
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने अपने स्टील्थ फ्रिगेट बेड़े को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। नौसेना ने प्रोजेक्ट 17बी के तहत सात अत्याधुनिक युद्धक जहाजों के निर्माण के लिए ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल’ यानी प्रस्ताव आमंत्रण जारी कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी वॉरशिप कार्यक्रम की अनुमानित लागत करीब 70,000 करोड़ रुपये आंकी गई है, जो भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े स्वदेशी युद्धपोत सौदों में से एक होगा।
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पहली बार प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि, इस बार नौसेना ने इसके लिए प्रतिस्पर्धी बोली यानी कॉम्पिटिटिव बिडिंग की प्रक्रिया अपनाई है। आपको बता दें कि, इससे पहले प्रोजेक्ट 15ए, प्रोजेक्ट 15बी और प्रोजेक्ट 17ए जैसे बड़े युद्धपोत कार्यक्रमों के ठेके नॉमिनेशन रूट के जरिए, यानी बिना किसी प्रतिस्पर्धा के सीधे किसी सरकारी रक्षा उपक्रम (डिफेंस पीएसयू) को सौंपे गए थे।

नॉमिनेशन रूट में सरकार सीधे किसी एक शिपयार्ड को परियोजना आवंटित कर देती है, जबकि प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में विभिन्न शिपयार्ड को लागत और तकनीकी दक्षता के आधार पर एक-दूसरे से मुकाबला करना पड़ता है। नौसेना के इस फैसले को घरेलू शिपयार्ड उद्योग में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और लागत को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि, प्रोजेक्ट 17बी के लिए जिन शिपयार्ड को प्रस्ताव आमंत्रण भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है, उनमें श्रेणी-ए के प्रमुख शिपयार्ड शामिल हैं। इनमें मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। ये सभी शिपयार्ड देश के रक्षा जहाज निर्माण क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं और इन्होंने पहले भी नौसेना के लिए कई अहम युद्धपोत तैयार किए हैं।
क्या है प्रोजेक्ट 17बी
प्रोजेक्ट 17बी वास्तव में स्टील्थ फ्रिगेट की एक उन्नत श्रेणी है, जिसे ‘नेक्स्ट जेनरेशन फ्रिगेट्स’ यानी अगली पीढ़ी के फ्रिगेट के नाम से भी जाना जाता है। इसे खासतौर पर लंबी दूरी तक सटीक हमला करने, बहु-स्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह परियोजना वास्तव में पहले के प्रोजेक्ट 17ए यानी नीलगिरि श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट का ही उन्नत और अधिक सक्षम संस्करण है।
नीलगिरि श्रेणी के तहत पहले ही आईएनएस नीलगिरि, आईएनएस हिमगिरि, आईएनएस तारागिरि, आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस दूनागिरि, आईएनएस महेंद्रगिरि और आईएनएस विंध्यगिरि जैसे युद्धपोत नौसेना के बेड़े का हिस्सा बन चुके हैं या बनने की प्रक्रिया में हैं। प्रोजेक्ट 17बी के तहत बनने वाले युद्धपोत इन सभी की तुलना में कहीं अधिक उन्नत तकनीक से लैस होंगे।
अत्याधुनिक हथियार और तकनीक से होंगे लैस
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि, प्रोजेक्ट 17बी के तहत तैयार होने वाले युद्धपोतों में उन्नत लो-ऑब्जर्वेबल स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे इन्हें दुश्मन के रडार से पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा इनमें आधुनिक सेंसर प्रणाली और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के लिए शक्तिशाली वर्टिकल लॉन्च सिस्टम भी लगाए जाएंगे।
इन युद्धपोतों में स्वदेशी ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें, अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियां भी शामिल किए जाने की उम्मीद है। यह संयोजन इन फ्रिगेट को आक्रामक और रक्षात्मक, दोनों तरह के अभियानों के लिए सक्षम बनाएगा।
क्यों अहम है यह परियोजना
स्टील्थ फ्रिगेट को भारतीय नौसेना की सतही युद्ध क्षमता की रीढ़ माना जाता है। ये युद्धपोत न केवल विमानवाहक पोतों जैसे महत्वपूर्ण नौसैनिक संसाधनों की सुरक्षा करते हैं, बल्कि देश के लिए अहम समुद्री मार्गों को भी सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा दूर-दराज के समुद्री क्षेत्रों में भारत की नौसैनिक ताकत के प्रदर्शन में भी इनकी अहम भूमिका होती है।

आधुनिक समुद्री युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किए गए ये फ्रिगेट उन्नत हथियार प्रणालियों, अत्याधुनिक सेंसर तकनीक और विमानन सुविधाओं को एक साथ समाहित करते हैं। इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि, ये रडार, इन्फ्रारेड यानी ऊष्मीय और ध्वनि संकेतों को इस तरह नियंत्रित करते हैं कि दुश्मन के लिए इनका पता लगाना बेहद कठिन हो जाता है। यही स्टील्थ क्षमता इन्हें आक्रामक और रक्षात्मक, दोनों तरह के सैन्य अभियानों में कारगर बनाती है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि, प्रोजेक्ट 17बी न केवल भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाई देगा, बल्कि यह देश के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा। स्वदेशी शिपयार्ड को इस स्तर की जटिल और अत्याधुनिक तकनीक वाली परियोजना सौंपे जाने से न केवल घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि, भारत के विस्तृत समुद्री क्षेत्र और हिंद महासागर में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों को देखते हुए स्टील्थ फ्रिगेट बेड़े का आधुनिकीकरण समय की मांग है। ऐसे में प्रोजेक्ट 17बी को भारतीय नौसेना की दीर्घकालिक क्षमता निर्माण योजना का एक अहम स्तंभ माना जा रहा है। आने वाले समय में इस परियोजना के तहत शिपयार्ड के चयन और अंतिम अनुबंध को लेकर और स्पष्टता सामने आने की उम्मीद है, जिस पर रक्षा जगत की करीबी नजर बनी हुई है।
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