UP News: ‘काम हो गया है…पैसे ले लो’, एक मैसेज से हुआ बार अध्यक्ष हत्याकांड का खुलासा

UP News: उत्तर प्रदेश के उरई जिले में कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस ने एक के बाद एक कई बड़े खुलासे किए हैं। इस हत्याकांड का पर्दाफाश करने में मुख्य आरोपी मोनू यादव तक पहुंचने की कड़ी उसके पिता अजय कुमार के एक मोबाइल मैसेज से जुड़ी, जिसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। हत्या की इस पूरी साजिश के पीछे 10 लाख रुपये की सुपारी, पैसों के लेन-देन और गहरी रंजिश का खुलासा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, उरई के कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या के बाद आरोपियों ने उनके शव को कानपुर के गुजैनी थाना क्षेत्र में लाकर फेंक दिया था। घटना के बाद से ही पुलिस अधिवक्ता गयादीन की तलाश में जुटी हुई थी। इसी दौरान उनके पुत्र ने पुलिस को अहम जानकारी दी कि उनके पिता का कानपुर निवासी इंद्रजीत यादव से लंबे समय से विवाद चल रहा था। इस सुराग के आधार पर पुलिस ने फौरन हरकत में आते हुए इंद्रजीत यादव को हिरासत में ले लिया।

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मोबाइल पर मिले संदेश से खुली साजिश की परतें

पुलिस हिरासत में जब इंद्रजीत से पूछताछ की गई, तो वह शराब के नशे में था और शुरुआती दो घंटों तक पुलिस को कोई ठोस जानकारी नहीं दे सका। इसके बाद जब पुलिस ने उसके मोबाइल फोन की जांच की, तो उसमें मोनू यादव के पिता अजय कुमार यादव का एक मैसेज मिला। इस मैसेज में साफ लिखा था कि “काम पूरा हो गया है, अब पूरे पैसे मंगा लो।” इस संदेश के सामने आते ही पुलिस समझ गई कि हत्या के पीछे कोई गहरी सुनियोजित साजिश और आर्थिक लेनदेन जुड़ा हुआ है। इस खुलासे के बाद पुलिस ने कानपुर में दबिश देकर तीन आरोपियों को तुरंत दबोच लिया।

Urai Murder Case

‘काम कर देगा तो जिंदगी बदल देंगे’ का हुआ था सौदा

पुलिस जांच में सामने आया है कि गयादीन अहिरवार की हत्या के लिए पहले ही दस लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। हत्याकांड में गिरफ्तार मुख्य आरोपी मोनू यादव ने वारदात को अंजाम देने के बाद अपने पिता अजय कुमार यादव को फोन कर कहा था कि “पापा, काम हो गया है, पूरे पैसे मंगा लो।” इसके बाद पिता अजय ने कानपुर के ठेकेदार इंद्रजीत यादव को मैसेज भेजा था।

बताया जा रहा है कि इंद्रजीत ने मोनू के पिता से कहा था कि अगर उनका बेटा यह काम कर देगा, तो वे उसकी जिंदगी बदल देंगे। इसी झूठे भरोसे और दस लाख रुपये की सुपारी के लालच में इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि यह रकम किसने तय की थी, कितना भुगतान हुआ और इसमें किस-किस की क्या भूमिका रही।

पुलिस मुठभेड़ में दबोचा गया मुख्य आरोपी मोनू

हत्याकांड के मुख्य आरोपी मोनू यादव की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह फरार हो गया था। मंगलवार देर रात करीब ढाई बजे पुलिस ने उसे घेर लिया। खुद को घिरता देख मोनू ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके जवाब में पुलिस की गोली उसके दोनों पैरों में जा लगी। घायल अवस्था में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया।

अस्पताल के बेड पर दर्द से कराहते हुए मोनू ने पुलिसकर्मियों से कहा, “बहुत दर्द हो रहा है, इंजेक्शन लगवा दो।” गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे हत्या की पूरी साजिश और पैसों के लेनदेन को लेकर पूछताछ कर रही है।

Urai Murder Case

मध्यस्थता कराने वाला अजय अभी भी फरार

इस पूरे सुपारी कांड और सौदेबाजी में मध्यस्थता की भूमिका निभाने वाला अजय यादव (मुख्य आरोपी मोनू का पिता) अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस का कहना है कि अजय ने ही ठेकेदार इंद्रजीत यादव और सुपारी किलर्स के बीच तालमेल बैठाया था। सीओ राजेश कमल के मुताबिक, उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अन्य संदिग्धों और कार के मालिक की तलाश जारी

पुलिस की जांच केवल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं है। विवेचक द्वारा पकड़े गए आरोपियों के संपर्क में रहने वाले अन्य लोगों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाली जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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इसके साथ ही, इस सनसनीखेज अपहरण और हत्या में इस्तेमाल की गई कार को लेकर भी अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि घटना के वक्त कार केशव कटियार चला रहा था, लेकिन वाहन असल में किसके नाम पर पंजीकृत है और उसके मालिक की इस साजिश में क्या भूमिका थी, पुलिस इन तमाम पहलुओं की गहराई से छानबीन कर रही है।

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