राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: अमिताभ ठाकुर ने SIT को लिखा पत्र, मांगा पाई-पाई का हिसाब

अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह मामला पहले से ही काफी विवादों में रहा है। वहीं अब आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के हस्तक्षेप ने इसे एक नया मोड़ दे दिया है। इससे पहले भी अमिताभ ठाकुर ने राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद की चयन प्रक्रिया सवाल उठाए थे और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया था। अब उन्होंने चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल यानी एसआईटी को एक औपचारिक पत्र भेजा है, जिसमें जांच के दायरे और तरीके को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं।

इसे भी पढ़ें- अयोध्या राम मंदिर: 5 सदी का इंतजार खत्म, अब सावन तृतीया से रामलला झूलेंगे झूला

सिर्फ आरोपियों तक सीमित न रहे जांच

अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की है कि, इस पूरे प्रकरण की जांच केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए कि इसमें कौन-कौन शामिल थे या उनकी क्या भूमिका रही। उनका कहना है कि, यह जांच का एक बेहद संकुचित और अधूरा नजरिया होगा।

Ram Temple offering theft case

उन्होंने जोर देकर कहा है कि, इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल एक स्वतंत्र और पेशेवर फोरेंसिक ऑडिटर के माध्यम से कराई जानी चाहिए, ताकि मंदिर में हुए वित्तीय गबन और बिना हिसाब वाली संपत्ति का सटीक और वैज्ञानिक आधार पर आकलन किया जा सके। उनके अनुसार, यह कदम मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि केवल दोषियों की पहचान करने से यह स्पष्ट नहीं हो पाएगा कि आखिर कितनी राशि या संपत्ति का वास्तव में नुकसान हुआ।

 दान राशि और संपत्ति का नहीं है हिसाब?

पूर्व पुलिस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही एक स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिटर को एसआईटी से जोड़ा जा चुका है। ऐसे में उनका मानना है कि, इस जांच का मूल आधार यह होना चाहिए कि मंदिर को कुल कितनी धनराशि, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं दान के रूप में प्राप्त होनी थीं, इनमें से वास्तव में कितनी मात्रा आधिकारिक तौर पर दर्ज की गई, सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि, आज तक कितनी राशि या संपत्ति का कोई संतोषजनक और स्पष्ट हिसाब उपलब्ध नहीं हो सका है। उनके अनुसार, जब तक इन तीनों पहलुओं के बीच स्पष्ट तुलना और मिलान नहीं किया जाएगा, तब तक मामले की असली तस्वीर सामने नहीं आ पाएगी।

दान-पेटी से बैंक खातों तक पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग

पत्र में अमिताभ ठाकुर ने एक और महत्वपूर्ण मांग रखी है, जिसके तहत उन्होंने फोरेंसिक ऑडिटर की सहायता से एक व्यापक ‘डोनेशन रिकॉन्सिलिएशन’ यानी दान राशि के समन्वयन और मिलान की प्रक्रिया कराए जाने की बात कही है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत मंदिर की दान-पेटियों और उनसे जुड़ी रसीदों से लेकर नोटों की वास्तविक गिनती, सीसीटीवी फुटेज की जांच, धनराशि की अभिरक्षा यानी कस्टडी की प्रक्रिया, बैंक में जमा की गई राशि, लेजर बुक में दर्ज एंट्रीज और अंत में तैयार किए गए वित्तीय खातों तक, हर एक चरण की गहन और बारीकी से पड़ताल की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि, जब तक इस पूरी श्रृंखला के हर कदम की क्रॉस-चेकिंग नहीं होगी, तब तक यह पता लगाना संभव नहीं होगा कि, आखिर कहां और किस स्तर पर गड़बड़ी हुई है।

व्यवस्थागत खामियों की भी हो पहचान

अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में एक अहम बिंदु और उठाया है। उनका कहना है कि, इस पूरे मामले में सिर्फ यह तय कर देना कि, किन व्यक्तियों की क्या जिम्मेदारी थी, अपने आप में एक अधूरा और सतही काम होगा। उन्होंने मांग की है कि, जांच के दायरे में यह भी शामिल किया जाना चाहिए कि मंदिर परिसर में सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था, दान राशि गिनने की प्रक्रिया और इससे जुड़े मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी में कहां-कहां व्यवस्थागत खामियां या कमजोरियां रही हैं।

उनके अनुसार, इन्हीं खामियों के चलते जो वास्तविक वित्तीय नुकसान हुआ है, उसका भी एक स्वतंत्र और स्पष्ट आकलन किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

‘किसने किया’ के साथ ‘कितना गया’ का जवाब भी जरूरी

अपने पत्र के आखिर में अमिताभ ठाकुर ने एक बेहद तीखी और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि, इस पूरे मामले की जांच तभी वास्तव में पूर्ण और संतोषजनक मानी जाएगी, जब यह सिर्फ यह सवाल न पूछे कि ‘किसने यह चोरी की?’ बल्कि यह भी स्पष्ट करे कि ‘आखिर कितनी राशि या संपत्ति गायब हुई और उसका हिसाब आज कहां है?’

उनका कहना है कि, केवल दोषियों की पहचान करके मामले को बंद कर देना न्याय की दृष्टि से अधूरा होगा, जब तक कि वित्तीय गबन का पूरा और सटीक आंकड़ा जनता के सामने न आए।

करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है मंदिर

गौरतलब है कि, अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, यहां हर दिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के साथ-साथ दान भी करते हैं। ऐसे में मंदिर की दान राशि और संपत्ति से जुड़ी किसी भी तरह की अनियमितता या गबन का मामला सीधे तौर पर करोड़ों भक्तों की आस्था और भरोसे से जुड़ा हुआ है।

अमिताभ ठाकुर द्वारा उठाई गई मांगें इस दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं, क्योंकि यह सिर्फ किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने का मामला नहीं, बल्कि मंदिर प्रबंधन की समूची वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा विषय बन चुका है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि, विशेष जांच दल अमिताभ ठाकुर की इन मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या फोरेंसिक ऑडिटर की मदद से इतनी व्यापक और गहन जांच वाकई शुरू की जाएगी। अगर ऐसा होता है, तो इससे न केवल इस विशेष मामले की सच्चाई सामने आएगी, बल्कि भविष्य में मंदिरों और धार्मिक ट्रस्टों में दान-प्रबंधन की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व मजबूत बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम हो सकती है।

 

इसे भी पढ़ें- सीएम योगी ने अयोध्या को दी 432 करोड़ रुपये की सौगात, दो नगर पंचायतों के नाम भी बदले

Related Articles

Back to top button