
गाजियाबाद। एक्सप्रेसवे हब बन चुके उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी में अब एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर पूर्वांचल तक के सफर को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की साझा कोशिशें अब धरातल पर उतरती हुई नजर आने लगी हैं।
इसे भी पढ़ें- गंगा एक्सप्रेसवे से तीर्थ, विरासत और इको-टूरिज्म स्थलों तक अब आसान हुई पहुंच
तेजी से हो रहा निर्माण कार्य
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने ऐलान किया है कि, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली 14 किलोमीटर लंबी महत्वपूर्ण लिंक रोड का निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि, ये परियोजना जुलाई 2026 तक पूरी हो जाएगी। इस लिंक रोड के शुरू होते ही दिल्ली से प्रयागराज, वाराणसी और पूर्वांचल के सुदूर जिलों तक पहुंचने के लिए यात्रियों को ट्रैफिक में अपना समय नहीं बर्बाद करना पड़ेगा।

ये एक्सप्रेसवे न सिर्फ उनके सफर को आसान करेगा, बल्कि उनका समय भी बचाएगा। यह परियोजना न केवल बुनियादी ढांचे का विकास है, बल्कि यूपी की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक सुगमता के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है। गाजियाबाद और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों के निवासियों के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश की यात्रा हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर से प्रयागराज या वाराणसी जाने के लिए यात्रियों को भारी ट्रैफिक जाम और पुराने नेशनल हाईवे के घुमावदार रास्तों से गुजरना पड़ता है, लेकिन इस नई लिंक रोड के निर्माण से यह पूरी तस्वीर बदलने वाली है।
यह 14 किलोमीटर का हिस्सा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पांचवें चरण को सीधे गंगा एक्सप्रेसवे के प्रवेश बिंदु से जोड़ देगा। इस एकीकरण का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि, वाहन चालक दिल्ली के सराय काले खां से चढ़कर बिना किसी बड़े व्यवधान के सीधे पूर्वांचल के प्रवेश द्वार तक पहुंच सकेंगे। जानकारों का मानना है कि, इस कनेक्टिविटी से यात्रा के समय में कम से कम 3 से 4 घंटे की बचत होगी, जो कि लॉजिस्टिक्स और इमरजेंसी सेवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
पूरा हो चुका है 82% काम
परियोजना की लागत और तकनीकी पहलुओं पर नजर डालें, तो इस 14 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण पर करीब 524 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। NHAI के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट का लगभग 82 प्रतिशत निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अब केवल अंतिम चरण की फिनिशिंग और कुछ छोटे पुलियाओं का काम शेष है।
अधिकारी इस बात को लेकर काफी आश्वस्त हैं कि, यदि मानसून के शुरुआती दौर में बहुत अधिक भारी बारिश नहीं हुई, तो जुलाई के अंत तक इस रोड को आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त मैनपावर और आधुनिक मशीनों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि तय समय सीमा में कोई चूक न हो।
इस पूरी परियोजना का खाका बेहद रणनीतिक तरीके से तैयार किया गया है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का पांचवां चरण वर्तमान में जाहिदपुर तक विकसित किया जा रहा है। जाहिदपुर के आगे लगभग 4 किलोमीटर का हिस्सा पहले ही बनकर तैयार हो चुका है, जो सीधे गंगा एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट को स्पर्श करता है। अब जो शेष 14 किलोमीटर का निर्माण कार्य चल रहा है, वह उस कड़ी को पूरा करेगा जो इन दोनों विशाल एक्सप्रेसवे को एक-दूसरे का पूरक बना देगी।
ट्रक ऑपरेटरों के लिए वरदान
यह लिंक रोड एक तरह से ट्रांजिट कॉरिडोर का काम करेगी। इससे दिल्ली-एनसीआर का ट्रैफिक सीधे मेरठ के बाहरी इलाकों से होते हुए गंगा एक्सप्रेसवे पर डाइवर्ट हो जाएगा, जिससे गाजियाबाद और मेरठ शहर के आंतरिक ट्रैफिक पर पड़ने वाला बोझ भी काफी हद तक कम हो जाएगा। यह लिंक रोड केवल एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के दो सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क को आपस में जोड़ने वाला एक हाई-स्पीड ब्रिज है।
गंगा एक्सप्रेसवे, जो मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है, भारत के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक है। वहीं, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे दिल्ली की लाइफलाइन बन चुका है। इन दोनों के मिलन से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच एक ऐसा कॉरिडोर तैयार हो जाएगा, जो भविष्य में औद्योगिक गलियारों के विकास का आधार बनेगा। व्यापारियों और ट्रक ऑपरेटरों के लिए यह मार्ग किसी वरदान से कम नहीं होगा, क्योंकि ईंधन की बचत के साथ-साथ वाहनों के रखरखाव का खर्च भी कम होगा।

सड़क नेटवर्क किसी भी राज्य की आर्थिक रीढ़ होता है और उत्तर प्रदेश इस मामले में देश का नेतृत्व कर रहा है। दिल्ली-मेरठ और गंगा एक्सप्रेसवे के आपस में जुड़ने से न केवल यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि कृषि और लघु उद्योगों को भी एक नया बाजार मिलेगा। पूर्वांचल के किसान अपने उत्पाद जैसे सब्जियां, फल और अनाज बहुत कम समय में दिल्ली की आजादपुर मंडी या एनसीआर के अन्य बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। इसके अलावा, वाराणसी और प्रयागराज जैसे धार्मिक पर्यटन केंद्रों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन उद्योग में भी भारी उछाल आने की उम्मीद है। श्रद्धालु अब एक ही दिन में दिल्ली से प्रयागराज की यात्रा कर वापसी की योजना बना सकेंगे, जो पहले मुमकिन नहीं था।
रियल एस्टेट सेक्टर के लिए फायदेमंद
ट्रैफिक प्रबंधन के नजरिए से देखें तो यह लिंक रोड एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में उभरेगी। अक्सर त्योहारों या चुनावी सीजन के दौरान नेशनल हाईवे पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है। यह नई सड़क उस दबाव को सोख लेगी और वाहनों को एक निर्बाध गति प्रदान करेगी। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि एक्सप्रेसवे के इस एकीकरण से गाजियाबाद, हापुड़ और मेरठ जैसे जिलों में रियल एस्टेट सेक्टर को भी काफी फायदा होगा। लिंक रोड के आसपास नए गोदामों, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स पार्कों के निर्माण की संभावनाएं बढ़ गई हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।
इसे भी पढ़ें- PM मोदी ने किया गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, बोले- ‘सपा हमेशा से विकास विरोधी रही है’



