
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी भी अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ अब युवा पीढ़ी यानी Gen-Z को भी अपने साथ जोड़ने की कवायद में जुट गई है। पार्टी इसके लिए न सिर्फ जमीनी स्तर पर ‘Gen-Z संवाद’ कार्यक्रम आयोजित कर रही है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर युवाओं के बीच अपनी पहुंच बना रही है।
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अखिलेश यादव खुद कर रहे नेतृत्व
पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव खुद इस डिजिटल रणनीति का नेतृत्व करते नजर आ रहे हैं। उनके निजी सोशल मीडिया अकाउंट्स के साथ-साथ पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर लगातार एआई जेनरेटेड वीडियो और आकर्षक ग्राफिक्स साझा किए जा रहे हैं। इन वीडियो और ग्राफिक्स के जरिए पार्टी अपने संदेशों को नए और आकर्षक अंदाज में जनता, खासकर युवा वर्ग तक पहुंचा रही है।
युवाओं तक सीधी पहुंच बना रहा AI
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, आज के दौर में सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा वर्ग की पसंद पारंपरिक राजनीतिक भाषणों, बड़ी-बड़ी रैलियों और पोस्टर-बैनर से हटकर छोटे, प्रभावी और रचनात्मक वीडियो कंटेंट की ओर तेजी से बढ़ी है। युवा पीढ़ी अब लंबे-चौड़े भाषण सुनने के बजाय कुछ सेकंड के दिलचस्प और आकर्षक वीडियो देखना ज्यादा पसंद कर रही है, जो सीधे उनके मोबाइल फोन की स्क्रीन तक पहुंच जाते हैं।

इसी बदलते ट्रेंड को भांपते हुए सपा भी अब एआई का सहारा ले रही है। पार्टी एआई की मदद से ऐसे वीडियो और ग्राफिक्स तैयार करा रही है, जिनमें पार्टी की नीतियों, सरकार में रहते हुए की गई पुरानी उपलब्धियों और महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेशों को बेहद रचनात्मक और आकर्षक अंदाज में पेश किया जा सके। इन कंटेंट का मकसद सिर्फ जानकारी देना ही नहीं, बल्कि युवाओं का ध्यान आकर्षित कर उन्हें पार्टी की विचारधारा से जोड़ना भी है।
टॉपरों को लैपटॉप बांटना भी रणनीति का हिस्सा
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इस पूरी रणनीति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि, एआई तकनीक सीधे तौर पर युवाओं को पार्टी से जोड़ने का एक कारगर माध्यम साबित हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि, युवा वर्ग को केंद्र में रखकर ही अखिलेश यादव सत्ता से बाहर होने के बावजूद लगातार मेधावी छात्रों यानी टॉपर विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरित करने का सिलसिला जारी रखे हुए हैं।
पदाधिकारी के अनुसार, यह पहल सिर्फ एक सामाजिक कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि इसके जरिए पार्टी युवाओं के बीच अपनी सकारात्मक छवि बनाए रखने और उन्हें अपने साथ जोड़े रखने की दीर्घकालिक रणनीति पर भी काम कर रही है। इसके अलावा, हाल ही में अखिलेश यादव द्वारा दिल्ली में अंग्रेजी भाषा में दिया गया एक भाषण भी इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि, इस भाषण के जरिए पार्टी ने शहरी और अंग्रेजी माध्यम से पढ़े-लिखे युवा वर्ग तक भी अपनी पहुंच बनाने की कोशिश की, जो आमतौर पर पारंपरिक हिंदी भाषणों से उतना नहीं जुड़ पाता।
प्रदेश में 21 फीसदी वोटर युवा
चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें, तो प्रदेश में युवा वोटरों की संख्या किसी भी राजनीतिक दल के लिए इग्नोर करने लायक नहीं है। प्रदेश में करीब 21 फीसदी वोटर ऐसे हैं, जिनकी उम्र 18 से 29 वर्ष के बीच है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि, प्रदेश के कुल मतदाताओं में हर पांचवां वोटर युवा वर्ग से आता है। यही वजह है कि सपा इस बड़े और महत्वपूर्ण वोट बैंक को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए एआई आधारित डिजिटल रणनीति पर विशेष जोर दे रही है, ताकि आगामी चुनावों में इस वर्ग का समर्थन हासिल किया जा सके।
कम खर्च में बेहतर नतीजे
पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ने एआई तकनीक के इस्तेमाल के पीछे एक और अहम वजह बताई। उनके मुताबिक, एआई के उपयोग से पार्टी को सबसे बड़ा फायदा प्रचार अभियान की लागत में भारी कमी के रूप में मिल रहा है। पहले किसी भी बड़े वीडियो प्रचार अभियान के लिए एक बड़ी टीम, महंगे कैमरा उपकरण और ग्राफिक्स डिजाइनिंग पर भारी-भरकम खर्च करना पड़ता था। लेकिन अब एआई आधारित टूल्स की मदद से अपेक्षाकृत बेहद कम संसाधनों और कम खर्च में ही आकर्षक और प्रभावशाली वीडियो व डिजिटल सामग्री तैयार की जा सकती है। इससे पार्टी को न सिर्फ आर्थिक बचत हो रही है, बल्कि कम समय में ज्यादा मात्रा में कंटेंट तैयार करने की क्षमता भी मिल रही है।
कांग्रेस भी डिजिटल मैदान में
सिर्फ समाजवादी पार्टी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस भी आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए खुद को डिजिटल मीडिया के मोर्चे पर मजबूत करने में जुट गई है। पार्टी ने इसके लिए एक आक्रामक और क्षेत्रीय स्तर की रणनीति अपनाई है, जिसके तहत पूरे प्रदेश में जोनवार टीमों का गठन किया जा रहा है। इसके साथ ही पार्टी विजुअल कंटेंट और मीम आधारित आक्रामक प्रचार शैली अपना रही है, ताकि जमीनी स्तर के मुद्दों को सीधे जनता के मोबाइल फोन तक पहुंचाया जा सके।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव ‘त्यागी’ ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी ने पूरे उत्तर प्रदेश को अलग-अलग जोनल हिस्सों में विभाजित कर वहां की सोशल मीडिया और आईटी सेल की टीमों को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और सक्रिय बनाया है। उन्होंने बताया कि इन टीमों के माध्यम से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा प्रणाली और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खामियों और कमियों को लगातार उजागर किया जा रहा है, ताकि जनता के सामने सरकार की नाकामियां स्पष्ट रूप से रखी जा सकें।
बदल चुका है चुनाव प्रचार का तरीका
श्रीवास्तव के मुताबिक, युवा वर्ग को पार्टी से जोड़ने के लिए खासतौर पर मीम और सटायर यानी व्यंग्यात्मक शैली का इस्तेमाल करते हुए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, क्योंकि यह शैली सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होती है और युवाओं के बीच आसानी से लोकप्रिय हो जाती है।
उत्तर प्रदेश की सियासत में अब चुनावी प्रचार का तरीका पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। जहां एक ओर समाजवादी पार्टी एआई तकनीक के जरिए युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी डिजिटल और मीम आधारित रणनीति के सहारे युवा वोटरों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी पार्टी इस डिजिटल रणनीति के जरिए युवाओं का भरोसा जीतने में कामयाब होती है।
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