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राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर इंदौर में तेज हुआ सियासी घमासान

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मूल रूप से इस बड़े आयोजन को शहर के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कराने की योजना बनाई गई थी, लेकिन प्रशासन की ओर से अनुमति न मिलने के कारण कांग्रेस को अंतिम समय में अपना कार्यक्रम स्थल बदलना पड़ा। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में जुटे हैं।

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नया मैदान किराए पर, नाम भी बदला

अनुमति न मिलने से नाराज कांग्रेस ने आखिरकार इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) से एक वैकल्पिक भूखंड का अस्थायी पट्टा लेने का फैसला किया। पार्टी ने रीजनल पार्क के सामने स्थित करीब 12,000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की जमीन इस आयोजन के लिए किराए पर ली है। इसके लिए कांग्रेस ने आईडीए के खाते में 10 लाख 8 हजार रुपये की राशि अग्रिम भुगतान के रूप में जमा कराई है।

Rahul Gandhi Indore

पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस नए वेन्यू को एक नया और भावनात्मक नाम दिया है ‘भारत जोड़ो मैदान’। स्थल परिवर्तन के चलते कार्यक्रम की तारीख में भी बदलाव करना पड़ा है और अब यह आयोजन 19 सितंबर को होना तय हुआ है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि इस कार्यक्रम में करीब डेढ़ लाख छात्रों ने अपना पंजीकरण करवाया है, जो इसे प्रदेश के अब तक के सबसे बड़े छात्र-केंद्रित आयोजनों में से एक बना सकता है।

कांग्रेस का आरोप  

इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने इस पूरे प्रकरण को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि, सत्तारूढ़ भाजपा सरकार राहुल गांधी के इंदौर दौरे और उनके बढ़ते जनसमर्थन से भयभीत है। इसी वजह से जानबूझकर स्टेडियम की अनुमति देने में देरी की गई या उसे रोका गया।

कांग्रेस का यह भी कहना है कि, यह पूरी कार्रवाई पार्टी के कार्यक्रम को कमजोर करने और युवाओं तक इसका संदेश पहुंचने से रोकने के उद्देश्य से की गई है। पार्टी के अनुसार, प्रशासनिक अड़ंगे के बावजूद कार्यकर्ताओं ने बिना समय गंवाए वैकल्पिक व्यवस्था कर पूरे आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया है।

 कोर्ट के आदेश का हवाला

विवाद बढ़ने के बाद इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने सार्वजनिक रूप से इस मामले में सफाई दी। उन्होंने बताया कि, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के इस्तेमाल को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का एक पुराना आदेश पहले से लागू है, जिसके अनुसार इस स्टेडियम का उपयोग केवल खेल गतिविधियों या राज्य स्तर के आधिकारिक सरकारी आयोजनों के लिए ही किया जा सकता है।

मेयर के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल के कार्यक्रम के लिए इस स्टेडियम को आवंटित करना सीधे तौर पर अदालत के आदेश और नियमों का उल्लंघन होगा। यही तकनीकी और कानूनी अड़चन इस पूरे विवाद की जड़ बताई जा रही है, जिसके चलते कांग्रेस को अंतिम क्षणों में अपना वेन्यू बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

भाजपा बोली- पब्लिसिटी स्टंट

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भाजपा के प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी आलोक दुबे ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पूरा मामला महज एक सुनियोजित प्रचार अभियान है और इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने कार्यक्रम का नाम ‘छात्रों की गूंज’ की बजाय ‘झूठ की गूंज’ रखना चाहिए, क्योंकि जनता अब कांग्रेस की राजनीतिक चालों को बखूबी समझ चुकी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि, पार्टी केवल विवाद खड़ा कर अपने आयोजन को सुर्खियों में लाने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

इस पूरे विवाद पर भाजपा महासचिव गजेंद्र पटेल ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि, कांग्रेस डर के माहौल में काम कर रही है और जनता को दिग्भ्रमित करने के लिए इस तरह के आरोप गढ़ रही है। पटेल के अनुसार, प्रशासनिक नियमों और अदालती आदेशों का पालन करना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि किसी राजनीतिक दल को खुश करना।

क्या है ‘छात्रों की गूंज’ अभियान

गौरतलब है कि, ‘छात्रों की गूंज’ राहुल गांधी की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसे उन्होंने देशभर के युवाओं और छात्रों से सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू किया था।

Jawaharlal Nehru Stadium INDORE

इस मंच के जरिए राहुल गांधी पेपर लीक की घटनाओं, उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत, सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और देश में बेरोजगारी की गंभीर समस्या जैसे मुद्दों पर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों को सीधे कठघरे में खड़ा करते रहे हैं। इससे पहले यह अभियान कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे जैसे शहरों में सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है, जहां बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं ने इसमें हिस्सा लिया था।

मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए बड़ा मोड़

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, इंदौर में होने वाला यह आयोजन मध्य प्रदेश की मौजूदा राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। एक ओर जहां कांग्रेस इसे युवाओं और छात्रों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है, वहीं भाजपा इसे महज एक चुनावी शिगूफा बताकर खारिज करने में जुटी है।

स्टेडियम को लेकर उपजा यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब कार्यक्रम की तारीख नजदीक आती जाएगी और दोनों ही पार्टियां जनता के बीच अपनी-अपनी बात मनवाने की कोशिश तेज करेंगी। फिलहाल सभी की निगाहें 19 सितंबर को होने वाले इस बड़े आयोजन पर टिकी हुई हैं, जो ‘भारत जोड़ो मैदान’ के नए नाम से चर्चा में है।

 

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