2027 में डबल इंजन की हैट्रिक की तैयारी, सीएम ने शुरू किया मंथन, तेज हुआ बैठकों का दौर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की सियासी गर्मी बढ़ती जा रही है। भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी यानी जीत की हैट्रिक लगाने के लिए कमर कस चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य सरकार, पार्टी और संघ के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, 2024 लोकसभा चुनाव के सबकों से सीखना और बूथ स्तर तक मजबूत संगठन खड़ा करना है।

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मुख्यमंत्री ने लिया फीडबैक

आपको बता दें कि, पिछले कुछ दिनों में सीएम योगी की आरएसएस से जुड़ी गतिविधियां तेज हो गई हैं। गुरुवार को गाजियाबाद में नेहरू नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में मेरठ प्रांत ‘मेरठ, मुरादाबाद और सहारनपुर मंडल शामिल हैं’ के आरएसएस पदाधिकारियों से लंबी बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने सरकार की कार्यप्रणाली पर फीडबैक लिया, स्थानीय स्तर पर चुनौतियों और समस्याओं को समझा।

सीएम

सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान करीब 40 पदाधिकारी मौजूद रहे, जिनमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह और आरएसएस के सीनियर नेता शामिल थे। बैठक के दौरान दोपहर का भोजन भी साथ किया गया, जो संगठन और सरकार के बीच बढ़ते निकटता का प्रतीक माना जा रहा है। शुक्रवार को सीएम योगी कानपुर दौरे पर रहे, जहां उन्होंने आरएसएस पदाधिकारियों के साथ समन्वय बैठक की। यह बैठक पंडित दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय में हुई।

कमजोरियों पर  हुई चर्चा

सूत्र बताते हैं कि, यहां भी 2024 लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन का रिव्यू किया गया और 2027 के लिए रणनीति पर मंथन हुआ। बैठक में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की स्थिति, बूथ स्तर की कमजोरियां और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा हुई। सीएम योगी ने पदाधिकारियों से खुलकर फीडबैक लिया और सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने में संघ की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया। ये बैठकें सिर्फ गाजियाबाद और कानपुर तक सीमित नहीं हैं।

सूत्रों के अनुसार, सीएम योगी लगातार प्रांत स्तर पर आरएसएस से जुड़े पदाधिकारियों से संवाद कर रहे हैं। लखनऊ में संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ हाल की मुलाकात के बाद यह सिलसिला तेज हुआ है। अयोध्या में दोनों के बीच 90 मिनट की एकांत वार्ता भी चर्चा में रही। बीजेपी और आरएसएस के बीच ऐसी समन्वय बैठकें 2018 और 2021 में भी हुई थीं, जिनके बाद पार्टी ने 2019 लोकसभा और 2022 विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया था।

इन मुद्दों पर केन्द्रित रही बैठक

2024 लोकसभा में सीटों में कमी के बाद अब फिर से ये बैठकें शुरू हो गई हैं, जो पार्टी की गंभीरता दर्शाती हैं। भाजपा का लक्ष्य 2027 में 403 सदस्यीय विधानसभा में 300 से अधिक सीटें जीतना है। 2022 में पार्टी ने 255 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 लोकसभा में यूपी में सिर्फ 33 सीटें मिलीं, जो 2019 के 62 से काफी कम थीं। इस कमी को दूर करने के लिए आरएसएस की बूथ स्तर की पकड़ और संगठनात्मक ताकत का इस्तेमाल किया जा रहा है। बैठकें मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर केंद्रित हैं।

2024 के सबक और सुधार: लोकसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी, पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में पार्टी को नुकसान हुआ। स्थानीय मुद्दों, जातिगत समीकरण और विपक्ष की रणनीति पर फीडबैक लिया जा रहा है।
सरकार-संघ तालमेल: सीएम योगी ने पदाधिकारियों से सरकार की योजनाओं जैसे लखपति दीदी, आवास, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत के क्रियान्वयन पर राय ली। संघ कार्यकर्ताओं को इन योजनाओं को घर-घर पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।
ग्राउंड लेवल मजबूती: बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाना, युवाओं और महिलाओं को जोड़ना, सोशल इंजीनियरिंग और हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत करना। आरएसएस की शाखाओं और भाजपा के बूथ कमेटियों के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन पर फोकस है।

बेरोजगारी पर हुई चर्चा

पश्चिमी यूपी में आरएसएस की मजबूत उपस्थिति को देखते हुए गाजियाबाद बैठक विशेष महत्वपूर्ण थी। मेरठ प्रांत में जातिगत समीकरण संवेदनशील हैं और यहां सपा-कांग्रेस गठबंधन मजबूतहो सकता है। सीएम योगी ने स्थानीय दिक्कतों जैसे कानून-व्यवस्था, किसान मुद्दे और युवा बेरोजगारी पर चर्चा की। कानपुर बैठक में बुंदेलखंड की पिछड़ापन और विकास की चुनौतियों पर फोकस रहा।आगामी दिनों में सीएम योगी आगरा और अन्य प्रांतों में भी ऐसी बैठकें करेंगे। ब्रज प्रांत यानी आगरा-मथुरा की समन्वय बैठक में 2027 की रणनीति पर गहन मंथन होगा।

भाजपा-आरएसएस का संयुक्त रोडमैप तैयार हो रहा है, जिसमें घर-घर पहुंच, सोशल मीडिया कैंपेन, महिला-युवा मोर्चा और हिंदुत्व आधारित मुद्दों को प्रमुखता दी जाएगी। विपक्षी दलों ने इन बैठकों को ‘चुनावी साजिश’ बताते हुए आलोचना की है, लेकिन भाजपा इसे जनसेवा और संगठन मजबूती का हिस्सा बता रही है। सीएम योगी बार-बार कहते हैं कि डबल इंजन सरकार 2027 में और मजबूती से वापसी करेगी। आरएसएस की भूमिका को पार्टी आदर्शवादी मार्गदर्शन मानती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरएसएस-भाजपा का यह समन्वय 2027 में निर्णायक साबित हो सकता है। यदि ये बैठकें जमीन पर उतरती हैं, तो यूपी में भाजपा की हैट्रिक लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन जातिगत गठबंधन, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे चुनौती बने रहेंगे।

 

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