
संसद परिसर में हुई बैठक के बाद सड़क पर उतरे थे दोनों नेता
नई दिल्ली। 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद से दिल्ली का माहौल गरमाया हुआ है। पहले छात्र आंदोलन, फिर किसानों का दिल्ली कूच और कल यानी मंगलवार की शाम देश की राजनीति में एक और अहम घटनाक्रम देखने को मिला, जब समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के शीर्ष नेता एक साथ सड़कों पर उतरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के पास जोरदार प्रदर्शन किया।
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ये प्रदर्शन इतना जबरदस्त था कि, पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और मौके पर मौजूद नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया। अब खबर आ रही है कि, घटनाक्रम से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा मुखिया अखिलेश यादव के बी एक बंद कमरे में एक बैठक हुई थी। इस खबर ने अब राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
पुलिस ने की कार्रवाई, कई नेता हिरासत में
जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि, पुलिस मौजूद सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर संबंधित थाने ले गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को कई घंटों तक थाने में बैठाए रखा गया, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को उनके समर्थकों के साथ छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया था।
प्रदर्शन से पहले हुई अहम मुलाकात
इस पूरे प्रदर्शन से ठीक पहले एक ऐसी बैठक हुई, जिसने राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजरें अपनी ओर खींच लीं। अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच करीब एक घंटे तक चली यह मुलाकात संसद परिसर में राहुल गांधी के कार्यालय में हुई। हालांकि, इस बैठक में वास्तव में किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसका खुलासा अभी तक नहीं किया गया है।

इस गोपनीय मुलाकात ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर चर्चा की अटकलों को भी हवा दे दी है। यह याद दिलाना जरूरी है कि, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ा था और उस गठबंधन को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अक्सर चर्चा करते रहे हैं। ऐसे में यह नई मुलाकात एक बार फिर दोनों दलों के बीच भविष्य के गठबंधन को लेकर कयासों को बल दे रही है।
संसद स्थगित होने के बाद हुई बैठक
यह मुलाकात एक ऐसे समय पर हुई जब संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही उस दिन के लिए स्थगित कर दी गई थी। दरअसल पेपर लीक के मुद्दे और राम मंदिर के चंदे में कथित चोरी को लेकर विपक्षी दलों ने भारी हंगामा किया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही आगे नहीं चल सकी और उसे दिनभर के लिए स्थगित करना पड़ा। कार्यवाही स्थगित होने के तुरंत बाद ही अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच यह अहम बैठक हुई।
बैठक के बाद दोनों नेता एक साथ सड़क पर उतरे और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन में शामिल हुए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, इस घटनाक्रम से यह साफ संकेत मिलता है कि, दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच फिलहाल अच्छा तालमेल बना हुआ है। दोनों पार्टियां मौजूदा राजनीतिक मुद्दों पर एक साथ खड़ी नजर आ रही हैं।
जंतर-मंतर भी पहुंचे सपा सांसद
संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद समाजवादी पार्टी के कुछ सांसद डिंपल यादव के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर पहुंच गए। वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव अपने बाकी साथी सांसदों के साथ राहुल गांधी से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। यानी सपा के नेतृत्व ने इस मौके पर दो अलग-अलग मोर्चों पर अपनी सक्रियता दिखाई, एक तरफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और दूसरी तरफ कांग्रेस नेतृत्व के साथ सीधी बातचीत।
लाठीचार्ज के बाद सक्रिय हुई कांग्रेस
सूत्रों के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि, जैसे ही संसद मार्च के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज होने और कई छात्रों के घायल होने की खबर सामने आईं, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तुरंत सक्रिय हो गए। बताया जा रहा है कि प्रियंका गांधी ने इस दौरान कई छात्र नेताओं और प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क साधा। इससे यह संकेत मिलता है कि, कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बेहद सक्रिय भूमिका निभाता नजर आया।
बड़ी राजनीतिक रणनीति के संकेत
इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक नजरिए से देखा जाए, तो यह साफ है कि, पीएम आवास के बाहर हुआ यह प्रदर्शन सिर्फ एक सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक रणनीति भी छिपी हो सकती है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच हुई बंद कमरे की बैठक ने यह संकेत जरूर दिया है कि आने वाले समय में दोनों पार्टियां एक बार फिर साथ मिलकर उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन पर उतर सकती हैं।

हालांकि, जब तक इस बैठक में हुई बातचीत का आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आता, तब तक इसे लेकर सिर्फ अटकलें ही लगाई जा सकती हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या यह मुलाकात सिर्फ मौजूदा संसदीय मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने तक सीमित थी या फिर इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सीट शेयरिंग को लेकर कोई ठोस बातचीत भी हुई। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के नेताओं की ओर से और स्पष्टीकरण आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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