
तेहरान। पश्चिम एशिया में एक बार फिर बारूद की गंध तेज होने लगी है और दुनिया एक बड़े महायुद्ध की आहट महसूस होने लगी है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब सीधे सैन्य टकराव की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ हुई एक गोपनीय बैठक ने तेहरान की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके जवाब में ईरानी सेना ने अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी जारी की है।
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उप-प्रमुख मोहम्मद जाफर ने दिया आक्रामक बयान
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि, वह अमेरिका की किसी भी हिमाकत या सैन्य कार्रवाई का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। दोनों देशों के बीच विवाद की मुख्य जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और तेल की कीमतों को लेकर बनी हुई है, जिस पर कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है।

ईरानी सैन्य मुख्यालय के उप-प्रमुख मोहम्मद जाफर असादी ने एक बेहद आक्रामक बयान जारी करते हुए कहा कि, अमेरिका के बयान और कार्य केवल मीडिया को गुमराह करने के लिए हैं। असादी के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन का असली मकसद तेल की कीमतों को गिरने से रोकना और खुद के पैदा किए गए दलदल से बाहर निकलना है।
ईरानी सेना ने दावा किया है कि, उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि, अमेरिका किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते या संधि के प्रति वफादार नहीं है। इस बीच, ईरान के भीतर एक दर्दनाक हादसा भी हुआ है, जहां पिछले युद्ध के दौरान गिराए गए क्लस्टर बमों और बिना फटे गोला-बारूद की चपेट में आने से ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRG) के 14 सदस्यों की मौत हो गई। यह विस्फोट तेहरान के उत्तर-पश्चिम में जंजन शहर के पास हुआ, जिसने ईरानी खेमे में गुस्से और शोक की लहर पैदा कर दी है।
बिखर गया है ईरान- ट्रंप
दूसरी ओर, वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह ईरान के साथ मौजूदा बातचीत की स्थिति और प्रस्तावों से कतई संतुष्ट नहीं हैं। मरीन वन से रवाना होते समय उन्होंने ईरान के नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वहां का नेतृत्व पूरी तरह से बिखरा हुआ और असमंजस में है।

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के अंदर भारी खींचतान चल रही है और वहां के नेताओं को खुद नहीं पता कि उनका असली नेता कौन है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता हाल के संघर्षों के बाद लगभग खत्म हो चुकी है, उनके पास न तो नौसेना बची है और न ही वायुसेना।
खतरे में वैश्विक बाजार
ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं को हवा देते हुए कहा कि अगर कूटनीति विफल रहती है, तो उनके पास युद्ध का विकल्प हमेशा खुला है। सबसे चौंकाने वाला बयान उन्होंने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को लेकर दिया। ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कदम उठाने के लिए उन्हें कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है, और वह इसे असंवैधानिक नहीं मानते।

फिलहाल, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी गतिरोध ने वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो यह टकराव जल्द ही एक भीषण युद्ध का रूप ले सकता है।
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