है।



