
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध और मिसाइलों की गड़गड़ाहट के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे खतरनाक जलडमरूमध्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जिसे वर्तमान युद्ध के दौर में डेथ जोन माना जा रहा है, वहां से भारतीय पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर आ रहे दो विशाल व्यापारिक जहाज सुरक्षित बाहर निकल रहे हैं। यह घटनाक्रम न केवल भारत की कूटनीतिक जीत है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक संजीवनी की तरह है।
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तेल संकट पर नजर
जब पूरी दुनिया की नजरें ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और संभावित तेल संकट पर टिकी हैं, तब भारतीय नौसेना के युद्धपोत फारस की खाड़ी में कवच बनकर खड़े हैं। इन जहाजों का सुरक्षित निकलना इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी जरूरी ऊर्जा सप्लाई लाइनों को चालू रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय की पैनी नजर हर उस लहर पर है, जहां तिरंगा लहरा रहा है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का वह संकरा समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। वर्तमान में जारी जंग के कारण इस रूट पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप होने की कगार पर थी, जिससे भारत में ईंधन की किल्लत और कीमतों में भारी उछाल की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि, पिछले 24 घंटों में जो तस्वीर उभरी है, उसने भारतीय बाजार और सरकार को बड़ी राहत दी है।
जानकारी के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों से लदे दो और व्यापारी जहाज जल्द ही भारतीय तटों पर पहुंचने की उम्मीद है। ये जहाज उस समय इस मार्ग को पार कर रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों ने इस रूट के लिए प्रीमियम बढ़ा दिया है और कई देशों ने अपने जहाजों को वहां जाने से रोक दिया है। भारत ने न केवल अपने जहाजों को सुरक्षा दी है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि देश की ‘एनर्जी लाइफलाइन’ में कोई रुकावट न आए।’
रीयल-टाइम इंटेलिजेंस भी दें रहे
इन जहाजों की सुरक्षा कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि भारतीय नौसेना की सोची-समझी रणनीति का परिणाम है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के आसपास भारतीय नौसेना ने अपने घातक युद्धपोतों और निगरानी विमानों (P-8I) को तैनात किया है। नौसेना का स्पष्ट संदेश है भारतीय झंडे वाले जहाज की तरफ उठने वाली हर चुनौती का करारा जवाब दिया जाएगा।
भारतीय युद्धपोत न केवल इन जहाजों को एस्कॉर्ट कर रहे हैं, बल्कि तकनीकी सहायता और रीयल-टाइम इंटेलिजेंस भी प्रदान कर रहे हैं। नौसेना के कमांड सेंटर से हर पल की लोकेशन ट्रैक की जा रही है। अगर किसी भी जहाज पर ड्रोन हमला या समुद्री डकैती का खतरा मंडराता है, तो मार्कोस कमांडो और नेवी के जवान कुछ ही मिनटों में रिस्पॉन्स देने के लिए तैयार हैं।
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने भारत की तैयारियों पर मुहर लगाते हुए एक महत्वपूर्ण अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान खाड़ी क्षेत्र में किसी भी भारतीय जहाज या नाविक के साथ कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। यह भारत की मॉनिटरिंग प्रणाली की बड़ी सफलता है।
हाई-टेक वार रूम तैयार
राजेश कुमार सिन्हा के अनुसार, इस समय फारस की खाड़ी के अशांत जल क्षेत्र में भारतीय झंडे वाले लगभग 20 जहाज सक्रिय रूप से संचालन कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन जहाजों पर सवार लगभग 540 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनके परिवारों से लगातार संपर्क साधा जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि, हर भारतीय नागरिक की जान और माल की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
भारत सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए एक हाई-टेक वार रूम तैयार किया है। शिपिंग महानिदेशालय का 24×7 कम्युनिकेशन सेंटर दिन-रात काम कर रहा है। आंकड़ों की मानें तो पिछले 24 घंटों में इस सेंटर ने रिकॉर्ड काम किया है। इस दौरान सेंटर को 98 कॉल और 335 ईमेल प्राप्त हुए, जिनमें सुरक्षा चिंताओं से लेकर रूट डायवर्जन तक के सवाल शामिल थे।
इस सेंटर की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर ईमेल और कॉल का जवाब औसतन कुछ ही मिनटों में दिया गया। यह सक्रियता दर्शाती है कि भारत केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर भी मिडिल ईस्ट संकट से निपटने के लिए तैयार है। सरकार ने जहाजों के कप्तानों को विशेष निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम को दें।
कूटनीतिक बिसात बिछा रहा विदेश मंत्रालय
एक तरफ जहां नौसेना समंदर में मोर्चा संभाले हुए है, वहीं दूसरी तरफ विदेश मंत्रालय वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक बिसात बिछा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ किया है कि, भारत पश्चिम एशिया के बदलते हालातों पर पैनी नजर बनाए हुए है। भारत लगातार अमेरिका, ईरान और अन्य खाड़ी देशों के साथ संपर्क में है ताकि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
विदेश सचिव ने यह भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की कि हाल ही में एलपीजी लेकर आ रहे चार भारतीय जहाज सफलतापूर्वक इस तनावपूर्ण मार्ग को पार कर चुके हैं। इन जहाजों का सुरक्षित आना इस बात का संकेत है कि भारत ने अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए ‘बैक चैनल’ कूटनीति का भी बखूबी इस्तेमाल किया है।
इस घटनाक्रम का सबसे सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ने के बाद यह डर सता रहा था कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया, तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे। लेकिन जिस तरह से भारतीय जहाज लगातार तेल लेकर पहुंच रहे हैं, उससे भंडार बनाए रखने में मदद मिल रही है।
समंदर में भी मजबूती दिखा रहा भारत
आने वाले दिनों में कई और जहाजों के इसी रास्ते से भारत आने की संभावना है। पेट्रोलियम मंत्रालय भी वैकल्पिक मार्गों और अन्य देशों से तेल आयात की संभावनाओं को तलाश रहा है, लेकिन होर्मुज से जहाजों का सुरक्षित निकलना भारत की वर्तमान ऊर्जा जरूरतों के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित हो रहा है।
आज का भारत केवल जमीन पर ही नहीं, बल्कि समंदर में भी एक नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर के रूप में उभरा है। मिडिल ईस्ट की जंग के बीच भारतीय नौसेना का यह पराक्रम और सरकार की सतर्कता दुनिया को एक कड़ा संदेश दे रही है। भारत ने यह साबित कर दिया है कि भू-राजनीतिक तनाव चाहे कितना भी गहरा हो, वह अपने राष्ट्रीय हितों और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। होर्मुज से गुजर रहे ये तेल के जहाज केवल ईंधन नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक हैं।
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