
लखनऊ। आमतौर पर पुलिस किसी आरोपी को पकड़ने के बाद उसे ले जाते समय पूछताछ करती है और घटना की कड़ियां जोड़ने की कोशिश करती है, लेकिन कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में तस्वीर अलग नजर आई। बताया जा रहा है कि, नागपुर से लखनऊ तक के सफर में पुलिसकर्मियों ने मुख्य आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे से कोई तीखा सवाल नहीं किया। वे पूरे रास्ते खामोश रहे और इस बात का खास ख्याल रखा कि, आरोपी श्रद्धा को किसी भी तरह की परेशानी न हो। चर्चा है कि, इस चुप्पी के पीछे उस “सर” का खौफ था, जिसका जिक्र श्रद्धा की कई कॉल रिकॉर्डिंग में सुनाई देता है।
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कॉल रिकॉर्डिंग में बार-बार ‘सर’ का जिक्र

वारदात के बाद श्रद्धा की कई कॉल रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। इन कॉल रिकॉर्डिंग्स में वह शिवा को धमकाती हुई सुनाई देती हैं। लगभग हर रिकॉर्डिंग में एक “सर” का जिक्र है। उनका नाम कहीं नहीं लिया गया है, लेकिन जिस अंदाज में श्रद्धा उनका जिक्र करती हैं, उससे संकेत मिलता है कि, वह काफी प्रभावशाली व्यक्ति हैं। बताया जा रहा है कि ये “सर” कोई बड़े अधिकारी हैं। हालांकि उनकी पहचान को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वायरल रिकॉर्डिंग के बाद गिरी गाज
रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई। इसके पीछे लापरवाही बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि, पुलिसकर्मियों को भी श्रद्धा के संपर्कों का अंदाजा था, इसीलिए वे एहतियात बरत रहे थे, ताकि आगे चलकर किसी मुश्किल में फंसने पर उन्हें बलि का बकरा न बनना पड़े। यही कारण रहा कि, सफर के दौरान सवाल-जवाब से परहेज किया गया। सूत्र यह भी बताते हैं कि रास्ते में श्रद्धा को ब्लैक कॉफी पिलाई गई और पनीर टिक्का खिलाया गया।
बैंक खातों से खुल सकता है राज
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक श्रद्धा के खातों में लाखों रुपये मिले हैं। उसे महंगे तोहफे भी मिलते थे। वह दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य स्थानों के मॉल में लाखों रुपये की खरीदारी करती थी। सूत्र बताते हैं कि, इन खरीदारियों का भुगतान उसके करीबी लोग करते थे, जिनमें कुछ अफसरों के भी शामिल होने की बात कही जा रही है। यह आशंका भी जताई जा रही है कि कुछ रकम सीधे उसके खातों में भेजी गई। पुलिस जब बैंक खातों की जांच करेगी, तब पूरा ब्योरा सामने आएगा। हालांकि कहा जा रहा है कि उसके संपर्क वाले अधिकारियों ने काफी सावधानी बरती है, ताकि वे किसी जांच में न फंसें।
पहले से थे निर्देश, इसलिए नहीं लिया नाम

श्रद्धा ने जहां भी शिवा को “सर” के नाम की धमकी दी, वहां उनका नाम नहीं बोला। जानकारी के मुताबिक, उसे पहले से निर्देश था कि किसी से भी बात करते समय नाम जुबान पर नहीं आना चाहिए। इसी वजह से “सर” शब्द साहब के नाम का कोड बन गया था। चूंकि रिकॉर्डिंग में वह यह भी कहती है कि वह “सर” की मदद से डिटेल निकलवा सकती है, इसलिए माना जा रहा है कि उनका संपर्क पुलिस विभाग में भी मजबूत है।
चेहरे पर अब भी आत्मविश्वास
गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बावजूद श्रद्धा के चेहरे पर आत्मविश्वास बना हुआ है। उसे देखकर नहीं लगता कि वह इतने गंभीर मामले में फंस चुकी है। माना जा रहा है कि, उसे अब भी भरोसा है कि उसके “सर” उसे बचा सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि वह अब भी उनके बारे में कुछ नहीं बता रही।
कब क्या हुआ: एक नजर में
हजरतगंज के बालू अड्डा स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरकर अलीगंज निवासी कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई।
शिवा की मां रंजना शर्मा की शिकायत पर हजरतगंज थाने में श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि, चालक तनवीर अली उर्फ दानिश, आदिल और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। जांच में आरोपियों की गाड़ी सीतापुर-लखीमपुर मार्ग से बहराइच के रुपईडीहा पहुंचने की जानकारी मिली। आखिरी लोकेशन सुबह करीब 6:20 बजे भारत-नेपाल सीमा के पास मिली, जिसके बाद नेपाल भागने की आशंका जताई गई।
डीसीपी मध्य ने तीनों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। रुपईडीहा में श्रद्धा की एसयूवी पार्किंग में खड़ी मिली।
सोशल मीडिया पर श्रद्धा के वीडियो सामने आए। इनमें उसने शिवा की मौत को आत्महत्या बताते हुए खुद को निर्दोष कहा। एक अन्य वीडियो में शिवा के कर्ज और जेवर ले जाने के दावे भी किए गए।
पुलिस ने आरोपियों की तलाश में नेपाल पुलिस से मदद मांगी।
श्रद्धा, रश्मि और दानिश के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ। उसी दिन हजरतगंज के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया।
पुलिस ने फरार दानिश के परिजनों से पूछताछ की। इनाम की राशि बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दी गई। उसी दिन डीसीपी मध्य विक्रांत वीर को पद से हटा दिया गया।
पुलिस टीम रायबरेली में श्रद्धा के घर पहुंची और उसके पिता एसपी दुबे व सौतेली मां से पूछताछ की। गिरफ्तारी न होने पर एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा को भी हटा दिया गया।
लखनऊ पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में नागपुर से श्रद्धा, रश्मि और दानिश गिरफ्तार हुए।
तीनों को नागपुर कोर्ट में पेश किया गया। ट्रांजिट रिमांड मिलने पर हजरतगंज पुलिस उन्हें लेकर लखनऊ रवाना हुई। उसी दिन श्रद्धा के मित्र व मैनेजर आदिल को भी यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया।
आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 31 अक्टूबर तक जेल भेज दिया गया।
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