
लखनऊ। अलीगंज अग्निकांड की त्रासदी ने जहां 15 बेगुनाह जिंदगियां निगल लीं, वहीं इस हादसे ने लखनऊ के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बरसों से चली आ रही लापरवाही की परतें भी उलट-पुलट कर रख दी। अब लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इस लापरवाही के खिलाफ कमर कस ली है और शहर में एक व्यापक अभियान छेड़ दिया है।
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22 जून को हुआ था भीषण अग्निकांड
एलडीए ने गत दिवस यानी बुधवार को 71 प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई की। आज गुरुवार को भी यह अभियान पूरे जोर-शोर के साथ जारी रहेगा। एलडीए, अग्निशमन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम शहर के विभिन्न इलाकों में उन प्रतिष्ठानों की जांच कर रही है, जो सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाकर धड़ल्ले से चल रहे हैं।

बता दें कि बीते 22 जून को अलीगंज स्थित एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लग गई थी। उस इमारत के बेसमेंट, ग्राउंड और पहले फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक संचालित हो रहे थे। दूसरे फ्लोर पर लर्निंग स्पेस नाम की लाइब्रेरी और हेड हॉपर स्टूडियो था, जहां 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का काम होता था। जब आग की लपटें तेजी से ऊपर की ओर फैलीं तो स्टूडियो में काम कर रहे युवा पेशेवरों के पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा, जिससे 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
71 प्रतिष्ठान सील, 83 को नोटिस
इस हादसे ने न सिर्फ सुरक्षा मानकों की पोल खोली बल्कि सालों से सोए शासन-प्रशासन को जगा दिया। 15 युवाओं की मौत के बाद जागे प्रशासन ने जब ताबड़तोड़ जांच शुरू की और सुरक्षा मानकों को परखा तो समझ में आया कि, राजधानी में किस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और थोड़े से फायदे के लिए किस तरह से लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ किया जा रहा है।
इस दिल दहला देने वाले हादसे के बाद एलडीए तुरंत हरकत में आ गया। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के सख्त निर्देश पर तत्काल जांच अभियान शुरू किया गया। बुधवार को इस अभियान के पहले ही दिन शहर के कई प्रमुख इलाकों में ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई। गोमतीनगर, कानपुर रोड, हजरतगंज और कृष्णानगर समेत कई क्षेत्रों में संयुक्त टीमों ने एक-एक प्रतिष्ठान की जांच की और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले 71 प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। इसके साथ ही 83 भवन मालिकों को नोटिस भी थमाए गए।
फेमस प्रतिष्ठान भी जद में
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सील किए गए प्रतिष्ठानों में केवल छोटे या कम जाने-पहचाने संस्थान ही नहीं थे, बल्कि एलन, ग्रेविटी, आकाश, गवर्नमेंट एग्जाम वाला और पैरामाउंट जैसे फेमस प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान भी शामिल रहे। इन संस्थानों में हजारों छात्र हर रोज अपने सपनों को साकार करने की उम्मीद लेकर आते हैं। ऐसे में इनके परिसरों में सुरक्षा मानकों की इस कदर अनदेखी यह बड़ा सवाल खड़ा करती है कि, आखिर इन संस्थानों की जिम्मेदारी क्या है। बड़े नाम और मोटी फीस लेने वाले ये संस्थान यदि बुनियादी अग्नि सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं कर सके तो यह अपने आप में एक गंभीर और शर्मनाक बात है।

एलडीए अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि, यह अभियान महज कुछ दिनों की खानापूर्ति नहीं है। यह अभियान लगातार तीन सप्ताह तक चलाया जाएगा और इसके दायरे में कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी, होटल, नर्सिंग होम, डांस स्टूडियो, प्ले ग्रुप स्कूल और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स सभी आएंगे। शहर के सभी जोन में संयुक्त टीमें तैनात की गई हैं, जो बारीकी से निरीक्षण करेंगी, जिन भवनों में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नदारद मिलेंगे, पार्किंग की व्यवस्था नहीं होगी या नक्शे के विपरीत निर्माण पाया जाएगा, उनके खिलाफ तत्काल सीलिंग और नोटिस की कार्रवाई होगी।
कारोबारियों में हड़कंप
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि, कोई भी प्रतिष्ठान इस जांच के दायरे से बाहर नहीं रहेगा, चाहे वह कितना भी बड़ा या प्रभावशाली क्यों न हो। इस कार्रवाई का असर शहर के व्यावसायिक माहौल पर साफ दिखने लगा है। जो संस्थान और भवन मालिक अब तक नियमों को ताक पर रखकर कारोबार करते आ रहे थे, उनमें अब हड़कंप मचा हुआ है। कई प्रतिष्ठानों ने खुद ही आनन-फानन में सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त करने शुरू कर दिए हैं, तो कुछ ने अस्थायी रूप से अपने परिसर बंद रखे।

शहर के कोचिंग हब के रूप में मशहूर इलाकों में अब पहले जैसी चहल-पहल नहीं दिख रही। अलीगंज अग्निकांड ने ये भी खुलासा कर दिया कि शहर में बड़ी संख्या में ऐसी इमारतें हैं, जिनमें आपातकालीन निकास के रास्ते या तो बंद पड़े हैं या फिर हैं ही नहीं। अग्निशमन यंत्र या तो पुराने पड़ चुके हैं या सही ढंग से रख रखाव न होने की वजह से बेकार पड़े।
बेसमेंट में अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं और एक ही इमारत में इतनी भीड़ ठूंसी जा रही है कि किसी भी आपात स्थिति में बाहर निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। अब देखना यह होगा कि एलडीए का यह अभियान केवल कुछ दिनों की सख्ती बनकर रह जाता है या फिर शहर में सुरक्षा मानकों को लेकर एक स्थायी और ठोस बदलाव की नींव रखता है।
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