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आज़म खान के ठिकानों पर छापेमारी, भड़के अखिलेश यादव- लगाया ये बड़ा आरोप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान के ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश की योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया कि, सरकार महज़ अपने मुट्ठीभर, यानी 1 से 2 फीसदी समर्थकों को खुश करने के लिए इस तरह के कदम उठा रही है।

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सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

अखिलेश यादव ने एक्स पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट लिख कर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। उन्होंने लिखा कि, जो लोग शिक्षा, शिक्षकों और छात्रों के हितों के खिलाफ काम करते रहे हैं, जिन्होंने स्कूल बंद कराए और जिनके साथी निजी विश्वविद्यालय खड़े करने में जुटे रहे हैं, उन्हीं के इशारे पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अखिलेश का ये भी आरोप है कि, इस पूरी कवायद का मकसद सिर्फ पार्टी के बचे-खुचे उन 1-2 प्रतिशत समर्थकों को संतुष्ट करना है, जो संकीर्ण और सांप्रदायिक सोच रखते हैं, जबकि असल भ्रष्टाचार में लिप्त और गंभीर अपराधों में शामिल लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई होती नज़र नहीं आ रही।

Akhilesh Azam Khan

अपनी पोस्ट में सपा प्रमुख ने कई और मुद्दों का भी ज़िक्र किया। इनमें राम मंदिर निर्माण से जुड़े कथित चोरी के मामले, सत्ता के संरक्षण में पल-बढ़ रहे अपराधियों का मुद्दा, कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी जैसे संगीन आरोप और भ्रष्टाचार से जुड़े कई पुराने मामले शामिल हैं। अखिलेश ने इन सबको एक साथ जोड़ते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार चुनिंदा तरीके से सिर्फ विपक्षी नेताओं और उनसे जुड़े लोगों को निशाना बना रही है।

सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी उठाए सवाल

सपा मुखिया ने सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि, बीजेपी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे तक बदहाल हालत में पहुंच गए हैं। उनके मुताबिक, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की हालत खराब हो चुकी है, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सफर के दौरान हिचकोले खाने पड़ते हैं, जबकि कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे जगह-जगह गड्ढों से भरा नज़र आता है।

इसके अलावा कन्नौज से सांसद अखिलेश ने राज्य के ग्रीन कॉरिडोर में दरारें पड़ने, सड़कों पर खटपट की आवाज़ आने, पुलों के धीरे-धीरे गिरने, पानी की टंकियों के ढहने, इमारतों की छतों से पानी टपकने और रेलवे स्टेशन की दीवार गिरने जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार की निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि ये सारी घटनाएं सरकार के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच के फासले को उजागर करती हैं।

पुलिस महकमे की साख पर सवाल

अखिलेश यादव ने अपने आरोपों की फेहरिस्त में बीजेपी शासित राज्यों से जुड़े पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार के मामलों को भी शामिल किया। उनके अनुसार, इन राज्यों के कई पुलिसकर्मी दूसरे राज्यों में भी भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े जा चुके हैं, जो कानून-व्यवस्था और पुलिस महकमे की साख पर सवाल खड़ा करता है।

Akhilesh Azam Khan

इसके साथ ही सपा प्रमुख ने हाल में आयोजित महाकुंभ का ज़िक्र करते हुए वहां कथित तौर पर एक लाख रुपये की आर्थिक गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने स्मार्ट सिटी योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर हुए कथित भ्रष्टाचार पर भी निशाना साधा। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी के कई जनप्रतिनिधियों ने ऐसी ज़मीनों पर अवैध निर्माण करा लिया है जिनकी अनुमति ही नहीं थी।

सात हज़ार करोड़ के कथित घोटाले का दावा

अखिलेश यादव ने अपने बयान में एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार दुर्व्यवहार और विवादास्पद बयानों जैसे मुद्दों को प्रचार की चमक-दमक के पीछे छिपाकर लगभग सात हज़ार करोड़ रुपये के कथित बंटवारे का खेल खेल रही है। हालांकि उन्होंने इस दावे के समर्थन में विस्तृत आंकड़े या दस्तावेज़ी सबूत सार्वजनिक तौर पर पेश नहीं किए, लेकिन इस पोस्ट के ज़रिए उन्होंने साफ संकेत दिया कि आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठा सकती है।

सियासी हलकों में हलचल

अखिलेश यादव की इस प्रतिक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर गर्मी आ गई है। आज़म खान की गिनती पार्टी के सीनियर  नेताओं में होती है। ऐसे में ताज़ा छापेमारी और उसके बाद अखिलेश यादव की तीखी प्रतिक्रिया को आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों से जोड़कर देखा जा रहा है।

विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष इन आरोपों को खारिज करता रहा है और कार्रवाई को कानून के दायरे में उठाया गया कदम बताता है। इस पूरे प्रकरण पर अभी तक बीजेपी या संबंधित जांच एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर आने वाले दिनों में और बयानबाज़ी तथा राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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