
लखनऊ। लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक एनिमेशन संस्थान में भीषण आग लगने से 15 युवकों की जान चली गई और 9 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही घोर लापरवाही का नतीजा है, जिसने एक बड़ी त्रासदी का रूप ले लिया। जांच में सामने आया है कि, भवन में बिजली का लोड स्वीकृत सीमा से डेढ़ गुने से भी अधिक था और खतरे के संकेत बार-बार मिल रहे थे, लेकिन किसी ने भी इन्हें गंभीरता से नहीं लिया, जो उपकरण बार-बार चेतावनी दे रहा था, उसे चुप करा दिया जाता था और काम आगे बढ़ता रहता था। इस बेपरवाही की कीमत 15 युवा जिंदगियों ने अपनी जान देकर चुकाई।
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गंभीरता से नहीं ली गई शिकायत
इस दर्दनाक घटना को समझने के लिए उस तकनीकी पहलू को जानना जरूरी है, जो हफ्तों से खतरे की घंटी बजा रहा था। भवन की बिजली लाइन में लगी मिनिएचर सर्किट ब्रेकर यानी एमसीबी बार-बार ट्रिप हो रही थी। वह अपने आप बिजली की सप्लाई बंद कर देती थी। यह कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि एमसीबी का वही काम था जिसके लिए उसे लगाया जाता है, खतरे से पहले आगाह करना।

भवन के किरायेदारों ने बताया कि, गर्मी का मौसम शुरू होते ही यह समस्या और गंभीर हो गई थी। प्रतिदिन कई-कई बार बिजली बंद हो जाती थी और पूरे भवन में अफरातफरी का माहौल बन जाता था। किरायेदार परेशान होते, काम रुकता और लोग शिकायत लेकर प्रबंधन के पास पहुंचते। किरायेदारों ने इसकी शिकायत भवन की देखरेख करने वाले अखिलेश शुक्ला से की, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से लेने के बजाय हर बार एमसीबी को फिर से चालू कर दिया और आगे बढ़ गए। न कोई जांच कराई गई, न किसी विशेषज्ञ को बुलाया गया और न ही बिजली के लोड को कम करने का कोई प्रयास किया गया और यही लापरवाही इतनी बड़ी दुर्घटना की वजह बनी।
MCB ट्रिप को नहीं करना था इग्नोर
एक वरिष्ठ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के अनुसार, एमसीबी मुख्यतः तीन परिस्थितियों में बिजली की सप्लाई बंद करती है। पहली स्थिति शॉर्ट सर्किट की होती है, जब किसी तार में दो विपरीत धाराएं अचानक मिल जाती हैं और भारी मात्रा में करंट प्रवाहित होने लगता है। दूसरी स्थिति ओवरलोड की होती है, यानी जब भवन में उपयोग की जा रही बिजली की मात्रा स्वीकृत सीमा से अधिक हो जाती है और तारों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ने लगता है।
तीसरी स्थिति वायरिंग में तकनीकी खामी की होती है, जब पुरानी या दोषपूर्ण फिटिंग के कारण बिजली का प्रवाह असामान्य हो जाता है। विशेषज्ञों का स्पष्ट और एकमत मत है कि, जब भी एमसीबी बार-बार ट्रिप हो तो उसे महज असुविधा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि तत्काल उसके कारण की गहराई से जांच करानी चाहिए। एमसीबी एक जीवनरक्षक सुरक्षा उपकरण है, वह उपभोक्ता को समय रहते चेतावनी देती है, ताकि बड़ा हादसा टाला जा सके। अलीगंज के इस भवन में यही चेतावनी बार-बार दी जा रही थी, लेकिन इसे सुनने वाला कोई नहीं था।
त्रासदी बयां कर रहे बिजली के आंकड़े
इस हादसे का सबसे चौंकाने वाला और दिल दहला देने वाला पहलू यह है कि, बिजली की खपत के आंकड़े खुद इस त्रासदी की पूरी कहानी बयान करते हैं। अलीगंज के इस व्यावसायिक भवन के बिजली कनेक्शन की स्वीकृत सीमा मात्र 20 केवीए थी। पिछले सात महीनों पर नजर डालें तो सर्दियों में स्थिति नियंत्रण में थी। दिसंबर 2025 में 18 केवीए, जनवरी 2026 में 16.8 केवीए, फरवरी 2026 में 16.44 केवीए और मार्च 2026 में 18.4 केवीए का लोड था, जो सभी स्वीकृत सीमा के भीतर था।

इस दौरान एमसीबी सामान्य रूप से काम कर रही थी और कोई बड़ी समस्या नहीं आ रही थी, लेकिन जैसे-जैसे गर्मी ने दस्तक दी, एयर कंडीशनर, कूलर, पंखे और अन्य उपकरणों के एक साथ उपयोग से बिजली की खपत तेजी से और खतरनाक ढंग से बढ़ने लगी। अप्रैल 2026 में लोड बढ़कर 24.3 केवीए हो गया, जो स्वीकृत सीमा से 21 प्रतिशत अधिक था।
व्यवासायिक भवनों को कड़ी चेतावनी
मई 2026 में यह और उछला और 28.6 केवीए तक जा पहुंचा, यानी सीमा से 43 प्रतिशत अधिक और जून 2026 में तो हालत और भी भयावह हो गई लोड 34.5 केवीए तक पहुंच गया, जो तय सीमा से लगभग दोगुना था। इसी कारण एमसीबी रोज, बल्कि दिन में कई-कई बार ट्रिप हो रही थी, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अगर इस चेतावनी पर ध्यान दिया गया होता और समय रहते इसे सुधारा गया होता, तो इतने बड़े हादसे से बचा जा सकता था।

यदि भवन प्रबंधन ने एमसीबी के बार-बार ट्रिप होने को गंभीरता से लिया और जांच कराकर बिजली का लोड घटाया होता या लोड बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कनेक्शन लिया होता तो भवन में लगे उपकरणों के एक साथ उपयोग को नियंत्रित किया जा सकता था या वायरिंग को उन्नत किया जा सकता था। इनमें से कोई भी एक कदम उठाया गया होता तो शायद आज 15 परिवार अपन बच्चों अर्थी नहीं उठा रहे होते, लेकिन प्रबन्धन ने हर बार एमसीबी को चालू कराने को ही अपनी जिम्मेदारी समझी और यही किया।
यह हादसा केवल अलीगंज का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के व्यावसायिक भवनों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। प्रदेश भर में हजारों ऐसे व्यावसायिक और आवासीय भवन हैं, जहां बिजली के लोड की कोई नियमित मानिटरिंग नहीं होती है, जहां एमसीबी जैसे जीवनरक्षक सुरक्षा उपकरणों को तकनीकी चेतावनी के रूप में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की झंझट के रूप में देखा जाता है। ऐसे भवनों में किसी भी दिन ऐसी ही त्रासदी घट सकती है।
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