चावड़ी बाजार में निर्माणाधीन इमारत ढही, 2 की मौत, आखिर दिल्ली में क्यों नहीं थम रहे हादसे?

  • गली सकरी होने से राहत कार्य में आ रही बाधा 

  • सितंबर में सत्य निकेतन के बाद फिर उठे MCD की कार्यप्रणाली पर सवाल

नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में गुरुवार सुबह एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। हादसे में कई लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना है और मौके पर राहत एवं बचाव कार्य जारी है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के एक अधिकारी ने बताया कि, कम से कम 15 लोगों के फंसे होने की आशंका है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं।

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मेट्रो स्टेशन के सामने हुआ हादसा

दमकल विभाग के अनुसार, सुबह 9 बजकर 50 मिनट पर गली सत्तारा, शीश महल में मेट्रो स्टेशन के सामने इमारत गिरने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त अधिकारियों को भी मौके पर भेजा गया। फिलहाल दमकल की कुल छह गाड़ियां मौके पर तैनात हैं और मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है। हादसे में कुल कितने लोग प्रभावित हुए हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

संकरी गली बनी चुनौती

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत में निर्माण कार्य चल रहा था और करीब 10 बजे अचानक वह ढह गई। माना जा रहा है कि, वहां बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे, लेकिन मलबे के नीचे कितने लोग दबे हैं, इसकी पुख्ता जानकारी नहीं है। दमकल और पुलिस की टीमें तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। इलाका बेहद संकरा होने के कारण बचाव दल को दिक्कतें आ रही हैं। फिलहाल प्राथमिकता इमारत में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालने की है।

एक महीने में दूसरा-तीसरा बड़ा हादसा

यह हादसा राजधानी में इमारतें गिरने की उस लंबी कड़ी का हिस्सा है, जिसने बीते डेढ़ साल में कई परिवार उजाड़ दिए। इससे पहले 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। वहां पीजी चल रहा था और हादसे में सात लोगों की जान गई। मृतकों में ज्यादातर दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र थे। उस घटना के बाद जर्जर इमारतों को चिह्नित करने का अभियान चला, लेकिन हादसे नहीं थमे।

Chawri Bazaar building collapses

अक्टूबर की शुरुआत में न्यू सीमापुरी इलाके में भी बड़ा हादसा हुआ। इदगाह मछली मंडी के पास चार मंजिला रिहायशी इमारत ढहने से कम से कम चार लोगों की मौत हुई, जिनमें बच्चे भी शामिल थे, और कई घायल हुए। अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि आसपास की एक इमारत में तोड़फोड़ का काम चल रहा था, जिसकी कंपन से यह इमारत प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
पिछले साल भी हुए थे हादसे

राजधानी के लिए यह सिलसिला नया नहीं है। अप्रैल 2025 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद में तड़के एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत गिरने से 11 लोगों की मौत हो गई और 11 घायल हुए। मृतकों में एक ही परिवार के सात सदस्य शामिल थे। उस समय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जांच के आदेश दिए थे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही थी।

जुलाई 2025 में सीलमपुर के जनता मजदूर कॉलोनी में चार मंजिला इमारत संकरी गली में ढह गई, और बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई, जिनमें दो साल की बच्ची भी थी। इससे एक दिन पहले उत्तरी दिल्ली के आजाद मार्केट के पास तीन मंजिला दुकान की इमारत गिरने से एक व्यक्ति की मौत हुई थी।

अगस्त 2025 में दरियागंज में तोड़ी जा रही एक इमारत का हिस्सा गिरने से तीन मजदूरों की जान चली गई। उससे पहले जून 2025 में रोहिणी में भी तीन मंजिला इमारत ढहने पर कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई थी।

पुरानी दिल्ली का इतिहास भी कुछ अलग नहीं रहा। सितंबर 2017 में सदर बाजार के पान मंडी में बारिश के बीच तीन मंजिला इमारत गिर गई थी, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ। सितंबर 2020 में सीताराम बाजार इलाके में भी एक निर्माणाधीन इमारत गिरने से एक व्यक्ति घायल हुआ था।

MCD पर उठे सवाल

लगातार हो रहे इन हादसों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि, संकरी गलियों में घनी आबादी के बीच निर्माण और तोड़फोड़ की अनुमति किस आधार पर दी जाती है। चावड़ी बाजार की यह इमारत निर्माणाधीन थी। ऐसे में यह भी जांच का विषय होगा कि, निर्माण की मंजूरी थी या नहीं, और सुरक्षा मानकों का कितना पालन हुआ। जर्जर इमारतों की पहचान के अभियानों के बावजूद हादसों का थमना तो दूर, उनका दोहराव बता रहा है कि, कार्रवाई कागजों तक सीमित रह जाती है।

फिलहाल मौके पर बचाव अभियान जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, मलबा हटाने का काम सावधानी से किया जा रहा है, ताकि अंदर फंसे लोगों को और नुकसान न पहुंचे। हादसे के कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

 

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