
दतिया/भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों दतिया विधानसभा सीट को लेकर हलचल मची हुई है। इस सीट पर उपचुनाव होने वाले हैं। भाजपा ने जैसे ही प्रत्याशी की घोषणा की, पार्टी में भूचाल आ गया, जिसका असर राज्य की शांति व्यवस्था पर पड़ा। पार्टी की सूची में पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का नाम शामिल नहीं था, जो उनके समर्थकों को नागवार गुजरी। जैसे ही टिकट कटने की खबर उनके समर्थकों को मिली वे सड़क पर उतर आये और हंगामा करने लगे। इस हंगामे ने धीरे-धीरे उग्र रूप ले लिया।
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समर्थकों ने जाम किया ग्वालियर-झांसी हाईवे
घटनाक्रम की शुरुआत रात के समय हुई, जब गुस्साए कार्यकर्ताओं ने ग्वालियर-झांसी हाईवे पर जाम लगा दिया, जिससे यातायात बाधित हो गया। यह जाम कोई छोटी-मोटी घटना नहीं थी। इस इस हंगामे की वजह से 11 से 12 घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा।

इस दौरान स्थानीय पुलिस प्रशासन ने बार-बार प्रदर्शनकारियों को समझाने और रास्ता खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ किसी भी सूरत में पीछे हटने को तैयार नहीं थी। तनाव उस वक्त और ज्यादा बढ़ गया जब प्रदर्शन के दौरान पथराव शुरू हो गया, जिसकी चपेट में तीन पुलिस कर्मी भी आ गये और घायल हो गये।
जब हालात पूरी तरह बेकाबू होने लगे, तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और भीड़ को तितर-बितर किया। इसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्थिति को नियंत्रण में लेने का प्रयास किया। धीरे-धीरे मामला थोड़ा शांत हुआ। हालांकि, इलाके में अभी भी तनाव बरकरार है।
नरोत्तम मिश्रा ने दी प्रतिक्रिया
इतने बड़े हंगामे और हिंसक झड़पों के बीच अब तक चुप्पी साधे बैठे नरोत्तम मिश्रा ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि, पार्टी जो भी निर्णय लेती है, कार्यकर्ताओं को उसका सम्मान करना चाहिए। उनका कहना था कि, टिकट वितरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी संगठन के भीतर पूरी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद ही कोई फैसला लिया जाता है, इसलिए इसे व्यक्तिगत नाराजगी की तरह नहीं बल्कि संगठनात्मक प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए।
मिश्रा ने यह भी खुलासा किया कि, उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो देखे हैं, जिनमें कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर पेट्रोल और केरोसीन डालते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस बात को लेकर उन्होंने गंभीर चिंता जताई और अपने समर्थकों तथा कार्यकर्ताओं से सख्त लहजे में अपील की कि, इस तरह की खतरनाक और जानलेवा गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि, यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि वे पहले भी इसी तरह की अपील कर चुके हैं और आज एक बार फिर उसी बात को दोहरा रहे हैं।
सड़क पर उतर कर हंगामा न करें
नरोत्तम मिश्रा ने अपने बयान में यह भी रेखांकित किया कि, पार्टी के भीतर अपनी असहमति या नाराजगी जाहिर करने के लिए एक उचित, अनुशासित और संवैधानिक रास्ता मौजूद है। उनके अनुसार, सड़कों पर उतरकर हंगामा करना, यातायात बाधित करना या तोड़फोड़ जैसी गतिविधियों में शामिल होना विरोध प्रकट करने का सही या स्वीकार्य तरीका नहीं है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि ऐसा कोई भी कदम न उठाया जाए जिससे हालात और बिगड़ें या फिर आम जनता को अनावश्यक परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़े। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि संयम बनाए रखना ही इस समय सबसे जरूरी है।
भोपाल में भी घेराव की तैयारी
इसी बीच खबर आ रही है कि, विरोध की आग सिर्फ दतिया और ग्वालियर तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब यह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंचने वाली है। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि, नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का एक बड़ा समूह भाजपा के प्रदेश मुख्यालय का घेराव करने की योजना बना रहा है। यह प्रस्तावित प्रदर्शन आने वाले दिनों में राज्य की सियासत को और गरमा सकता है। फ़िलहाल इस प्रदर्शन क लेकर प्रशासन और पार्टी संगठन दोनों ही सतर्क हैं।

दिलचस्प बात यह है कि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच खुद नरोत्तम मिश्रा शुक्रवार देर रात दिल्ली रवाना हो चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि, वे इस दौरे में अपनी स्थिति और आगे की भूमिका को लेकर पार्टी हाईकमान से बातचीत कर सकते हैं।
कई इलाकों में माहौल तनावपूर्ण
फिलहाल, दतिया और आसपास के इलाकों में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन पूरी तरह चौकस है। हालांकि, नरोत्तम मिश्रा ने खुद शांति और संयम की अपील की है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके समर्थकों में गुस्सा और नाराजगी अभी भी उतनी कम होती नहीं दिख रही जितनी उम्मीद की जा रही थी। ऐसे में भोपाल में प्रस्तावित घेराव कार्यक्रम को लेकर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस बढ़ते असंतोष और अंदरूनी नाराजगी को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है। सवाल यह भी है कि, क्या पार्टी नरोत्तम मिश्रा को किसी अन्य महत्वपूर्ण पद, संगठनात्मक भूमिका या मंच पर समायोजित करेगी, ताकि उनके समर्थकों की नाराजगी दूर हो सके और पार्टी की एकजुटता बनी रहे। दतिया उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं रह गया, बल्कि यह भाजपा के भीतर आंतरिक संतुलन और नेतृत्व की परीक्षा का भी मामला बन गया है।
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