
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर सियासी बवाल खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि, वर्ष 2029 से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता, UCC) लागू कर दिया जाएगा। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अमित शाह का ‘गलतफहमी भरा अहंकार’ करार दिया है। उन्होंने बीजेपी के सहयोगी दलों से भी अपील की है कि, वे कम से कम इस मुद्दे पर पार्टी से अलग और स्वतंत्र राजनीतिक रुख अपनाएं।
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CAA-NRC विरोध का दिया हवाला
ओवैसी ने अपने बयान में कुछ साल पहले नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ देशभर में हुए बड़े पैमाने के विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं को याद दिलाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री पर सीधा निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि, अमित शाह के अति-आत्मविश्वास और उनके तथाकथित ‘राजनीतिक क्रोनोलॉजी’ के कारण ही वर्ष 2019 में सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन इतने बड़े स्तर पर भड़का था। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा कि, यह अहंकार और गलतफहमी ही सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी साबित हो रही है।
UCC पर जताई आपत्ति
एआईएमआईएम प्रमुख ने समान नागरिक संहिता को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि, खुद भाजपा की सरकार द्वारा गठित विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा था कि यूसीसी ‘न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय।’ ओवैसी का तर्क है कि, भारत की सबसे बड़ी विशेषता उसका बहुलवाद और विविधता है और यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का सीधा मतलब होगा कि, गैर-हिंदू समुदायों पर एक तरह से हिंदू कानूनी परंपराओं को थोप दिया जाए। उनके अनुसार, यह कदम देश की सांस्कृतिक और धार्मिक बहुलता की मूल भावना के खिलाफ है।
BJP पर लगाया दोहरेपन का आरोप
ओवैसी ने बीजेपी की नीतियों में दोहरेपन का आरोप लगाते हुए कहा कि, एक तरफ पार्टी पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात करती है, तो दूसरी तरफ अपने ही शासित राज्यों में डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट जैसे कानून पास करवाती है। उनके मुताबिक, ऐसे कानून हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संपत्ति की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने का काम करते हैं, जो समानता के सिद्धांत के सीधे विपरीत है।
इसके अलावा उन्होंने तथाकथित ‘लव जिहाद विरोधी’ कानूनों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि व्यवहार में इन कानूनों का इस्तेमाल मुख्य रूप से ईसाई और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ ही किया जा रहा है। ओवैसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके अनुसार यूसीसी वास्तव में समानता स्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि खासतौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के मकसद से लाया जा रहा है।
SIR पर भी उठाए सवाल
अपने बयान में ओवैसी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने याद दिलाया कि पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना पड़ा था कि, देश में एनआरसी लागू नहीं किया जाएगा, लेकिन अब, उनके अनुसार, देश एसआईआर प्रक्रिया के रूप में एक नई तरह की ‘त्रासदी’ से गुजर रहा है, जिसमें आम नागरिकों को अपने दस्तावेजों के साथ सुनवाई के लिए पेश होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि, इस प्रक्रिया का सबसे ज्यादा नकारात्मक असर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक समुदायों और प्रवासी मजदूरों पर पड़ रहा है, जिन्हें पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
विनाशकारी होगा NRC
ओवैसी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि, अगर देशभर में एनआरसी लागू किया गया, तो यह असम में लागू किए गए एनआरसी से भी सौ गुना अधिक विनाशकारी साबित होगा। उन्होंने असम एनआरसी के दौरान हुई अव्यवस्था और आम लोगों को हुई परेशानियों का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया कितनी विनाशकारी साबित हो चुकी है, यह सब पहले ही देख चुके हैं।

अपने एक बयान में उन्होंने कहा कि, एनआरसी हर नागरिक को कतार में खड़ा करके अपनी नागरिकता साबित करने के लिए मजबूर कर देगा। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जिस देश में करीब 80 करोड़ लोग खाद्य सुरक्षा के तहत राशन पर निर्भर हैं, वहां सरकार चाहती है कि वे अपने दस्तावेज ढूंढें और अपनी नागरिकता साबित करें। ओवैसी के अनुसार, यह पूरी व्यवस्था नागरिकों को किसी न किसी सरकारी अधिकारी की मर्जी पर निर्भर बनाए रखने की कोशिश है।
अमित शाह ने क्या कहा था
गौरतलब है कि, यह पूरा विवाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जो उन्होंने रविवार को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया था। अमित शाह ने कहा था कि, वर्ष 2029 से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने इस दौरान तीन तलाक कानून को खत्म किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिला है। शाह ने आगे कहा कि सरकार पहले ही कई राज्यों में यूसीसी की शुरुआत कर चुकी है, और उन्हें पूरा भरोसा है कि 2029 से पहले सभी 21 भाजपा-एनडीए शासित राज्यों में इसे प्रभावी ढंग से लागू कर दिया जाएगा।
सियासी हलकों में तेज हुई बहस
अमित शाह के इस बयान और उसके बाद ओवैसी की तीखी प्रतिक्रिया ने एक बार फिर समान नागरिक संहिता को लेकर देश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। जहां बीजेपी इसे महिला अधिकारों और कानूनी समानता की दिशा में एक बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल और विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि इसे धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता पर हमले के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी के सहयोगी दल इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या वाकई वे पार्टी से अलग कोई स्वतंत्र राजनीतिक स्टैंड लेते हैं, जैसा कि ओवैसी ने उम्मीद जताई है।
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