
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर आई एक अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट या किसी अनजान नंबर से आया वीडियो कॉल देश की सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को अलर्ट किया गया है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भी ऑनलाइन हनीट्रैप और साइबर ठगी को लेकर एडवाइजरी जारी की है। इसमें जवानों से कहा गया है कि, वे अपने डिजिटल व्यवहार को लेकर बेहद सतर्क रहें, क्योंकि एक छोटी सी चूक उनके साथ-साथ पूरे सुरक्षा तंत्र के लिए भारी पड़ सकती है।
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भरोसा जीतकर बिछाया जाता है जाल
एडवाइजरी के मुताबिक, साइबर अपराधी और जासूसी नेटवर्क सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर जवानों से संपर्क साधते हैं। शुरुआत आमतौर पर एक सामान्य फ्रेंड रिक्वेस्ट से होती है। बातचीत धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और सामने वाला भरोसा जीतने की कोशिश करता है। जब जवान को लगता है कि, वह किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात कर रहा है, तब उससे निजी तस्वीरें या वीडियो साझा करने को कहा जाता है। कई मामलों में अनजान नंबर से वीडियो कॉल कर भी जाल बिछाया जाता है।

इसके बाद असली खेल शुरू होता है। निजी तस्वीरों और वीडियो के सहारे ब्लैकमेलिंग का सिलसिला चलता है। जवान को बदनामी का डर दिखाकर दबाव बनाया जाता है। इसी दबाव के बीच संवेदनशील दस्तावेजों और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है। यानी जो मामला शुरुआत में निजी लगता है, वह धीरे-धीरे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मसला बन सकता है।
AI और डीपफेक ने बढ़ाई चुनौती
सुरक्षा एजेंसियों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है कि अब तकनीक की मदद से फर्जी पहचान गढ़ना पहले से कहीं आसान हो गया है। AI के जरिए किसी की भी आवाज, चेहरा और हाव-भाव की नकल की जा सकती है। डीपफेक तकनीक से बनाए गए फर्जी वीडियो और तस्वीरें इतनी असली लग सकती हैं कि आम व्यक्ति के लिए असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। इसी का फायदा उठाकर अपराधी किसी वरिष्ठ अधिकारी या जानकार व्यक्ति का रूप धरकर जवानों को भ्रमित कर सकते हैं।
यही वजह है कि, एडवाइजरी में सिर्फ पहचान पर भरोसा न करने और हर संदिग्ध संपर्क की जांच करने पर जोर दिया गया है। सुरक्षा बलों के लिए यह सतर्कता इसलिए भी जरूरी है कि, उनकी जानकारी आम नागरिकों से कहीं ज्यादा संवेदनशील होती है।
बचाव के लिए क्या करें?
एजेंसी ने जवानों को कई अहम सावधानियां बरतने की सलाह दी है।
- अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले उस व्यक्ति की पहचान अच्छी तरह जांच लें। प्रोफाइल कितनी पुरानी है, उसमें कितनी जानकारी है और म्यूचुअल फ्रेंड कौन हैं, इन बातों पर गौर करना जरूरी है।
- वर्दी, यूनिट, सैन्य ठिकानों, हथियारों और ऑपरेशन से जुड़ी कोई भी जानकारी सोशल मीडिया या निजी बातचीत में साझा न करें। यह जानकारी छोटी लगने पर भी दुश्मन के लिए काम की साबित हो सकती है।
- संदिग्ध फाइलें, लिंक या ऐप डाउनलोड न करें। अनजान स्रोत से आई फाइल मोबाइल या कंप्यूटर में घुसपैठ का रास्ता बना सकती है।
- अगर कोई भी सुरक्षा उल्लंघन या संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत इसकी सूचना अपने अधिकारी को दें। डर या शर्म के कारण मामले को छिपाना सबसे बड़ी भूल साबित हो सकता है।
- साइबर ठगी की स्थिति में बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत होगी, नुकसान रोकने की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी।
जासूसी के भी हैं कई खतरे
एडवाइजरी में सिर्फ हनीट्रैप ही नहीं, बल्कि जासूसी से जुड़े दूसरे खतरों को लेकर भी आगाह किया गया है।
फर्जी पहचान
अपराधी खुद को वरिष्ठ अधिकारी, पत्रकार या रक्षा विशेषज्ञ बताकर गोपनीय जानकारी मांग सकते हैं। पद या पेशे का नाम सुनकर भरोसा कर लेना जोखिम भरा हो सकता है।
मैलवेयर और स्पाइवेयर
अनजान APK फाइल या संदिग्ध लिंक के जरिए फोन से डेटा चुराने या उसकी निगरानी करने की कोशिश की जा सकती है। इससे बातचीत, फोटो और अन्य निजी जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती है।
लोकेशन लीक
तस्वीरों, वीडियो, लोकेशन टैग और नियमित पोस्ट से जवान की तैनाती या आवाजाही का अंदाजा लगाया जा सकता है। बार-बार की गई सामान्य पोस्ट भी पैटर्न उजागर कर सकती है।
फर्जी कॉल और संदेश
OTP, पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी या आधिकारिक दस्तावेज हासिल करने के लिए फर्जी कॉल और संदेश भेजे जा सकते हैं। इनका मकसद आर्थिक ठगी के साथ-साथ संवेदनशील डेटा तक पहुंचना भी हो सकता है।
ब्लैकमेलिंग
निजी तस्वीरों या बातचीत को सार्वजनिक करने की धमकी देकर दबाव बनाया जा सकता है। इस दबाव में आकर कई बार लोग गलत फैसले ले बैठते हैं, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।
सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार
जानकारों का कहना है कि, बदलते दौर में सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल मोर्चे की सुरक्षा भी उतनी ही अहम हो गई है। हथियारों के साथ अब जानकारी भी एक बड़ा हथियार बन चुकी है। ऐसे में जवानों की जरा सी लापरवाही देश के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। एडवाइजरी का सार यही है कि अनजान पर भरोसा न करें, निजी और गोपनीय जानकारी साझा करने से बचें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत अधिकारी या हेल्पलाइन से संपर्क करें।
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