
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर शीर्ष अदालत ने कोई राहत नहीं दी। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ किया कि, मामले की सुनवाई अब उच्च न्यायालय में ही होगी।
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जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में रामपुर जेल से रिहा होते ही आजम खान को ईडी ने हिरासत में ले लिया था। इस गिरफ्तारी के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की।
हाईकोर्ट को 16 नवंबर को सुनवाई का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि, वह इस मामले की सुनवाई 16 नवंबर को करे। शीर्ष अदालत ने अपनी रजिस्ट्री को आदेश दिया कि मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेज दिए जाएं, ताकि सुनवाई में किसी तरह की देरी न हो। सुनवाई के दौरान आजम खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि, आजम खान के खिलाफ कुल 28 मामले दर्ज हैं, जिनमें एक मनी लॉन्ड्रिंग का भी है। सिब्बल ने इसे सरासर उत्पीड़न करार दिया।
सिब्बल ने दी उम्र की दलील
कपिल सिब्बल ने अदालत में तर्क दिया कि, वर्ष 2006 की एक कथित घटना के लिए वर्ष 2019 में एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि, आजम खान अब सत्ता में भी नहीं हैं, तो इतने वर्षों बाद किसी के खिलाफ मुकदमा कैसे दर्ज किया जा सकता है।

सिब्बल ने आजम खान की बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए कहा कि, वे 80 वर्ष के हैं और उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि, अगर हालात ऐसे ही रहे तो आजम खान की मृत्यु जेल में ही हो जाएगी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय पर उम्र को आधार बनाने वाली इस दलील का कोई असर नहीं पड़ा।
किसानों से जबरन जमीन लेने का आरोप
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आजम खान पर आरोप है कि उन्होंने विश्वविद्यालय के लिए किसानों से जबरन जमीन ली थी। अदालत ने सिब्बल की इस टिप्पणी को स्वीकार किया कि घटना 2006 की है और एफआईआर 2019 में दर्ज हुई, लेकिन साथ ही कहा कि इस पर यह तर्क भी दिया जा सकता है कि संभवतः आजम खान के प्रभाव के कारण ही शिकायत दर्ज होने में इतना समय लगा।
इस पर सिब्बल ने फिर दोहराया कि उस समय आजम खान सत्ता में नहीं थे। बावजूद इसके, पीठ ने मामले की मेरिट पर सुनवाई करने के बजाय उसे हाईकोर्ट भेजना उचित समझा।
डासना जेल में बंद हैं आजम
मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किए गए आजम खान को गाजियाबाद की विशेष अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इसके बाद उन्हें डासना जेल ले जाया गया, जहां वे फिलहाल बंद हैं।
इसी बीच मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा, जहां आजम खान की जमानत संबंधी याचिका पर भी सुनवाई से इनकार कर दिया गया। अदालत ने पूरे प्रकरण को इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास भेज दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि इस मामले को 16 नवंबर को एक खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
हाईकोर्ट पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद आजम खान और उनके समर्थकों की निगाहें अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पर टिक गई हैं। 16 नवंबर को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि ईडी की गिरफ्तारी को लेकर आजम खान को कोई राहत मिलती है या नहीं। जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ा यह मामला लंबे समय से सुर्खियों में रहा है और इसमें आए दिन नए मोड़ सामने आ रहे हैं।
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