
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हुए ब्रिक्स सम्मेलन 2026 के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया, जब सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी दे दी। इस सम्मेलन के दौरान वैश्विक स्तर पर लगाई जा रही एकतरफा टैरिफ नीतियों को लेकर सदस्य देशों ने गहरी चिंता जताई और इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत पर बल दिया।
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इस पूरे आयोजन के दौरान एक बेहद खूबसूरत और चर्चित तस्वीर भी सामने आई, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक-दूसरे का हाथ थामे मुस्कुराते हुए मुलाकात करते नजर आए। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और इसे तीनों वैश्विक शक्तियों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा गया।
वैश्विक नियमों में भागीदारी पर जोर
ब्रिक्स समिट 2026 को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य के वैश्विक नियम-निर्माण की प्रक्रिया में समान भागीदारी सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबरस्पेस, बाहरी अंतरिक्ष, बायोटेक्नोलॉजी और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में आने वाले समय में जो नियम तय होंगे। वे न सिर्फ भविष्य के अवसरों को आकार देंगे बल्कि वैश्विक व्यवस्था की दिशा भी निर्धारित करेंगे।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि, ग्लोबल साउथ के देशों को अब केवल नियम मानने वाले देशों की भूमिका से आगे बढ़कर नियम बनाने वाले देशों की भूमिका में आना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि, ब्रिक्स के मंच का इस्तेमाल कर ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय बातचीत के कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता से लैस किया जा सकता है, ताकि वे वैश्विक मंचों पर अपने देशों का प्रभावी प्रतिनिधित्व कर सकें।
मानवता का विकास पहली प्राथमिकता
सम्मेलन की आधिकारिक घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हर प्रयास और हर नीति के केंद्र में मानवता का विकास होना अनिवार्य है। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों को मिलकर वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार से जुड़े दस महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने यह भी प्रस्तावित किया कि, अगले ब्रिक्स सम्मेलन तक इन सभी प्रस्तावों को एक ठोस और व्यावहारिक ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप का स्वरूप दिया जाना चाहिए, ताकि सैद्धांतिक चर्चाओं को व्यावहारिक नतीजों में बदला जा सके।
वैश्विक व्यवस्था को बताया असंतुलित
पीएम मोदी ने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था की संरचना पर भी गंभीर टिप्पणी की और उसे असंतुलित बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक ढांचा एक पिरामिड की तरह काम करता है। इस ढांचे में सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति केवल शीर्ष पर बैठे चुनिंदा देशों के हाथों में ही है। इसके विपरीत, निचले स्तर के देश ऐसे फैसलों से सीधे प्रभावित तो होते हैं, लेकिन उन फैसलों को आकार देने या प्रभावित करने की क्षमता उनके पास नहीं होती। प्रधानमंत्री ने इस असंतुलन को दूर किए जाने की जरूरत बताते हुए कहा कि ब्रिक्स जैसे मंच इस दिशा में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अगले 20 वर्षों के लिए बड़े एजेंडे की जरूरत
मोदी ने आगे कहा कि, आने वाले दो दशकों के लिए ब्रिक्स को एक नया और महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि, इस बदलाव की शुरुआत ब्रिक्स की अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली में सुधार से होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भले ही ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष अलग-अलग सदस्य देश को मिलती हो, लेकिन इस बदलाव का असर संगठन के संस्थागत कामकाज की निरंतरता और गति पर नहीं पड़ना चाहिए।
इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स के लिए एक स्थायी निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसके तहत मौजूदा ‘ट्रोइका’ व्यवस्था के माध्यम से सभी पहलों और उनके नतीजों पर व्यवस्थित रूप से आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि, हर महत्वपूर्ण निर्णय से जुड़े नोडल पॉइंट, तय समय-सीमा और कार्यान्वयन की मौजूदा स्थिति को दर्ज करने के लिए एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी विकसित की जानी चाहिए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
ब्रिक्स की परिपक्वता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में ब्रिक्स की परिपक्वता का जिक्र करते हुए कहा कि, अब ये संगठन एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने बताया कि बीते दो दशकों के दौरान ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है। पीएम मोदी के अनुसार, यह संगठन इसलिए सफल रहा है, क्योंकि इसके सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए आम सहमति के आधार पर आगे बढ़ते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि, ब्रिक्स की कार्यशैली किसी का विरोध करने की नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने की रही है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि, अब समय आ गया है जब ब्रिक्स को अपनी आंतरिक एकता और आम सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस और प्रभावी नतीजों में तब्दील करना होगा।
20वीं वर्षगांठ बना ऐतिहासिक अवसर
संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी सदस्य देशों के सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस वर्ष के सम्मेलन को एक ऐतिहासिक पड़ाव करार देते हुए कहा कि, ब्रिक्स अपनी स्थापना की 20वीं वर्षगांठ मना रहा है।
प्रधानमंत्री ने इसे एक प्रतीकात्मक अवसर बताते हुए कहा कि, जिस तरह मानव जीवन में 20 वर्ष की आयु परिपक्वता और बड़ी जिम्मेदारियों के एक नए दौर की शुरुआत मानी जाती है, ठीक उसी तरह ब्रिक्स के लिए भी यह वर्ष आने वाले दो दशकों के लिए एक नई और महत्वाकांक्षी दिशा तय करने का उपयुक्त समय है।
सर्वसम्मति से मंजूर हुआ घोषणापत्र
सम्मेलन के समापन पर सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर नई दिल्ली घोषणापत्र को सभी सदस्य देशों की सहमति से पारित किया गया। इस घोषणापत्र में वैश्विक व्यापार में बढ़ती एकतरफा टैरिफ नीतियों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई है, जिसे विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के हितों के लिए नुकसानदेह माना गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि, यह घोषणापत्र आने वाले समय में ब्रिक्स देशों की साझा आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। नई दिल्ली में आयोजित यह ब्रिक्स सम्मेलन न केवल संगठन की 20वीं वर्षगांठ के प्रतीक के रूप में बल्कि वैश्विक व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक निर्णायक कदम के तौर पर भी याद रखा जाएगा।
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