फीनिक्स मॉल के पास सब्जी मंडी में आग का तांडव, धमाकों के साथ 50 दुकानें राख

 लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ के कृष्णा नगर इलाके में गुरुवार की रात एक ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। यहां फीनिक्स यूनाइटेड मॉल के पास स्थित विशाल सब्जी मंडी में अचानक से भीषण आग लग गई और देखते ही देखते करीब 50 दुकानों को अपनी आगोश में ले लिया। इस घटना के चपेट में आईं सभी 50 दुकानें जलकर रख के ढेर में तब्दील हो गई।

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तीन किमी तक दिखा धुआं

यह हादसा उस वक्त हुआ जब दिन भर की भागदौड़ के बाद बाजार की रौनक धीरे-धीरे कम हो रही थी और दुकानदार अपना कारोबार समेट रहे थे।  गुरूवार की रात के करीब 10 बजे अचानक मंडी के एक हिस्से से आग की लपटें उठनी शुरू हुईं, जिसे देखकर वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और लोग उसे बुझाने के लिए दौड़े, लेकिन कोई कुछ कर पाता, उससे पहले ही आग ने इतना विकराल रूप धारण कर लिए कि, उसकी लपटें तेजी से ऊपर उठने लगी और आसमान में उठता काला धुआं करीब 3 किलोमीटर की दूरी से भी साफ-साफ़ दिखाई देने लगा, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया।

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इस अग्निकांड की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि, आग लगने के कुछ ही देर बाद मंडी के भीतर एक के बाद एक करीब 12 जोरदार धमाके सुनाई दिए। इन धमाकों की गूंज से आसपास की रिहाइशी कॉलोनियां दहल उठीं और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि, ये धमाके मंडी के भीतर दुकानों और छोटे होटलों में रखे गैस सिलेंडरों के फटने की वजह से हुए थे।

मौके पर पहुंची 10 दमकल गाड़ियां 

इन सिलेंडरों के फटने ने आग में घी का काम किया और लपटें इतनी ऊंची उठने लगीं कि, उन्होंने आसपास की सभी दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि शुरुआत में उस पर काबू पाना नामुमकिन नजर आ रहा था।

कृष्णा नगर, आलमबाग और पीजीआई समेत आसपास के विभिन्न फायर स्टेशनों से दमकल की कुल 10 गाड़ियों को तुरंत मौके पर रवाना किया गया। दमकल कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने का काम शुरू किया, लेकिन मंडी में रखी भारी मात्रा में प्लास्टिक की बोरियां, लकड़ी के खोखे, गत्ते और अन्य ज्वलनशील सामग्री के कारण आग लगातार बढ़ती जा रही थी।

करीब 50 हजार स्क्वायर फीट में फैली इस विशाल मंडी में लगभग 200 दुकानें स्थित थीं, जिनमें से करीब 50 दुकानें इस हादसे की भेंट चढ़ गईं। इन दुकानों में फल, सब्जी, अनाज और किराने का कीमती सामान रखा हुआ था, जो मिनटों में जलकर खाक हो गया। फायर ब्रिगेड के जवानों को आग पर पूरी तरह काबू पाने में करीब 3 घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी और रात 1 बजे के बाद ही स्थिति नियंत्रण में आ सकी।

सुरक्षित बाहर निकाले गए लोग

डीसीपी साउथ अमित कुमार आनंद ने घटना स्थल का मुआयना करने के बाद बताया कि, प्रारंभिक जांच में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट सामने आया है। माना जा रहा है कि, मंडी के भीतर बिजली के तारों के जंजाल में हुए एक फाल्ट ने चिंगारी पैदा की, जिसने सूखे पत्तों और प्लास्टिक के कचरे को पकड़ लिया और फिर पूरी मंडी आग के गोले में तब्दील हो गई। राहत की बात केवल इतनी रही कि इस पूरे हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, क्योंकि आग लगने के दौरान अधिकांश लोग सुरक्षित बाहर निकल आए थे।

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हालांकि, आर्थिक रूप से यह नुकसान बहुत बड़ा है क्योंकि कई छोटे व्यापारियों ने अपनी पूरी जमा पूंजी इन दुकानों में लगा रखी थी, जो अब मलबे के ढेर में बदल चुकी है। प्रशासन और पुलिस बल ने सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके को खाली करा लिया था और कृष्णा नगर एसीपी सहित आशियाना और अन्य थानों की पुलिस फोर्स ने घंटों तक मोर्चा संभाले रखा।

नुकसान के आंकलन में जुटी टीम

वर्तमान में मंडी में कूलिंग का काम पूरा किया जा चुका है और राजस्व विभाग की टीम नुकसान के वास्तविक आंकलन में जुट गई है। इस अग्निकांड ने एक बार फिर राजधानी की मंडियों और बाजारों में अग्नि सुरक्षा मानकों की कमी और बिजली के झूलते तारों के खतरों को उजागर कर दिया है। पीड़ित दुकानदारों के चेहरों पर मायूसी छाई हुई है और वे अब सरकार से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं ताकि वे अपनी उजड़ी हुई दुनिया को फिर से बसा सकें।

 

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