
गाजियाबाद। लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने शासन-प्रशासन और सभी संबंधित विभागों को हिलाकर रख दिया है। अब सभी विभाग एक्टिव मोड में आ चुके हैं और फायर सेफ्टी की जांच तेज कर दी गई है। प्रदेश के गाजियाबाद जिले में भी प्रशासन हरकत में आ गया है और जीडीए ने पूरे जिले में फायर सेफ्टी को लेकर व्यापक जांच अभियान शुरू कर दिया है। जीडीए वीसी नंद किशोर कलाल के सख्त निर्देश के बाद आठ जोन की टीमों ने मंगलवार से ही सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान जब टीमों ने जमीनी हकीकत देखी हैरान रह गई क्योंकि बड़े पैमाने पर लापरवाही और अनियमितताएं नजर आईं।
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फायर NOC तक नहीं
जांच अभियान के दौरान अब तक 206 इमारतों को चिह्नित किया गया है, जहां या तो फायर सेफ्टी के इंतजाम पूरी तरह फेल पाए गए या फिर संबंधित संस्थानों के पास फायर एनओसी ही नहीं थी। यह आंकड़ा बता रहा है कि, गाजियाबाद में फायर सेफ्टी के मामले में कितनी बड़े पैमाने पर लापरवाही बरती जा रही है और लोगों की जान किस तरह खतरे में ह। प्राधिकरण ने इन सभी इमारतों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और अब तक 62 इमारतों को सील किया जा चुका है।

सील की गई इमारतों में कोचिंग सेंटर के अलावा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों वाली इमारतें शामिल हैं। बाकी बचे मामलों में भी संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई के लिए पत्र लिख दिया गया है। जीडीए के अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज किया जाएगा और लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान या बिल्डिंग मालिक को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
कभी नहीं हुई ठोस कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा और जरूरी सवाल यह है कि, जब ये खामियां और कमियां लंबे समय से मौजूद थीं, तो संबंधित विभागों की नजर इन पर पहले क्यों नहीं पड़ी? इससे पहले भी कई बार इसी तरह के अभियान चलाए गए, नियमों के उल्लंघन पर नोटिस भी भेजे गए, लेकिन कभी भी ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई जिसकी वजह से इमारत मालिकों के हौसले बुलंद रहे।
इंदिरापुरम के गौर ग्रीन एवेन्यू में हाल ही में आग की एक घटना हुई थी जिसके बाद जीडीए ने सर्वे तो कराया, लेकिन उसके बाद भी कोई ऐसी ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जो दूसरे लापरवाह इमारत मालिकों के लिए नजीर बन सके और उन्हें सबक सिखा सके। अब लखनऊ की त्रासदी के बाद जो अभियान शुरू हुआ है वह पहले ही शुरू हो जाता तो शायद हालात इतने खराब नहीं होते।
35 कोचिंग संस्थानों को नोटिस
लखनऊ के दर्दनाक हादसे के बाद गाजियाबाद के कोचिंग संस्थानों पर भी शिकंजा कसा गया है। फायर विभाग, पुलिस, जिला प्रशासन और बिजली विभाग ने मिलकर संयुक्त रूप से जांच अभियान शुरू कर दिया है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने बताया कि मंगलवार को जिले के करीब 81 कोचिंग सेंटरों की विभागीय टीमों ने बारीकी से जांच की।

इनमें से 35 कोचिंग सेंटर ऐसे पाए गए जो अग्नि सुरक्षा, बिजली सुरक्षा और बिल्डिंग नियमों का पालन नहीं कर रहे थे और जहां पढ़ने वाले हजारों छात्रों की जानें हमेशा खतरे में रहती थीं। इन सभी 35 कोचिंग सेंटरों को संबंधित विभाग की ओर से नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर सभी कमियों को दूर करने का समय दिया गया है। तय समय सीमा के बाद फायर विभाग जिलाधिकारी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगा और उसके आधार पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
RWA को कड़े निर्देश
जीडीए ने जिले की उन सभी आवासीय सोसायटियों की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन यानी आरडब्ल्यूए को कड़े निर्देश वाले पत्र भेजे हैं जहां सोसायटियों का गठन हो चुका है। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि, वे अपनी-अपनी सोसायटियों में अग्निशमन उपकरण, फायर अलार्म सिस्टम, पानी के हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम और इमरजेंसी निकास मार्गों को तुरंत प्रभाव से दुरुस्त करें। जीडीए ने यह भी साफ कर दिया है कि, प्राधिकरण की टीमें समय-समय पर बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक सोसायटियों में पहुंचकर जांच करेंगी और कहीं भी कमी पाए जाने पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी।

एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने मंगलवार को पांच बैंक्वेट हॉल की जांच कर उन्हें नोटिस जारी किए। निरीक्षण के दौरान इन बैंक्वेट हॉल में अग्निशमन यंत्रों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं मिली और इमरजेंसी निकास की समुचित व्यवस्था भी नदारद पाई गई। सभी को अग्नि सुरक्षा व्यवस्था तुरंत दुरुस्त करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
मॉक ड्रिल के निर्देश
जीडीए और दमकल विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि, वे सोसायटियों और बिल्डिंगों में फायर ड्राइव-वे और इमरजेंसी गेट को हमेशा खाली रखें और वहां किसी भी प्रकार का कब्जा न होने दें। आग बुझाने वाले सिलेंडरों, पानी के पाइप और अलार्म सिस्टम को नियमित रूप से जांचते रहें।
फायर एनओसी को समय पर नवीनीकरण कराएं, पास नक्शे के विरुद्ध कोई अवैध निर्माण न करें और सोसायटियों व दफ्तरों में समय-समय पर मॉक ड्रिल कराते रहें ताकि आपात स्थिति में लोग सुरक्षित तरीके से बाहर निकल सकें। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक गाजियाबाद की हर इमारत फायर सेफ्टी के मानकों पर खरी नहीं उतर जाती।
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