
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, जो अपनी तहजीब और नवाबी विरासत के लिए जानी जाती है, आज एक भयावह त्रासदी का गवाह बन गई। अलीगंज थाना क्षेत्र के पुरनिया इलाके में सोमवार की दोपहर एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे ने कम से कम 14 मासूम बच्चों की जिंदगी छीन ली, जबकि दर्जनों घायल हो गए। घटना ने पूरे शहर को सकते में डाल दिया और एक बार फिर व्यावसायिक इमारतों में संचालित शिक्षण संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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कैसे शुरू हुई आग
आग लगने की मुख्य वजह इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक दुकान के बिजली बोर्ड में हुआ भीषण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और लपटें ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गईं। बिल्डिंग में बेसमेंट, ग्राउंड और पहले फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक थे, जबकि दूसरे फ्लोर पर ‘लर्निंग स्पेस’ नाम की लाइब्रेरी और ‘हेड हॉपर स्टूडियो’ था, जिसमें 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का काम होता था।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि, यह दरअसल एक एनिमेशन सेंटर था, जहां किशोर उम्र के बच्चे कार्टून बनाना और एनिमेशन की बारीकियां सीखने आते थे। इन बच्चों की उम्र लगभग 16 से 17 वर्ष के बीच थी। इमारत के भीतर लकड़ी का भारी मात्रा में फर्नीचर था, जिसने आग की लपटों को और भी विकराल बना दिया। जलते फर्नीचर से उठा घना, जहरीला धुआं पूरी इमारत में भर गया, जिससे भीतर मौजूद बच्चों के लिए बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया। धुएं की घुटन इतनी असहनीय थी कि, अंदर मौजूद छात्र कुछ भी साफ देख नहीं पा रहे थे।
छज्जों और छतों से नीचे कूदने लगे बच्चे
जैसे ही इमारत में धुआं और आग की लपटें फैलनी शुरू हुईं, कोचिंग में पढ़ रहे छात्र-छात्राएं अंदर फंस गए। वहीं जान बचाने के लिए कई छात्र छज्जों और छतों से नीचे कूदने लग गये, जिससे मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई। कुछ बच्चों ने खिड़कियों की सलाखें पकड़कर खुद को नीचे उतारने की कोशिश की, तो कुछ ने ऊंचाई से सीधी छलांग लगा दी।
This is how rules are brazenly flouted. Had there been a fire exit in this building, the casualties could have been reduced to minimum in the Lucknow fire tragedy. But here the first responders had to drill a massive opening to create another exit. Think on the precious time lost… pic.twitter.com/3HC8JBm7sq
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) June 22, 2026
बच्चों की चीखें सुन कर आसपास खड़े स्थानीय लोग, दुकानदार और राहगीर उनकी मदद करने के लिए दौड़ पड़े। वे खिड़की और छज्जों से उतर रहे बच्चों की मदद करने लगे, लेकिन आग की विकरालता के आगे उनके प्रयास सीमित पड़ने लगे।
घटना की खबर जैसे ही परिजनों को लगी, वे बदहवास होकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। माताएं अपने बच्चों के नाम लेकर पुकारती रहीं, पिता भीड़ को चीरकर अंदर घुसने की कोशिश करते रहे। घटनास्थल पर मची अफरा-तफरी और परिजनों की बेबसी किसी का भी कलेजा हिला देने के लिए काफी थी।
राहत-बचाव कार्य जारी
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां तत्काल मौके पर पहुंच गईं। दमकल कर्मी लगातार पानी की बौछारें कर आग पर काबू पाने की जद्दोजहद में जुटे रहे, लेकिन भारी धुएं की वजह से रेस्क्यू टीम को इमारत के अंदर दाखिल होने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऑक्सीजन मास्क पहनकर दमकल कर्मी इमारत के भीतर घुसे। बाद में फायरकर्मियों ने दीवार तोड़कर बिल्डिंग के अंदर प्रवेश किया और अंदर से शवों को बाहर निकाला। राहत कार्य के लिए एक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया गया।
एनडीआरएफ की टीमें भी मौके पर तैनात की गईं और हर कमरे की सघन तलाशी ली गई। घायल छात्रों को तत्काल ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। हादसे की जगह पर बड़ी जनहानि को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कोचिंग संस्थान से सटी अन्य रिहाइशी और व्यावसायिक इमारतों को खाली कराया। यातायात को भी डायवर्ट किया गया, ताकि राहत दल बिना किसी अवरोध के अपना काम कर सके। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया किम, कुल 13 बच्चों को जीवित बाहर निकाला गया और उन सभी को अस्पताल भेजा गया।
डिप्टी सीएम बृजेश पाठक मौके पर पहुंचे
घटना की खबर मिलते ही उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक खुद घटनास्थल पर पहुंचे और लगातार राहत-बचाव कार्यों की निगरानी करते रहे। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, आग अचानक लगी और इसके पीछे का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। उन्होंने बताया कि, इमारत के भीतर लकड़ी के भारी फर्नीचर से उठे धुएं के कारण कुछ भी साफ देख पाना मुश्किल था। पाठक ने भरे गले से कहा, मेरी आंखों के सामने से 14 शव गए हैं। यह बयान सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।

उन्होंने यह भी बताया कि घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश तत्काल प्रभाव से दे दिए गए हैं। प्रमुख सचिव (गृह) और DGP को मौके पर बुलाया गया और उन्हें आग के कारणों की विस्तृत जांच कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया गया।
आज लखनऊ के पुरनिया (सेक्टर डी) स्थित कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने की अत्यंत हृदयविदारक एवं पीड़ादायक दुर्भाग्यपूर्ण घटना से मन अत्यंत व्यथित व दुःखी है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में अपने बच्चों की जान गंवाने वाले शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। घटनास्थल पर… pic.twitter.com/BRhk5d5Cfg
— Brajesh Pathak (@brajeshpathakup) June 22, 2026
सीएम ने रद्द किया अलीगढ़ दौरा
इधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उस समय अलीगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे, जब उन्हें इस भीषण हादसे की सूचना मिली। उन्होंने बिना एक पल की देरी किए अपना दौरा बीच में ही रद्द कर दिया और तत्काल लखनऊ के लिए लौट पड़े। सीएम ने पत्रकारों से कहा, मेरी हार्दिक इच्छा थी कि मैं आज अलीगढ़ में रहूं, लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि लखनऊ में एक दर्दनाक अग्निकांड की घटना हुई है, जिसकी चपेट में कुछ बच्चे आए हैं और उनकी दुखद मौत हुई है, इसलिए मुझे तत्काल वापस जाना पड़ रहा है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों से तुरंत संपर्क किया जाए, हर संभव सहायता दी जाए और घायलों के उचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पीएम ने दी अनुग्रह राशि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दर्दनाक घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की, जबकि घटना में घायल हुए लोगों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री के इस कदम को संवेदना के साथ-साथ सरकारी जिम्मेदारी का प्रतीक माना जा रहा है। हालांकि, मृतकों के परिजन इस मुआवजे से कहीं अधिक अपने लाडलों को वापस चाहते हैं।
Anguished by the loss of lives in a fire mishap in Lucknow, Uttar Pradesh. My condolences to the bereaved families. May the injured recover at the earliest. Rescue operations are underway and authorities are providing all possible assistance.
An ex-gratia of Rs. 2 lakh from…
— PMO India (@PMOIndia) June 22, 2026
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