
नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई है। चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का चुनाव चिन्ह फ्रीज किए जाने के बाद देश की राजनीति में नया घमासान शुरू हो गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की प्रतिक्रिया ने विवाद को और गहरा दिया है, जिसके बाद बीजेपी की ओर से उन पर तीखा पलटवार किया गया है।
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क्या है पूरा विवाद
दरअसल, चुनाव आयोग की तरफ से टीएमसी का चुनाव चिन्ह फ्रीज किए जाने के फैसले पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। अपने इस पोस्ट में कांग्रेस नेता ने न सिर्फ चुनाव आयोग बल्कि सत्तारूढ़ बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, जिसके तुरंत बाद बीजेपी की ओर से करारा जवाब देने की तैयारी शुरू हो गई।
बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी का तीखा प्रहार
शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि, कांग्रेस नेता को न तो समाज की वास्तविक समझ है, न ही देश की समृद्ध संस्कृति के बारे में कोई जानकारी है, और न ही धर्म से जुड़े विषयों की उन्हें कोई गहरी समझ है।
त्रिवेदी ने यहां तक कह डाला कि, राहुल गांधी पढ़ने-लिखने में भी विशेष रुचि नहीं रखते, जिसकी वजह से उनके बयानों में तथ्यात्मक गलतियां देखने को मिलती रहती हैं।बीजेपी नेता ने आगे कहा कि, राहुल गांधी ने अपने ताजा ट्वीट में जिन राजनीतिक दलों का उल्लेख किया है, उन्हें शायद यह भी ठीक से मालूम नहीं कि वे पार्टियां वास्तव में कैसे अस्तित्व में आईं और उनका इतिहास क्या रहा है।
राहुल गांधी के ट्वीट पर विस्तृत प्रतिक्रिया
सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से बताया कि, राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा था कि, पहले शिवसेना को तोड़ा गया, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को विभाजित किया गया, और अब तृणमूल कांग्रेस पर कार्रवाई की जा रही है। त्रिवेदी के अनुसार, राहुल गांधी ने इन तीन प्रमुख क्षेत्रीय दलों का नाम लेकर यह जताने की कोशिश की कि, भाजपा लगातार विपक्षी दलों को तोड़ने और कमजोर करने का काम कर रही है।

हालांकि, बीजेपी नेता ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज करते हुए एक बड़ा तथ्यात्मक दावा पेश किया। उन्होंने कहा कि, जिन दो पार्टियों टीएमसी और एनसीपी का जिक्र राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में किया, वे दोनों ही दल वास्तव में कांग्रेस पार्टी से अलग होकर टूटने के बाद अस्तित्व में आई थीं। त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि, कांग्रेस पार्टी का अपना इतिहास ऐसे टूट-फूट और विभाजन की अनगिनत घटनाओं से भरा पड़ा है, और यह गिनना भी मुश्किल है कि, कांग्रेस से अब तक कितनी पार्टियां अलग हो चुकी हैं।
पूर्व प्रधानमंत्रियों का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा
अपने बयान को और पुख्ता करने के लिए सुधांशु त्रिवेदी ने इतिहास के पन्नों से कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण भी पेश किए। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और चंद्रशेखर का विशेष उल्लेख करते हुए कांग्रेस पार्टी पर राजनीतिक छल-कपट का आरोप लगाया।
त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि, जनता पार्टी की सरकार के दौरान चौधरी चरण सिंह के साथ आखिर किसने राजनीतिक धोखा किया था। उन्होंने इस संदर्भ में हाल के राजस्थान के राजनीतिक घटनाक्रम का भी हवाला दिया, जहां उनके अनुसार करीब आधा दर्जन विधायकों को अन्य दलों में शामिल कराया गया था। त्रिवेदी ने विशेष रूप से बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) का उदाहरण देते हुए कहा कि बीएसपी ने जब कांग्रेस को समर्थन दिया, तब भी कांग्रेस ने बीएसपी के विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था।
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस।
हर बार एक ही पैटर्न – BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।
वोट चोरी। सरकार चोरी।…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 18, 2026
इसके अलावा उन्होंने आंध्र प्रदेश के दिग्गज नेता और तेलुगु देशम पार्टी के संस्थापक एनटी रामाराव की पार्टी के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया। त्रिवेदी के अनुसार, कांग्रेस पार्टी की यह कार्यशैली दशकों पुरानी है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ हुई राजनीतिक घटना है।
चंद्रशेखर सरकार गिराने का जिक्र
बीजेपी नेता ने अपने बयान में विशेष जोर देते हुए कहा कि, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सरकार के साथ भी कांग्रेस पार्टी ने ठीक वैसा ही व्यवहार किया था। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर की सरकार बनने के महज तीन महीने के भीतर ही कांग्रेस पार्टी ने अपना समर्थन वापस लेते हुए उनकी सरकार को गिरा दिया था। त्रिवेदी के अनुसार, यह घटना कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक चरित्र को उजागर करने के लिए काफी है।
सियासी हलकों में तेज हुई बहस
सुधांशु त्रिवेदी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर बीजेपी इसे कांग्रेस के दोहरे मापदंड और ऐतिहासिक राजनीतिक चालबाजियों को उजागर करने वाला बयान बता रही है। वहीं कांग्रेस और विपक्षी खेमे की ओर से इस पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया आनी बाकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, टीएमसी के चुनाव चिन्ह फ्रीज किए जाने के मामले ने एक बार फिर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच पुरानी राजनीतिक रंजिशों को हवा दे दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है, खासकर तब जब देश आगामी चुनावी माहौल की ओर बढ़ रहा है।
फिलहाल इस पूरे प्रकरण पर कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी की ओर से बीजेपी के इन आरोपों का कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। परंतु यह तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह राजनीतिक जंग और तेज होगी, जिसका सीधा असर संसद के आगामी सत्रों और चुनावी रणनीतियों पर भी देखने को मिल सकता है।
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