युद्ध के बीच 24 घंटे में तीन बार हुआ भारत-ईरान संपर्क, ईरानी डिप्टी FM से मिले S जयशंकर

नई दिल्ली। एक तरफ तो ईरान अमेरिका-इजराइल युद्ध तेज  हो गया है। दोनों तरफ से एक दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ भारत और ईरान के बीच राजनयिक संपर्क तेज हो गया है। पिछले 24 घंटों में दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच तीन बार संपर्क हुआ, जो क्षेत्रीय संकट की गंभीरता को बखूबी दर्शा रहा है।

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आज छह मार्च को भी रायसीना डायलॉग के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह के बीच बैठक हुई। दोनों देशों के राजनयिकों ने संक्षिप्त बातचीत की, हालांकि ये चर्चा किस विषय पर हुई, इसका खुलासा नहीं किया गया। दोनों शीर्ष नेतृत्व की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष तेज हो चुका है।

ट्रंप प्रशासन पर साधा निशाना

आपको बता दें कि, बीते 28 फरवरी की अमेरिका-इजरायल हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो चुकी है, जिसके बाद ईरान में 40 दिनों का शोक घोषित किया गया है। खातिबजादेह रायसीना डायलॉग में भाग लेने दिल्ली आए थे और उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप प्रशासन पर जमकर निशाना साधा।

S जयशंकर

उन्होंने कहा, ट्रंप न्यूयॉर्क के मेयर भी नहीं चुन सकते, वे ईरान के सुप्रीम लीडर कैसे चुन सकते हैं? यह कॉलोनियल अप्रोच है। वे ईरान के लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए राष्ट्रपति को हटाना चाहते हैं। इससे पहले गुरुवार 5 मार्च को जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सेयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की थी। दोनों ने क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की, हालांकि MEA ने इस बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। उसी दिन विदेश सचिव विक्रम मिसरी ईरानी दूतावास गए और दिवंगत सुप्रीम लीडर खामेनेई के शोक सभा में शामिल हुए।

भारत ने जताई संवेदना

उन्होंने कंडोलेंस रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए, जो भारत की संवेदना का प्रतीक था। ईरान के उप विदेश मंत्री खातिबजादेह ने रायसीना डायलॉग में IRIS डेना (ईरानी फ्रिगेट) के हिंद महासागर में डूबने पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। जहाज खाली था और उस पर कोई हथियार नहीं थे। उन्होंने कहा कि अभ्यास में हिस्सा लेने आए कई युवा ईरानी नौसैनिकों की जान चली गई। यह घटना 4 मार्च को श्रीलंका तट से दूर हुई, जहां अमेरिकी पनडुब्बी ने Mk-48 टॉरपीडो से जहाज को डुबोया। ईरान ने इसे अमेरिकी आक्रमण बताया, जबकि पेंटागन ने इसे युद्ध का हिस्सा माना।

भारत का आधिकारिक रुख तटस्थ और संतुलित रहा है। संघर्ष शुरू होने पर भारत ने गहरी चिंता जताई और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, सैन्य संघर्ष किसी भी समस्या का समाधान नहीं कर सकता है। उन्होंने संवाद और कूटनीति पर जोर दिया। भारत ने यूएई, सऊदी अरब, कतर, ओमान जैसे खाड़ी देशों के नेताओं से बात की और हमलों की निंदा की।

गृह मंत्रालय ने जारी किया बयान

इसके बाद गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। यह राजनयिक गतिविधियां भारत की ऊर्जा सुरक्षा, खाड़ी में भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और हिंद महासागर में स्थिरता से जुड़ी हैं। ईरान भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहा है और संघर्ष से तेल कीमतें प्रभावित हो रही हैं। भारत ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के संकट पर चिंता जताई है।

रायसीना डायलॉग में खातिबजादेह ने कहा कि ईरान अमेरिकी बेस और एसेट्स पर हमला कर रहा है, अरब पड़ोसियों पर नहीं। उन्होंने भारत-ईरान के सभ्यतागत संबंधों का जिक्र किया।

जानकारों का मानना है कि, भारत तटस्थ रहकर मध्यस्थता की भूमिका निभा सकता है। पिछले 24 घंटों के तीन संपर्क (मिसरी का दूतावास दौरा, जयशंकर-अराघची फोन पर बातचीत और जयशंकर-खातिबजादेह मुलाकात) से साफ है कि भारत संकट पर नजर रखे हुए है और दोनों पक्षों से बातचीत जारी रखेगा। क्षेत्रीय युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और शिपिंग रूट्स को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में भारत कूटनीति से विवाद को हल करने की बात कर रहा है।

 

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