
नई दिल्ली। केंद्र सरकार हवाई यात्रा को और सुगम बनाने की दिशा में सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। घरेलू यात्रियों को मिलने वाली डिजी यात्रा की सुविधा को अब जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया जायेगा। नागर विमानन मंत्रालय इस दिशा में संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर तेजी से काम कर रहा है, ताकि विदेश जाने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट पर लगने वाली लंबी कतारों और थकाऊ जांच प्रक्रियाओं से निजात मिल सके। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, इस महत्वाकांक्षी योजना का ट्रायल देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर किया जा सकता है।
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क्या है योजना का मकसद
गौरतलब है कि, बीते कुछ वर्षों से एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसकी वजह से एंट्री गेट से लेकर सिक्योरिटी चेक और बोर्डिंग तक हर जगह भीड़भाड़ लगी रहती है, जिससे यात्रियों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है।

इसी समस्या से निजात दिलाने के लिए नागर विमानन मंत्रालय पहले ही घरेलू उड़ानों के लिए डिजी यात्रा सुविधा शुरू कर चुका है, जिसमें चेहरे की पहचान यानी फेशियल रिकग्निशन तकनीक के जरिए यात्री बिना बार-बार दस्तावेज दिखाए एयरपोर्ट की विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजर पाते हैं। अब सरकार इसी तकनीक को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों तक पहुंचाने की तैयारी में है, ताकि विदेश जाने वाले यात्रियों का अनुभव भी उतना ही सहज और तेज़ बनाया जा सके।
कैसे करेगी काम यह व्यवस्था
अधिकारियों का कहना है कि, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए भी डिजी यात्रा की प्रक्रिया घरेलू यात्रियों जैसी ही रहेगी। इसके लिए यात्रियों को पहले सिस्टम में अपनी फोटो और अन्य जरूरी जानकारियां अपलोड करनी होंगी। इसके साथ ही आधार कार्ड के जरिए बायोमीट्रिक डेटा भी अंकित कराना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही यात्री को डिजी यात्रा की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
नहीं दिखाने पड़ेंगे दस्तावेज
इसके बाद जब यात्री एयरपोर्ट पहुंचेगा, तो उसे किसी काउंटर पर रुककर दस्तावेज़ दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एंट्री गेट पर लगी विशेष मशीन यात्री के चेहरे को स्कैन करेगी और पहचान की पुष्टि होते ही उसे आगे बढ़ने की अनुमति मिल जाएगी। इसके बाद यात्री सीधे सिक्योरिटी चेक की प्रक्रिया से गुजरते हुए बोर्डिंग गेट तक पहुंच सकेगा, वह भी बिना बार-बार बोर्डिंग पास या पहचान पत्र दिखाए।
गौरतलब है कि, इस सुविधा की शुरुआत सबसे पहले उन यात्रियों के लिए की जाएगी, जिनके पास ई-पासपोर्ट उपलब्ध होगा। दरअसल ई-पासपोर्ट में एक माइक्रोचिप लगी होती है, जिसमें यात्री की बायोमीट्रिक और अन्य पहचान संबंधी जानकारियां डिजिटल रूप में सुरक्षित रहती हैं। इससे चेहरे की पहचान और डेटा सत्यापन की प्रक्रिया और भी तेज़ व सटीक हो जाती है। यही वजह है कि, सरकार ने ट्रायल के लिए इसी वर्ग के यात्रियों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
यात्रियों को क्या होगा फायदा
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि, यात्रियों को एयरपोर्ट में प्रवेश करते समय और सुरक्षा जांच के दौरान बार-बार अपना बोर्डिंग पास और पासपोर्ट निकालकर दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि एयरपोर्ट पर लगने वाली भीड़ और कतारों में भी भारी कमी आएगी। खासतौर पर व्यस्त समय में, जब कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें एक साथ रवाना होती हैं, यह तकनीक यात्रियों के लिए काफी राहत भरी साबित हो सकती है।
हालांकि, अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि, डिजी यात्रा सुविधा केवल एंट्री और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया को आसान बनाएगी। इमिग्रेशन जांच की प्रक्रिया में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और यह पहले की तरह ही जारी रहेगी। यानी यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर सामान्य प्रक्रिया से गुजरना होगा, लेकिन बाकी चरणों में उन्हें डिजिटल पहचान का लाभ मिलेगा।
कब और कहां से होगी शुरुआत
सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजी यात्रा सुविधा का ट्रायल इस वर्ष अक्टूबर से दिसंबर के बीच शुरू हो सकता है। शुरुआती चरण में इसे दिल्ली और मुंबई के अलावा बेंगलुरु, हैदराबाद और कोच्चि जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी लागू किया जा सकता है। इन पांचों एयरपोर्ट को देश के सबसे व्यस्त और बड़े हवाई अड्डों में गिना जाता है, जहां हर दिन हजारों यात्री अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए आवाजाही करते हैं। ऐसे में ट्रायल के लिए इन एयरपोर्ट को चुना जाना स्वाभाविक माना जा रहा है, क्योंकि यहां इस तकनीक की उपयोगिता और असर का सही आकलन किया जा सकेगा।
घरेलू स्तर पर अभी भी अधूरा है विस्तार
गौरतलब है कि, घरेलू यात्रियों के लिए डिजी यात्रा सुविधा पहले ही शुरू की जा चुकी है और कई प्रमुख एयरपोर्ट पर यह सफलतापूर्वक काम भी कर रही है। इसके बावजूद यह सुविधा अभी देश के सभी एयरपोर्ट तक अपना विस्तार नहीं कर पाई है। कई छोटे और मध्यम आकार के एयरपोर्ट पर अभी भी यात्रियों को पारंपरिक तरीके से ही दस्तावेजी जांच से गुजरना पड़ता है। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि जब घरेलू स्तर पर ही यह योजना पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका विस्तार किस रफ्तार से और कितनी सफलता के साथ हो पाएगा।

फिर भी विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि, तकनीक आधारित इस पहल से भारत के एयरपोर्ट को वैश्विक मानकों के अनुरूप और आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी। दुनिया के कई विकसित देशों में पहले से ही इस तरह की बायोमीट्रिक आधारित प्रणालियां सफलतापूर्वक काम कर रही हैं, जिनसे यात्रियों का अनुभव काफी बेहतर हुआ है। भारत में भी अगर यह व्यवस्था सुचारू रूप से लागू होती है, तो इससे न केवल यात्रियों को सहूलियत मिलेगी, बल्कि एयरपोर्ट संचालन में भी दक्षता बढ़ेगी।
तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा मंत्रालय
नागर विमानन मंत्रालय इस योजना को अंतिम रूप देने में जुटा है और संबंधित एजेंसियों के साथ तकनीकी व सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। डेटा सुरक्षा और गोपनीयता जैसे मुद्दे भी इस योजना के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाएंगे, क्योंकि बायोमीट्रिक और व्यक्तिगत जानकारी से जुड़े मामलों में यात्रियों का भरोसा बनाए रखना जरूरी होगा।
आने वाले महीनों में जैसे-जैसे ट्रायल की तारीख नजदीक आएगी। इस योजना की और अधिक जानकारियां सार्वजनिक होने की उम्मीद है। यदि यह ट्रायल सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश के अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है, जिससे करोड़ों अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
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