
लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ में करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के जिस मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है, उसका मास्टरमाइंड सिकन्दर खान नाम का शख्स है। यह सिकन्दर खान कौन है, जो अब तक पुलिस और प्रशासन के लिए पहेली बना हुआ है। कोर्ट और प्रशासनिक जांच में उसके नाम पर दो अलग-अलग वोटर आईडी और एक शपथपत्र सामने आए हैं। तीनों ही दस्तावेजों में उसका मूल पता अलग-अलग दर्ज है। इस विसंगति ने पूरे मामले को और उलझा दिया है। फिलहाल पुलिस इन्हीं तीन दस्तावेजों के आधार पर सिकंदर की असली पहचान और ठिकाने का पता लगाने में जुटी है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
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120 बीघा सरकारी जमीन हड़पने की साजिश
यह पूरा मामला जानकीपुरम, चिनहट और बीकेटी क्षेत्रों से जुड़ा है, जहां फर्जी चकबंदी आदेश तैयार कर करीब 120 बीघा सरकारी जमीन हड़पने की साजिश रची गई। जब यह प्रकरण अदालत की नजर में आया, तब जाकर पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ। इसके बाद जानकीपुरम थाने में चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।

जांच में सामने आया कि, इस पूरे प्रकरण के पीछे सिकंदर खान नाम के व्यक्ति का हाथ है, जो कथित तौर पर पूरे नेटवर्क का सूत्रधार है। इतना ही नहीं, चकबंदी विभाग के सात अधिकारी भी अब जांच के दायरे में हैं, क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि, इन अफसरों की सिकंदर से गहरी नजदीकियां रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि, सिकंदर भले ही कोर्ट के दस्तावेजों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है, लेकिन पुलिस और प्रशासन अब तक उसकी वास्तविक पहचान और पते के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं जुटा सके हैं।
दो वोटर आईडी, तीन पते, एक ही शख्स
मामले की तफ्तीश कर रहे एक अधिकारी का कहना है कि, सिकंदर खान के नाम पर दो अलग-अलग वोटर आईडी कार्ड बरामद हुए हैं। इनमें से एक आईडी में उसने खुद को बलरामपुर जिले के उतरौला क्षेत्र स्थित रंकीबदलपुर गांव का मूल निवासी बताया है, जबकि दूसरी आईडी में उसका पता बहराइच जिले का दर्शाया गया है।
इससे भी आगे बढ़कर, कोर्ट में दाखिल किए गए एक शपथपत्र में उसने खुद को इस्माईलगंज का रहने वाला बताते हुए चिनहट और उत्तरधौना स्थित दो जमीनों को अपनी पैतृक संपत्ति करार दिया है। यानी एक ही व्यक्ति के तीन अलग-अलग आधिकारिक दस्तावेजों में तीन अलग-अलग मूल पते दर्ज हैं। अब ये मामला जांच एजेंसियों के लिए काफी पेचीदा हो रहा है।
दस्तावेजों में हस्ताक्षर भी अलग-अलग
जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। कोर्ट में सिकंदर की तरफ से दाखिल किए गए विभिन्न दस्तावेजों में उसके हस्ताक्षर भी एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि, अगर वह मूल रूप से बलरामपुर या बहराइच का रहने है, तो फिर चिनहट और उत्तरधौना में उसकी पैतृक जमीन कैसे हो सकती है? और अगर बलरामपुर वाली पहचान असली है, तो बहराइच और लखनऊ में उसकी दूसरी पहचान वाले दस्तावेज किस आधार पर तैयार हुए? हालांकि, इस उलझन के बीच एक बात समान रूप से तीनों दस्तावेजों में दर्ज है वह है पिता का नाम। यानी तीनों सिकंदर के पिता का नाम शाहजहां खान है।
इराक से जुड़े तार, फंडिंग के आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस सरकारी जमीन के गोरखधंधे में सिकंदर के अलावा उसका भाई इरशाद खान और परिवार के कई अन्य सदस्य भी शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, गिरोह ने कई जमीनें अपने रिश्तेदारों के नाम पर भी दर्ज करा रखी हैं, जिनकी अब अलग से पड़ताल शुरू की गई है। जांच के दौरान सिकंदर के एक करीबी सहयोगी तारिक का नाम भी सामने आया है, जो कथित तौर पर इराक में रहकर सिकंदर के लगातार संपर्क में है।
आरोप है कि, विदेश से ही फंडिंग की व्यवस्था कर तारिक सिकंदर के जरिए जमीनों की खरीद-फरोख्त को अंजाम दिलवाता है। इस पूरे नेटवर्क में अदालतों में मुकदमों की पैरवी के लिए दो विशेष अधिवक्ता और एक महिला वकील भी सक्रिय बताई जा रही हैं, जिन पर अब निगरानी रखी जा रही है।
2000 करोड़ रुपये की जमीन पर कब्जे का आरोप
जांच एजेंसियों का अनुमान है कि, फर्जी चकबंदी आदेशों के जरिए आरोपियों ने राजधानी के विभिन्न इलाकों में करीब 2,000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ है। अब जांच का केंद्रबिंदु यह पता लगाना है कि, फर्जी चकबंदी आदेश आखिर तैयार कैसे हुआ, इस पूरी साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल रहे, विभागीय स्तर पर किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के स्टैंडिंग काउंसिल डॉ. कृष्णा सिंह ने इस संबंध में कहा कि, जमीनों से जुड़े सभी दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं और पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि, इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
तीन जिलों में दर्ज हैं आपराधिक मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सिकंदर खान के खिलाफ पहले से ही तीन अलग-अलग जिलों में आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। बलरामपुर और बहराइच के अलावा लखनऊ के वजीरगंज कोतवाली में भी उसके विरुद्ध केस दर्ज है। गुरुवार को पुलिस ने सीसीटीएनएस डेटाबेस के जरिए उसका आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला, जिसमें उस पर दर्ज विभिन्न मुकदमों की जानकारी सामने आई। फिलहाल पुलिस-प्रशासन इन्हीं रिकॉर्ड्स के आधार पर उसकी गतिविधियों और नेटवर्क की गहराई से छानबीन कर रहे हैं।
पुलिस पर सांठगांठ के आरोप
इस बीच जानकीपुरम थाने में हल्की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद पुलिस पर भी भूमाफिया से मिलीभगत के आरोप लगने लगे हैं। चकबंदी विभाग के बंदोबस्त अधिकारी ने आरोप लगाया है कि चिनहट कोतवाली में तहरीर सौंपे जाने के 24 घंटे बाद भी वहां मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
हालांकि, इस पर कोतवाली प्रभारी का पक्ष अलग है, उनका कहना है कि, अभी तक उन्हें कोई तहरीर प्राप्त ही नहीं हुई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चिनहट कोतवाली में मामला किन धाराओं के तहत दर्ज किया जाता है, क्योंकि इसी से आगे की जांच की दिशा और पुलिस की मंशा, दोनों ही स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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