
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश की गाजीपुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी को कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी राहत मिली है। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अंततः उनकी कुर्क की गई करीब बारह करोड़ रुपये की संपत्ति को मुक्त कर दिया गया है। संपत्ति मुक्त होने के बाद सांसद अफजाल अंसारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी और इसे न्यायिक व्यवस्था की जीत बताया।
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2022 में हुई थी संपत्ति कुर्क
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में प्रशासन ने सांसद अफजाल अंसारी की करीब 12 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को कुर्क कर जब्त कर लिया था। यह कार्रवाई उनके खिलाफ चल रहे गैंगस्टर एक्ट के एक मामले के आधार पर की गई थी। इस मामले में शुरुआत में उन्हें गैंगस्टर घोषित किए जाने के आरोप का सामना करना पड़ा था, जिसके चलते प्रशासन ने उनकी संपत्तियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें जब्त कर लिया था।

संपत्ति मुक्त होने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए अफजाल अंसारी ने बताया कि जुलाई और अगस्त महीनों के दौरान उनकी सभी अचल संपत्तियां जब्त की गई थीं। उन्होंने कहा कि देश में कानून का शासन कायम है और गाजीपुर की अदालत ने करीब एक साल पहले ही यह आदेश दे दिया था कि उनकी संपत्ति को मुक्त कर दिया जाए, क्योंकि उन पर गैंगस्टर होने के आरोप में यह जमीन जब्त की गई थी, जो अदालत की नजर में उचित नहीं ठहरी।
खेत, बाग-बगीचे और फार्म हाउस तक हुए थे जब्त
सांसद अफजाल अंसारी ने अपनी संपत्ति की कुर्की को लेकर विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि जुलाई और अगस्त के महीनों में उनकी तमाम अचल संपत्तियां, जिनमें खेत, बाग-बगीचे, जल पंप हाउस और उनका छावनी यानी फार्म हाउस तक शामिल था, सभी को कुर्क कर जब्त कर लिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि इतना ही नहीं, खेतों में खड़ी फसलों तक को भी उस समय जब्त कर लिया गया था, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
उन्होंने इस पूरे मामले में न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश में कानून का शासन है और अदालत के आदेश के अनुरूप ही यह पूरी कार्रवाई हुई। उन्होंने बताया कि करीब एक साल पहले गाजीपुर की अदालत ने उनकी संपत्ति को रिहा करने का आदेश जारी कर दिया था, हालांकि इसके बाद भी कानूनी प्रक्रिया लंबी चली।
गैंगस्टर एक्ट के तहत चला था मुकदमा
सांसद ने बताया कि उनकी संपत्ति की कुर्की मूल रूप से इस आरोप पर आधारित थी कि वे एक गैंगस्टर हैं और उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत एक मामला लंबित था। उन्होंने बताया कि इसी मामले में गाजीपुर की निचली अदालत ने शुरुआत में उन्हें चार साल की कैद की सजा सुनाई थी, साथ ही उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। यह फैसला उनके और उनके परिवार के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि इसी आधार पर उनकी करोड़ों की संपत्ति को भी जब्त कर लिया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया था बरी
इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान अफजाल अंसारी ने निचली अदालत के फैसले को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी। सांसद ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को पूरी तरह निरस्त कर दिया और उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह फैसला उनके लिए बड़ी कानूनी राहत साबित हुआ, क्योंकि इससे न सिर्फ उनकी सजा रद्द हुई, बल्कि उन पर लगे गैंगस्टर होने के आरोप भी खारिज हो गए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा फैसला
हालांकि मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। सांसद ने बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया और वहां इस आदेश को चुनौती दी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगाते हुए इसे बरकरार रखा। सांसद के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात की पुष्टि की कि हाईकोर्ट का आदेश कानूनी रूप से पूरी तरह सही था और इसमें किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। इसी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब उनकी संपत्ति को पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है।
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली राहत
सांसद अफजाल अंसारी के लिए यह पूरा घटनाक्रम एक लंबी और जटिल कानूनी लड़ाई का नतीजा रहा है। निचली अदालत से मिली सजा से लेकर हाईकोर्ट में बरी होने और फिर सुप्रीम कोर्ट तक मामले के पहुंचने तक, इस पूरी प्रक्रिया में वर्षों का समय लगा। अंततः जब सर्वोच्च न्यायालय ने भी हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी, तब जाकर उनकी संपत्ति को औपचारिक रूप से मुक्त किया जा सका।
राहुल गांधी को लेकर भी दी प्रतिक्रिया
इस दौरान सांसद अफजाल अंसारी ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही लोकसभा में बैठते हैं और जिस पार्टी को बहुमत मिलता है, वही सरकार बनाती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एनडीए सत्ता में है और राहुल गांधी विपक्ष के नेता की हैसियत से मौजूद हैं।
अफजाल अंसारी ने कहा कि विपक्ष के नेता के तौर पर सरकार से सवाल पूछना और उसकी नीतियों में मौजूद कमियों को उजागर करना राहुल गांधी का न सिर्फ नैतिक कर्तव्य है, बल्कि यह उनका संवैधानिक अधिकार भी है। उन्होंने कहा कि अगर इस वजह से उन्हें कोई नोटिस भेजा जाता है, तो भेजता रहे, क्योंकि जनता ने उन्हें चुनकर संसद में भेजा है और वे उसी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। सांसद ने आगे कहा कि जो सरकार निकम्मी है और जिसकी नीतियां जनविरोधी हैं, उसके खिलाफ सवाल उठाना विपक्ष का काम है और राहुल गांधी यही कर रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
सांसद अफजाल अंसारी की संपत्ति मुक्त होने की खबर सामने आते ही गाजीपुर सहित पूर्वांचल के राजनीतिक गलियारों में इस पर चर्चा तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है, वहीं इस पूरे प्रकरण को लेकर राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
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