
पीलीभीत। शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की शुरुआत पीलीभीत में हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो चुकी है। एक्सप्रेसवे जिले के बीसलपुर और सदर तहसील के कुल 48 गांवों से होकर गुजरेगा। गजट अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद संयुक्त सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है। इस एक्सप्रेसवे के बनने से तराई क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है।
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गांव-गांव में सर्वे कर रहीं टीमें
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई), एनएच की कंसल्टेंसी एजेंसी और जिले के राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गांव-गांव में सर्वे कर रही है। टीम एलाइनमेंट के अनुसार यह देख रही है कि प्रत्येक गांव में कितनी भूमि एक्सप्रेसवे के अधिग्रहण में आएगी, उस पर वर्तमान समय में कोई निर्माण है या खेती हो रही है। टीम को दो महीने के अंदर पूरा सर्वे कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सर्वे शुरू हुए 15 दिन बीत चुके हैं और काम तेज गति से चल रहा है।
48 गांवों की बदलेगी तस्वीर
इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का मार्ग बीसलपुर तहसील के 39 गांवों और सदर तहसील के 9 गांवों से होकर गुजरेगा। बीसलपुर तहसील के बिलसंडा ब्लॉक के प्रमुख गांवों में तिलसंडा, बमरोली, लिलहर, मीरपुर हरायपुर, रामपुर अमृत, मुड़गवा, सुहेला, ईंटगांव, विरसिंगपुर, महेशापुर शामिल हैं। वहीं बीसलपुर ब्लॉक के कटकवारा, बरखेड़ा यासीन, बिहारीपुर हीरा, अटकोना, बहादिया, नौगवां संतोष, जोगीठेर आदि गांव भी इस मार्ग में आएंगे। सदर तहसील के वार नवादा, गुलड़िया जाफरपुर समेत नौ गांव भी प्रभावित होंगे।

मई माह में इन 48 गांवों की गजट अधिसूचना जारी की गई थी। अधिसूचना के बाद इन गांवों में भूमि की खरीद-फरोख्त पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। जिलाधिकारी ने उप निबंधक बीसलपुर और सदर को स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि, इन गांवों में किसी भी प्रकार का बैनामा दर्ज न किया जाए।
700 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट
शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 700 किलोमीटर बताई जा रही है। यह एक्सप्रेसवे शामली जिले से शुरू होकर मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली (बहेड़ी तहसील), पीलीभीत, शाहजहांपुर (पूवायां), लखीमपुर खीरी होते हुए गोरखपुर तक जाएगा। यह परियोजना कुल 22 जनपदों से होकर गुजरेगी।
यह एक्सप्रेसवे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ने का काम करेगा। पिछले साल दिसंबर में एनएचएआई के दिल्ली मुख्यालय ने इसके एलाइनमेंट को मंजूरी प्रदान की थी। छह लेन वाला यह एक्सप्रेसवे तराई और पूर्वी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने वाला है।
किसानों और गांवों पर क्या होगा असर
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे के बनने के बाद इन गांवों की किस्मत और दिशा दोनों बदल जाएंगी। स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों, ठेकेदारों, ट्रांसपोर्ट और छोटे-छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा। एक्सप्रेसवे के पूरा हो जाने के बाद क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही नौकरियों के अवसर प्राप्त होंगे।
सबसे बड़ा फायदा जमीन के दामों में होने वाला उछाल होगा, जो भूमि एक्सप्रेसवे के करीब आएगी, उसकी कीमत कई गुना बढ़ सकती है। साथ ही बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से कृषि उत्पादों को बाजार पहुंचाने में आसानी होगी, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।
जल्द शुरू होगी मुआवजा वितरण की प्रक्रिया
विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी विजय वर्धन तोमर ने बताया कि सर्वे कार्य के बाद भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 3ए की कार्यवाही के तहत राजस्व विभाग ने पहले ही गाटा संख्या की जानकारी तैयार कर ली थी। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का प्रयास है कि किसानों को उचित मुआवजा मिले और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो। हालांकि भूमि अधिग्रहण के दौरान कुछ किसान अपनी उपजाऊ जमीन जाने से चिंतित भी हैं। प्रशासन इन चिंताओं को दूर करने के लिए लगातार बातचीत कर रहा है।
उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति
यह एक्सप्रेसवे योगी आदित्यनाथ सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर विकास नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पिछले वर्षों में प्रदेश में आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, गंगा और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो चुके हैं। अब शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे इन सभी को एक सूत्र में पिरोने वाला है। इस परियोजना से न सिर्फ तराई बल्कि पूरे पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक गति बढ़ने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन, उद्योग, कृषि और व्यापार को नई राह मिलेगी।
वर्तमान में सर्वे टीम दिन-रात लगी हुई है। दो माह के अंदर सर्वे पूरा होने के बाद भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और निर्माण कार्य की समयरेखा तय की जाएगी। स्थानीय लोगों में इस परियोजना को लेकर उत्साह है, साथ ही कुछ गांवों में अपनी जमीन बचाने की चिंता भी दिख रही है।
शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की तराई बेल्ट के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। पीलीभीत के 48 गांव इस विकास यात्रा के केंद्र में हैं। सर्वे का यह चरण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद अगला बड़ा कदम भूमि अधिग्रहण और निर्माण होगा। अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला तो आने वाले 3-4 वर्षों में यह एक्सप्रेसवे तराई की सड़कों की तस्वीर ही बदल देगा।
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